अंक : 01-15 Feb, 2018 (Year 21, Issue 03)

खतरनाक और शर्मनाक है मोदी-नेतन्याहु की मित्रता


इजरायली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा


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    पिछले दिनों इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु भारत की 6 दिवसीय यात्रा पर थे। इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री मोदी जगह-जगह उनके साथ लगे रहे। भारतीय पूंजीवादी मीडिया ने इन दोनों की गलबहियां करते हुए बढ़ती मित्रता का सजीव प्रसारण किया। पूंजीवादी मीडिया इस मित्रता से फूल कर कुप्पा हो रहा था। वह इस मित्रता से होने वाले फायदों का बखान कर रहा था।

    पूंजीवादी मीडिया अपने बखान को करते हुए यह बात भूल गया था कि अभी हाल में ही अमेरिका ने अपना दूतावास तेल अबीव से जेरूसलम स्थानान्तरित करने की घोषणा की थी। यह एक तरह से जेरूसलम पर इजरायली कब्जे व उसे इजरायल की राजधानी की मान्यता देने सरीखा था। फिलीस्तीनी जनता के अधिकारों पर इस चोट का दुनिया भर की जनता अभी विरोध कर ही रही है। दुनिया भर में जगह-जगह यहां तक कि भारत में भी इजरायल-अमेरिका के पुतले जला फिलिस्तिनियों से एकजुटता जाहिर की जा रही है। ऐसे में इजरायली प्रधानमंत्री का भारत आना और भारतीय शासकों द्वारा इस आततायी का स्वागत शर्मनाक है। पूंजीवादी मीडिया जिस बात को आसानी से भूल गया उस बात को नेतन्याहु की सुरक्षा में तैनात लोग व भारत सरकार नहीं भूली। इसीलिये उसे सारे सुरक्षा इंतजामों के बावजूद इस बात का भय लगा रहा कि कहीं कोई नेतन्याहु पर जूता न उछाल दे।

    इजरायल-भारत के मौजूदा शासकों की इस मित्रता से जिन लाभों की चर्चा की जा रही है वे भी कम खतरनाक नहीं हैं। उम्मीद की जा रही है कि भारत-इजरायली सैन्य सहयोग बढ़ेगा। भारत इजरायल से वे सारे गुप्तचरी के तरीके सीखेगा जिसे इजरायल फिलीस्तीनियों पर अपनाता रहा है। इजरायल भारत को नये लड़ाकू विमान बेचेगा। भारत-इजरायल की सेनायें संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगी। इजरायल भारत को उन्नत तकनीक देगा आदि-आदि। यानी कुल मिलाकर इजरायल भारत की सेना-सुरक्षा बलों को और खूंखार बनायेगा ताकि वे देश की मजदूर-मेहनतकश जनता का शोषण-उत्पीड़न करने में ज्यादा शातिर व तकनीकी दक्ष हो जायें।

    मोदी सरकार जिसके हाथ नेतन्याहु से कम खून सने नहीं हैं, इससे अलग और कुछ कर भी नहीं सकती। एक आततायी दूसरे से मित्रता कर रहा है और निर्लज्ज पूंजीवादी मीडिया ताली पीट रहा है। 

    आज मोदी-नेतन्याहु में कई सारी बातों की समानता देखी जा सकती है। मोदी सरकार अगर दंगों की फसल काट सत्ता में पहुंची तो नेतन्याहु भी फिलीस्तीनियों के निर्मम दमन के ऊपर खड़े इजरायली अंधराष्ट्रवाद का सहारा ले सत्ता में पहुंचे। मोदी सरकार सत्ता पर आने के बाद मुस्लिमों-दलितों-आदिवासियों पर निरन्तर हमलावर है तो नेतन्याहु भी फिलीस्तीनियों के खिलाफ एक से बढ़कर एक हमले के लिये कुख्यात हैं। मोदी सरकार आज सड़कों पर रोटी-रोजगार मांगने वालों का तीखा दमन कर रही है तो यही काम इजरायली सरकार भी इजरायली जनता के दमन द्वारा कर रही है।

    मोदी-नेतन्याहु की यह मित्रता भले ही भारतीय शासकों, उनके मुनाफों के लिहाज से कुछ फायदेमंद हो पर इंसाफ पसंद मेहनतकश जनता के लिहाज से यह मित्रता खतरनाक व शर्मनाक है। खतरनाक इसलिये कि इस मित्रता के दौरान रचे कुषड्यंत्रों को भारतीय जनता झेलेगी। शर्मनाक इसलिये कि भारत सरकार एक ऐसे व्यक्ति से गलबहियां कर रही है जिसकी पूरी दूनिया में थू-थू हो रही है। यह भारतीय शासकों की अतीत की फिलीस्तीनी मुक्ति के समर्थन के वायदों के लिहाज से भी शर्मनाक है।

    भारतीय शासकों ने एक वक्त में फिलीस्तीनी राष्ट्र की मुक्ति का वैश्विक मंचों पर पक्ष लिया था। 91 के बाद से बढ़ती अमेरिकापरस्ती में वे फिलीस्तीन को भूल इजरायल से निकटता बढ़ाने में जुट गये। आज इजरायल से इनके रिश्तों की यह नजदीकी ही है कि जब पूरी दुनिया में इजरायल के नाम पर थू-थू हो रही हो, उसका प्रधानमंत्री घूमने भारत चला आता है। 

    मोदी-नेतन्याहु अपने-अपने देशों में दक्षिणपंथी राजनीति के अगुआ हैं, ट्रम्प की दक्षिणपंथी राजनीति के ये समर्थक हैं। इनकी एकजुटता दुनिया भर की जनता के लिये खतरनाक है। आने वाले वक्त में इनके घृणित कारनामे इस बात को साबित करेंगे।

Labels: राष्ट्रीय


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