अंक : 01-15 Feb, 2018 (Year 21, Issue 03)

ये महज दुर्घटनायें नहीं, सरेआम की गयी हत्यायें हैं


Print Friendly and PDF

    दिल्ली, बवाना/ 20 दिसम्बर को दिल्ली के उत्तर पश्चिमी हिस्से में स्थित बवाना औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 5, F-83 स्थित एक अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लगने से कई मजदूर जल कर मर गये तथा 2 जान बचाने की कोशिश में फैक्टरी की छत से कूदकर बुरी तरह घायल हो गये। शासन-प्रशासन के अनुसार मृत मजदूरों की संख्या 17 बतायी गयी जबकि कई प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। इंकलाबी मजदूर केन्द्र (इमके) की एक टीम ने 21 दिसम्बर को अग्निकांड स्थल का दौरा किया तथा मृतकों के परिजनों से व स्थानीय मजदूर बस्ती के लोगों से बातचीत कर घटना की विस्तृत जानकारी ली एवं बवाना औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों की जीवनस्थितियों व कार्यस्थितियों की भी जानकारी हासिल की। इस दौरान जो कुछ पता चला उससे जाहिर हुआ कि राजधानी दिल्ली के भीतर मजदूरों को किस कदर गुलामी, अधिकारविहीनता व घनघोर शोषण की स्थितियों में जान जोखिम में डलवाकर काम करवाया जा रहा है। 

    21 दिसम्बर की सुबह 10 बजे हैं। उपरोक्त फैक्टरी के सामने मजदूरों की भीड़ लगी है। कई चैनलों व अखबारों के पत्रकार वहां पहुंचे हैं। मजदूरों को एक रस्सी के सहारे अग्निकांड वाली फैक्टरी से दूर रखा गया है। कुछ पुलिसकर्मी व भारी संख्या में सिविल डिफेंस के लोग मौजूद हैं। जिस फैक्टरी में हादसा हुआ वह दो मंजिला बिल्डिंग है। गेट पर ताला लगा है। फैक्टरी में तहखाना भी है जो कि अवैध है। फैक्टरी एक्ट के अनुसार यहां तहखाना नहीं बनाया जा सकता। कारखाने के गेट के ऊपर का हिस्सा भी लोहे की ग्रिल से बंद किया हुआ है। यानी फैक्टरी पर ताला लगा होने की स्थिति में कोई गेट फांद कर भी नहीं जा सकता। 20 दिसम्बर को भी अग्निकांड के समय गेट पर ताला लगा हुआ था। कुछ पत्रकारों के साथ इमके के एक साथी ने गेट खुलवाने के लिए कहा तो पुलिस के अधिकारी दल बल के साथ गेट के सामने खड़े हो गये और उन्होंने ताला खुलवाने से मना कर दिया। शायद भीतर की पूरी हकीकत पर वे पर्दा पड़ा रहने देना चाहते थे। 

    धीरे-धीरे अन्य ट्रेड यूनियनों (सीटू, इफ्टू, ए.आई.यू.टी.यू.सी.) के लोग भी गेट पर पहुंचे। थोड़ी देर नारेबाजी हुयी तो पुुलिस प्रशासन नारेबाजी बंद करने व शांति बनाये रखने की अपील करने लगा। पुलिस अधिकारी से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना काम कर दिया है। 17 मृतकों के मृत शरीर पोस्टमार्टम के लिए अम्बेडकर अस्पताल भेजे गये हैं व दो घायलों को स्थानीय महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में भर्ती कराया गया जिन्हें बाद में एम्स के लिए रेफर कर दिया गया है। मालिक को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हमारे यह पूछने पर कि यह अवैध पटाखा फैक्टरी यहां कैसे चल रही थी तो पुलिस अधिकारी ने इसका दोष श्रम विभाग के ऊपर डाल दिया। 

    मौके पर इकट्ठा मजदूरों से बातचीत में पता चला कि मालिक ने प्लास्टिक का सामान बनाने का लाइसेंस लिया था लेकिन अंदर पटाखे बनाने का काम होता था। दिखाने के लिए फैक्टरी गेट पर कुछ प्लास्टिक की बोरियां रखी जाती थीं। 

