अंक : 01-15 Sep, 2017 (Year 20, Issue 17)

यमन पर फिर हमला


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    पिछले दिनों सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने एक बार फिर यमन की धरती पर हमला बोला। इस हमले में 14 लोग मारे गये। यमन की राजधानी साना के नागरिक आबादी वाले इलाके में किये गये इस हमले के बाद हमले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। 

    पिछले 2 वर्षों में सऊदी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं के हमलों ने यमन को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अब तक दस हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं व 30 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। सऊदी अरब यमन में हौथी विद्रोहियों को खत्म करने के नाम पर ये हमले लगातार करता रहा है। हौथी विद्रोहियों को ईरान समर्थित शियाओं का संगठन कहा जाता है। 

    इस हवाई हमले के बाद गठबंधन सेनाओं ने नागरिक इलाके में हमले में अपनी तकनीकी गलती को स्वीकार किया। गठबंधन सेनाओं के प्रवक्ता ने कहा कि हौथी विद्रोही नागरिक आबादी के बीच में अपना कमांड व संचार केन्द्र स्थापित कर रहे हैं। इस तरह वे नागरिकों को अपने सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इस केन्द्र को निशाना बनाने में उनसे चूक हुई व निर्दोष नागरिक मारे गये।

    इस हमले से 2 दिन पूर्व हुये हमलों में करीब 40 लोग मारे गये थे। यमन अरब के इलाके के गरीब देशों में से एक रहा है। करीब 33 वर्षों तक यहां अली अब्दुल सलेह का शासन रहा। 1990 में उत्तरी व दक्षिणी यमन के एकीकरण के बाद राष्ट्रपति पद पर सलेह लगातार काबिज रहा। 90 के कुवैत संकट के वक्त यमन ने इराक पर अमेरिकी हमले का विरोध किया। तभी से सऊदी अरब व अमेरिकी साम्राज्यवादियों की निगाहें यमन के प्रति टेढ़ी हो गयी।

    2004 में शिया हौथी विद्रोहियों ने यमन सरकार के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया। वे सरकार का तख्ता पलट कर यमन में शिया धार्मिक कानून लागू कराना चाहते थे। इस दौरान यमन में अलकायदा के ट्रेनिंग कैम्म चलने का आरोप लगा। अमेरिकी साम्राज्यवादी यमन पर जब तब बम बरसाते रहे। 2009 के बाद अमेरिकी द्रोण हमलों में काफी तेजी आ गयी।

    2011 में अरब जगत में जनविद्रोह की आंच यमन तक भी पहुंची। वहां सऊदी अरब व अमेरिकी समर्थन से सलेह को हटा हादी को राष्ट्रपति बना दिया गया। 2012 से हादी की सत्ता के खिलाफ भी हौथी विद्रोही लगातार सक्रिय रहे और 2015 में उन्होने राजधानी साना पर कब्जा कर अपनी सरकार कायम कर ली। हादी को सऊदी अरब जाकर शरण लेनी पड़ी। तभी से अमेरिकी-सऊदी शासक हादी को फिर से सत्ता पर बैठाने के लिये हौथी विद्रोहियों पर लगातार बमबारी कर रहे हैं।

    इस तरह यमन गृहयुद्ध के साथ सऊदी-अमेरिकी हस्तक्षेप की लगातार चपेट में है। सऊदी अरब किसी भी कीमत पर हौथी विद्रोहियों को हरा ईरान के प्रभाव को कम करना चाहता है।

    इन दो वर्षां में लगभग 2.7 करोड़ की आबादी वाला यमन बुरी तरह तबाह हो चुका है। अकाल के साथ-साथ वहां हैजा फैल रहा है। 70 लाख लोग भूखमरी की कगार पर हैं और 80 प्रतिशत आबादी मानवीय मदद पर निर्भर है। दो साल के लगातार हमलों के बावजूद सऊदी शासक अपने मन की नहीं कर पा रहे हैं। उनके हमले लगातार दुनिया भर में आलोचना कर मुद्दा बन रहे हैं। गृहयुद्ध यमन को एकबार फिर विभाजन की ओर ले जा रहा है।

    यमन के वर्तमान हालात के लिये सऊदी शासक व उनके पीछे खड़े अमेरिकी साम्राज्यवादी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। एक ओर ये अपने घृणित मंसूबों की पूर्ति के लिये अलकायदा सरीखे संगठन खड़े करते हैं। आई.एस. को बढ़ावा देते हैं फिर आंतक के खिलाफ युद्ध का नारा दे इराक-यमन आदि देशों में बम वर्षा कर निर्दोषों का कत्लेआम करते हैं।

    यमन की जनता जो गृहयुद्ध व बाहृय हस्तक्षेप में लगातार मारी जा रही है, पलायन को मजबूर हो रही है। उसके हितों को संघर्षरत दोनों पक्ष पूरा नहीं करते। उसे सऊदी-अमेरिकी पिट्ठू हादी व हौथी विद्रोहियों दोनों से मुक्ति चाहिये।

Labels: अन्तराष्ट्रीय


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