अंक : 01-15 Sep, 2017 (Year 20, Issue 17)

पेरू में अध्यापक हड़ताल पर


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    मैक्सिको में 15 जून से शुरू हुयी अध्यापकों की हड़ताल आज दो महीने बीत जाने के बावजूद जारी है। ये अध्यापक अपने वेतन वृद्धि व शिक्षा में हो रहे सुधारों को रोकने व शिक्षा में सरकारी खर्च बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अभी इन अध्यापकों को मात्र 1200 से 1500 पेरूवियन सोल (लगभग 400 से 500 डालर) ही मिलते हैं। ये अध्यापक इसे 1000 डॉलर करने की मांग कर रहे हैं। 

    4 जुलाई को राष्ट्रपति पेड्रो पाब्लो कुंजिन्सकी की सरकार के साथ हुयी वार्ता में सरकार मात्र 600-650 डॉलर तक ही वेतन वढ़ाने के लिए राजी हुयी लेकिन अध्यापकों की यूनियनों ने मना कर दिया। सरकार ने अध्यापकों को धमकी दी कि जो 7 जुलाई तक अपने कॉलेज में नहीं पहुंचेगा उसकी तनख्वाह काट ली जायेगी। तब 4 क्षेत्रीय यूनियनों ने तो सरकार की बात मान कर हड़ताल समाप्त कर दी लेकिन बाकी यूनियनों ने समर्पण नहीं किया और आज भी वे संघर्ष के मैदान में डटी हुयी हैं। 

    आज मैक्सिकों में केवल अध्यापक ही नहीं वरन् खान श्रमिक से लेकर डॉक्टर तक हड़ताल कर रहे हैं। इसके मूल में एक ही चीज है -निजीकरण। दरअसल निजीकरण के चलते सरकार अपने सरकारी खर्च यानी जो खर्च वह जनता की शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं पर खर्च करती थी, उसे बंद कर रही है या कम कर रही है। इसका परिणाम हो रहा है - सरकारी क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव व संसाधनों की कमी तथा स्टाफ की कमी। जिसके कारण न तो जनता को अच्छी शिक्षा या स्वास्थ्य मिल पा रहा है और न ही जो लोग वहां काम कर रहे हैं वे अपने काम से संतुष्ट हो पा रहे हैं तथा उनको जनता की नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। जो लोग काम कर रहे हैं उनको तनख्वाह भी कम दी जा रही है। इसलिए इस माह में खान श्रमिकों के साथ-साथ डॉक्टर, न्यायिक कर्मचारी भी अपनी मांगों को मनवाने के लिए सड़क पर उतरे। डाक्टरों की यूनियन ने अध्यापकों की हड़ताल को समर्थन भी दिया।  

    सरकार इन अध्यापकों की हड़ताल को कुचलने के लिए राज्य में आपातकाल लगा रही है। 21 जून को सरकार ने उन जगहों पर आपातकाल की घोषणा की जहां ये अध्यापक अपने संगठन बना रहे थे तथा निजी स्वतंत्रता को सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया। सरकार इन कर्मचारियों की मांगों को सुनने के लिए उनके आंदोलनों को बदनाम करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। जैसे कि अध्यापकों को आतंकवादी के रूप में पेश करते हुए उन्हें माओवादी गुरिल्लाओं का समर्थक बताया जा रहा है। लेकिन सरकार के इन उपायों से खुद कुंजिन्सकी की सरकार की लोकप्रियता ही कम हो रही है जो एक साल में गिरकर 29 प्रतिशत तक आ गयी है। हजारों की संख्या में अध्यापक पेरू की राजधानी लीमा में मार्च कर रहे हैं। और वहां के प्रसिद्ध चौराहा सेन मार्टिन पर बैठकी धरना दे रहे हैं जो वामपंथियों के धरना प्रदर्शन का केन्द्र रहा है। 

    सरकार के इन सारे हथकंडों के बावजूद पेरू में अध्यापकों की हड़ताल जारी है। इस हड़ताल के दौरान अध्यापकों ने राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर एअरपोर्टों तक को जाम कर दिया। वहीं माचू पीचू जैसे पर्यटन स्थलों पर पहुंचने वाले रास्तों को बंद कर पर्यटकों की आवाजाही रोक दी। तथा जनता का अध्यापकों को मिल रहा समर्थन दिखाता है कि जनता सरकार की निजीकरण की नीतियों को पसंद नहीं कर रही है और जो उनकी खिलाफत कर रहा है उनका वह समर्थन कर रही है।  

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