    पूरे इलाके में लाईन से फैक्टरियां हैं। सभी फैक्टरियों में गेट के ऊपर छत तक का हिस्सा लोहे की ग्रिलों से ढंका था। ताकि फैक्टरी के भीतर परिन्दा भी पर न मार सके। फैक्टरी में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के जाने का भी रास्ता नहीं था। यानी कारखाना अधिनियमों को ताक पर रखकर तमाम फैक्टरियां बनाई गयी थी। F-83 में जो हादसा हुआ वह कभी भी किसी फैक्टरी में हो सकता था। उसी दिन यानी 20 दिसम्बर को इसी इलाके की दो और फैक्टरियों में भी आग लगी थी। सौभाग्य से उनमें कोई हताहत नहीं हुआ। 

    सुप्रीम कोर्ट की आज्ञा से दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का धता बताते हुए सरेआम प्रशासन की मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं था। 

    मौके पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि उनसे 5-6 हजार रुपये में 8 घंटे काम करवाया जाता है। इतना कम वेतन होेने के कारण मजदूरों को 12 घंटे-14 घंटे काम करवाया जाता है। इस औद्योगिक क्षेत्र के 95 प्रतिशत मजदूरों को ई.एस.आई. व पी.एफ. की सुविधा नहीं है। इसका कारण है कि ये पूरा औद्योगिक क्षेत्र छोटे व लघु उद्योगों की श्रेणी में आता है जिनमें 10 मजदूर तक काम करते हैं। अतः ई.एस.आई. व पी.एफ. के दायरे से ये बाहर हैं। लेकिन वास्तव में इन कारखानों में अधिकांशतः 25-30 से लेकर 50 मजदूर तक रखे जाते हैं। ई.एस.आई., ई.पी.एफ. तो दूर की बात इन्हें न्यूनतम घोषित ग्रेड से भी आधा वेतन मिलता है। 

    ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने मौके पर बातचीत कर 22 दिसम्बर को स्थानीय डी.एल.सी. कार्यालय पर प्रदर्शन व ज्ञापन देने की बात तय की। इसके उपरांत इमके के साथी औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 5 स्थित मेट्रो विहार मजदूर बस्ती पहुंचे। बस्ती में मौत का सन्नाटा पसरा हुआ था। इस मौहल्ले से सर्वाधिक 8 लोग मारे गये थे। ज्यादातर मृतकों को उनके परिजन दाह संस्कार के लिए ले जा चुके थे। एक मुस्लिम परिवार के मृतक का शव अभी घर के आगे रखा था। मृतकों के परिजन गहरे सदमे में होने के चलते बात करने की स्थिति में नहीं थे। इस मौहल्ले की कुछ महिलाओं से बात हुयी जो उसी फैक्टरी में काम करती थीं। वे साढ़े पांच बजे फैक्टरी से निकल आयी थीं। अतः उनकी जान बच गयी थी। इन्हीं महिलाओं में से एक तारा, उम्र 42 साल ने बताया कि वे फैक्टरी में 15 दिन से काम कर रही थीं। 8 घंटे के 6 हजार रुपये मिलते थे। चूंकि अन्य फैक्टरियों में 8 घंटे के 5 हजार रुपये मिलते थे। अतः इस फैक्टरी में काम करने के लिए यह एक प्रेरक का काम करता था। उन्होंने बताया कि यह फैक्टरी थ्-83 प्लाॅट में 20 दिन पहले ही आयी थी। इससे पहले यह फैक्टरी इसी औद्योगिक क्षेत्र के ए ब्लाॅक में थी तथा लगभग 1 साल से चल रही थी। शनिवार को छुट्टी के बावजूद इन्हें जबरन काम पर बुलाया गया था। मना करने पर मालिक तनख्वाह से पैसे काट लेता था। इसी मोहल्ले की मीना, उम्र 40 साल ने दो दिन पहले काम शुरू किया था। इनके साथ इनकी भतीजी (उम्र 20 वर्ष) ने भी 2 दिन पहले काम शुरू किया था। दो दिन में बारूद बांधने के चलते इनके हाथ पीले हो गये थे। लंच के समय ही इनके गले में जलन होने लगी थी। ये दोनों महिलायें इन हालातों में काम न करने एवं हिसाब करने की बात कहकर शाम साढ़े पांच बजे फैक्टरी से वापस आ गयी थीं। निसंदेह जो लोग वहां इन परिस्थितियों में काम कर रहे थे वे ज्यादा मजबूर रहे होंगे। इन महिलाओं के मुताबिक फैक्टरी में शाम साढ़े पांच बजे मौजूद 42 महिलाओं में से 5 वापस आ गयी थीं। 

