अंक : 01-15 Jan, 2018 (Year 21, Issue 01)

अवैध तालाबंदी के खिलाफ मोजर बेयर के श्रमिकों का संघर्ष जारी


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    ग्रेटर नोएडा (गौतम बुद्ध नगर उ.प्र.) के सूरजपुर स्थित मोजर बेयर कंपनी में प्रबंधन व मालिकान द्वारा की गयी अवैध तालाबंदी के खिलाफ मजदूरों का संघर्ष जारी है।

    मोजर बेयर कम्पनी में तालाबंदी को स्थानीय श्रम विभाग (डी.एल.सी.) एवं जिला प्रशासन (डी.एम.) भी अवैध घोषित कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद न तो ये प्रबंधन अथवा मालिकान पर अपराधिक गतिविधि के तहत कोई कार्यवाही कर पाने में सफल हो सके हैं और न ही कोई कारखाना दुबारा शुरू करवा पाने में सफल रहे हैं। मजदूरों के लिए उनका रवैय्या टाल मटोल करने वाला ही बना हुआ है। इस बीच अब तक हुई वार्ता विफल रहीं हैं। 

    इस सबसे क्षुब्ध होकर 18 दिसम्बर को मजदूरों ने हाइवे जाम कर अपना आक्रोश प्रदर्शित किया। इस कार्यवाही से 10 किमी. तक ट्रैफिक जाम हो गया लेकिन प्रशासन द्वारा वाहनों का रूट डाइवर्ट करने के साथ मजदूरों को जेल व मुकदमे का भय दिखाया गया। लेकिन मजदूर डरे नहीं। तब जाकर एस.डी.एम. फर्स्ट ने आकर मजदूरों को 21 तारीख को वार्ता कराने का आश्वासन दिया गया तब कहीं जाकर 4 घंटे बाद जाम खुला। लेकिन 21 दिसम्बर की वार्ता में भी मजदूरों को सिवा आश्वासन के कुछ नहीं मिला। प्रशासन द्वारा मजदूरों से सहयोग करने की बात की जा रही है लेकिन उसका सहयोग यहीं तक है कि जब तक मजदूर शांतिपूर्वक व निरापद तरीके से अपने टैंट में पड़े हैं तब तक वह उन्हें नहीं छेड़ेगा लेकिन जैसे ही मजदूर कुछ भी ‘उग्र’ अथवा बड़े स्तर की कार्यवाही करने की तरफ बढ़ते हैं प्रशासन लाठी, जेल व मुकदमे की बात कर उनके समक्ष सीधे टकराव की मुद्रा में खड़ा हो जाता है। 

    इस बीच भाजपा के स्थानीय विधायक तेजपाल नागर मजदूरों के एक प्रतिनिधिमंडल को श्रम सचिव के पास ले गये थे। श्रम सचिव ने मामले को हल करने में 6 माह की प्रक्रिया का हवाला दिया और मजदूरों को जनवरी-फरवरी तक समाधान निकालने की बात की।

    गौरतलब है कि नवम्बर के पहले हफ्ते में जब कंपनी प्रबंधन ने अवैध तालाबंदी की तो मजदूरों को दो माह (सितम्बर-अक्टूबर) का वेतन नहीं मिला था। अब तक मजदूरों को 3 माह (सितम्बर-अक्टूबर- नवम्बर) का वेतन नहीं मिला है। मजदूरों की आर्थिक हालत खराब होने के चलते उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। दिसम्बर माह के बाद मजदूरों को फैक्टरी तक पहुंचाने के लिए बस की सेवा भी खत्म हो जायेगी। उसके बाद मजदूरों के लिए आंदोलन को जारी रखना मुश्किल हो जायेगा। इस बात को एन.सी.टी.(नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल), शासन-प्रशासन सभी लोग समझ रहे हैं तथा सीधे वार्ता में मामला हल करने के बजाय मजदूरों को कानूनी प्रक्रियाओं में थकाने-छकाने की नीति पर काम कर रहे हैं। 

    21 दिसम्बर को वार्ता में श्रमिक पक्ष और प्रशासन एवं एन.सी.टी. की ओर से नियुक्त आई.आर.पी. के लोग शामिल हुए थे। इस वार्ता में आई.आर.पी. द्वारा मामले को जनवरी के आखिर तक सुलटा लेने की बात की गयी। इसमें कारखाने को पुनः चालू करने की बात नहीं थी। जाहिर है कि प्रशासन व ट्राइब्यूनल(एन.सी.टी.) मिलकर मजदूरों को कुछ हिसाब लेकर चलता करने की नीति पर काम कर रहे हैं। 

    कुल मिलाकर मोजर बेयर के श्रमिकों की लड़ाई एक मुश्किल हालात में फंसी हुयी है। उन्हें कानूनवाद से मुक्त होकर अपने संघर्ष को व्यापक मजदूर वर्ग के बीच ले जाकर, इसे अधिक व्यापक बनाकर, अधिक ऊंचे धरातल पर ले जाकर निर्णायक संघर्ष करना होगा। 

                                                                                                                                               -दिल्ली संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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