    इन महिलाओं ने बताया कि फायर ब्रिगेड के कर्मचारी व पुलिस प्रशासन 17 लोगों की मौत की बात कह रहे हैं। शेष लोगों का कोई पता नहीं है। प्रशासन के अनुसार फैक्टरी के प्रथम तल में 13, भूतल (ग्राउंड फ्लोर) में 3 व बेसमेन्ट (तहखाने) में 1 मजदूर की जली लाशें मिलीं। बाकी के बारे में प्रशासन मौन है। स्थानीय लोगों ने बताया कि फैक्टरी में चाय पहुंचाने वाले ने शाम 5 बजे फैक्टरी में 42 चाय पहुंचाने की बात की है। इससे साफ जाहिर होता है कि मृतकों की संख्या काफी अधिक हो सकती है जिसे प्रशासन छिपा रहा है। घोषित 17 मृतकों में 10 महिलायेें हैं। फैक्टरी में अवयस्क मजदूरों से भी काम करवाया जाता था। मृतकों में एक रीता की आधार कार्ड में उम्र 16 साल दर्ज है। 

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मृतकों के लिए 5 लाख व घायलों के लिए 1 लाख रुपये की मुआवजा राशि की घोषणा की है। गौरतलब है कि इन्हीं मुख्यमंत्री ने कुछ समय पहले ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर हार्ट अटैक से मरे एक पुलिसकर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देकर सुर्खियां बटोरी थीं। इसी तरह दिल्ली में फसल खराब होने पर किसानों को बढ़ चढ़कर मुआवजा बांटने के कारण भी वे चर्चा में रहे थे। लेकिन इन मजदूरों की मौत पर उनकी जान की कीमत उन्हें महज पांच लाख ही दिखाई देती है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने चुनाव से पहले अपने लोक लुभावन वायदों के तहत दिल्ली में ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की बात की थी। लेकिन सत्ता में आते ही उन्होंने यू टर्न लेते हुए कहा था कि उनकी घोषणा सिर्फ सरकारी क्षेत्र के मजदूरों के लिए थी। वैसे भी केजरीवाल पूंजीपतियों की सभा में जाकर कह चुके हैं कि 99 प्रतिशत पूंजीपति ईमानदार हैं। मजदूरों से जानवरों से भी बदतर हालात में काम लेने वाले, न्यूनतम मजदूरी भी न देने वाले, उनके जीवन की परवाह न करते हुए मुनाफा कमाने वाले, श्रम कानूनों की धड़ल्ले से अवहेलना करने वाले बवाना सहित सभी जगहों के पूंजीपति केजरीवाल की नजर में ईमानदार हैं। घटनास्थल पर कांग्रेस, भाजपा सहित तमाम पूंजीवादी दलों के नेताओं का दौरा लगातार जारी है। ये सभी नेता घड़ियाली आंसू बहाते हुए मजदूरों से पूछते हैं कि उनको इतना कम वेतन क्यों मिल रहा है? फैक्टरी में श्रम कानून क्यों नहीं लागू हो रहे हैं? जैसे जनता जानती ही नहीं हो कि पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट देने में कोई पार्टी पीछे नहीं है। 

    22 जनवरी को उपश्रमायुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन के बाद जब उपश्रमायुक्त सहित श्रम विभाग के अधिकारियों से मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने पूछा कि आप इन फैक्टरियों पर छापा क्यों नहीं मारते? कारखानों में श्रम कानूनों की अवहेलना की जांच क्यों नहीं करते तो उन्होंने अपने अधिकारों की सीमा व स्टाफ की कमी का रोना रोया। पता चला कि बवाना, बादली, जहांगीरपुरी, वजीरपुर आदि की हजारों औद्योगिक इकाइयों की जांच के लिए उनके पास केवल दो इंसपेक्टर हैं जबकि कुछ समय पहले यह संख्या 12 हुआ करती थी। श्रम अधिकारियों का कहना था कि शिकायत के बगैर वे अब कहीं छापा नहीं मार सकते हैं।

    बवाना औद्योगिक क्षेत्र पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों के हिसाब से दिल्ली का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां लगभग 16,000 पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं। इसी तरह बादली, जहांगीरपुरी, वजीरपुर आदि औद्योगिक इकाइयों में हजारों की संख्या में उद्योग हैं। ऐसे में इन औद्योगिक इकाइयों में अनियमितताओं की जांच के लिए महज दो इंसपेक्टरों का होना यह दिखाता है कि श्रम विभाग महज ढकोसला बन गया है। श्रम कानूनों में बदलाव के बगैर ही देश की बहुलांश मजदूर आबादी को कैसे श्रम अधिकारों से वंचित कर गुलामों की स्थिति में धकेल दिया गया है, उसकी यह एक बानगी भर है। 

    राजनीतिक पार्टियां व सरकारेें (केन्द्र व दिल्ली) एक दूसरे के सिर पर इसका ठीकरा फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ये सभी जिम्मेदार हैं। मजदूरों के जीवन के इन हालातों के, उनके घनघोर शोषण व गुलामी की स्थिति के। निःसंदेह बवाना जैसी घटनायें महज दुर्घटनायेें नहीं हैं। ये सरेआम हत्यायें हैं और इन हत्याओं के जिम्मेदार ये सभी हैं, पूरी पूंजीवादी व्यवस्था है। 

           -विशेष संवाददाता

Labels: मजदूर हालात


घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर क्लिक करें।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स


हमें जॉइन करे अन्य कम्यूनिटि साइट्स में

घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर
-फैक्टरी में घटने वाली घटनाओं की रिपोर्ट भेज कर
-मजदूरों व अन्य नागरिकों के कार्य व जीवन परिस्थितियों पर फीचर भेजकर
-अपने अनुभवों से सम्बंधित पत्र भेज कर
-विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि से महत्वपूर्ण सामग्री भेज कर
-नागरिक में छपे लेखों पर प्रतिक्रिया व बेबाक आलोचना कर
-वार्षिक ग्राहक बनकर

पत्र व सभी सामग्री भेजने के लिए
सम्पादक
'नागरिक'
c/oशीला शर्मा
उदयपुरी चोपड़ा, मनोरमा विहार
पीरूमदारा, रामनगर
(उत्तराखण्ड) 244715
ई-मेल- nagriknews@gmail.com
बेबसाइट- www.enagrik.com
वितरण संबंधी जानकारी के लिए
मोबाइल न.-7500714375

सूचना
प्रिय पाठक
आप अपनी फुटकर(5 रुपये)/ वार्षिक(100 रुपये)/ आजीवन सदस्यता(2000 रुपये) सीधे निम्न खाते में जमा कर सकते हैंः
नामः कमलेश्वर ध्यानी(Kamleshwar Dhyani)
खाता संख्याः 09810100018571
बैंक ऑफ बड़ौदा, रामनगर
IFSC Code: BARBORAMNAI
MCIR Code: 244012402
बैंक के जरिये अपनी सदस्यता भेजने वाले साथी मो.न. (7500714375) पर एस एम एस या ईमेल द्वारा अपने पूरे नाम, पता, भेजी गयी राशि का विवरण व दिनांक के साथ भेज दें। संभव हो तो लिखित सूचना नागरिक कार्यालय पर भी भेज दें।
वितरक प्रभारीः कमलेश्वर ध्यानी
मो.न.- 7500714375
ईमेलः nagriknews@gmail.com
नागरिक के प्रकाशन में सहयोग करने के लिए आप से अनुदान अपेक्षित है।
सम्पादक
‘नागरिक’