अंक : 01-15 Feb, 2018 (Year 21, Issue 03)

गन्ना किसानों की बदहाली


Print Friendly and PDF

    जसपुर तहसील, उत्तराखण्ड राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले में आती है। जसपुर शहर से भूतपुरी रोड (उत्तर प्रदेश) पर 7 किमी. की दूरी पर ‘‘किसान सरकारी चीनी मिल लि., राजपुर-पूरनपुर नादेही’’ स्थित है। मिल को प्रत्येक पिराई साल में जसपुर क्षेत्र के किसान गन्ना देते हैं। गन्ना देने के उपरान्त किसानों को समय से भुगतान और घटतौली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और सरकारों द्वारा गन्ने का समर्थन मूल्य भी उचित नहीं मिल पाता है। 

    पेराई सत्र 2016-17 में किसानों ने समय से मिल में गन्ने को बेचा पर मिल ने समय से गन्ने का भुगतान नहीं किया। मिल ने आरम्भ में गन्ने का भुगतान 15-20 दिन के समय अंतराल पर एक-दो माह तक किया। बाद में 11 फरवरी 2017 से मार्च 2017 तक का भुगतान रोक दिया गया। किसानों में समय से भुगतान ना होने पर असंतोष पैदा हुआ। गरीब किसानों का जीवन यापन करना भी मुश्किल हो गया। मध्य जनवरी 2018 के पास सरकार ने गन्ने के भुगतान की घोषणा की। जनवरी 2018 के अंत तक बैंकों ने किसानों को भुगतान नहीं किया। किसानों ने बैंकों के चक्कर लगाने शुरू किये तो बैंकों के कर्मचारियों ने किसानों को यह कहकर टाल दिया कि अभी पैसा कागजों में नहीं चढ़ा है। बैंक भी किसानों को गन्ने का पैसा देने में 10-15 दिन लगा देते हैं। किसानों को बैंकों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब सरकार ने एक वर्ष बाद गन्ने के भुगतान की घोषणा की तो अखबारों में ‘‘नव वर्ष पर सरकार ने दिया किसानों को तोहफा’’ जैसी खबरोें को छापा गया। किसानों को समय से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ, ऊपर से सरकारें किसानों के पैसों को तोहफा बता रही हैं। केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार आज किसानों की समस्या का हल करने के बजाए उद्योगपतियों के साथ खड़ी हैं। किसानों को दी जा रही सब्सिडी में कटौती की जा रही है। पूंजीवादी मीडिया की पक्षधरता भी अमीरों के पक्ष में साफ तौर पर दिखती है। आज का मीडिया गरीबों के साथ नहीं खड़ा है। 

    किसानों को खेती करने के लिए बैंकों से ‘‘किसान क्रेडिट कार्ड’ बना कर कर्ज लेना होता है’’ और जिसका 7 से 10-12 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज देना होता है। अगर किसान अपना मूलधन ब्याज सहित वर्ष के अंदर नहीं चुका पाये तो मूलधन+ब्याज दर पर 2 प्रतिशत की पैनल्टी देनी होती है। गरीब किसान जो कि कम जमीन जोतते हैं उनकी हालत तो और भी खराब होती है। गरीब किसानों को बैंकों से कर्ज बहुत कम मात्रा में मिलता है। गरीब किसानों को सूदखोरों से 5 से 6 प्रतिशत की दर से मासिक यानी कि 60 से 70 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज पर पैसा मिलता है। गरीब किसानों को ब्याज सहित धन वापस करने के लिए अपनी जमीनों को बड़े किसान या फार्मरों को गिरवी रखना पड़ता है या अपनी जमीनों को बेच देना पड़ता है। गरीब किसानों को अन्य मजदूरी करके अपना जीवन-यापन करना पड़ता है। उधर किसानों को सहकारी समितियों से भी कर्ज लेना होता है। सहकारी समितियों से खाद(यूरिया, एन.पी.के., जिंक) आदि रासायनिक उर्वरक चेक से लेने होते हैं जिसका बाद में ब्याज देना होता है। सहकारी समितियों से रुपये के रूप में 6 माह के लिए फसली ऋण किसानों को ब्याज पर लेना होता है। किसानों को अपनी फसल बेच कर 5 से 10 प्रतिशत की दर से ब्याज सहित कर्ज वापिस करना होता है। अगर किसान 6 माह में कर्ज वापिस नहीं कर पाते हैं तो उन पर 2 प्रतिशत की दर से पैनल्टी सहित कर्ज वापस करना पड़ता है। अगर किसान एक वर्ष तक कर्ज नहीं चुका पाते हैं तो किसानों के खातों को बंद कर दिया जाता है और कर्ज वसूली को राजस्व विभाग को सौंप दिया जाता है। इस स्थिति में किसानों से 10 प्रतिशत की दर से सहकारी समिति और 10 प्रतिशत की दर से राजस्व विभाग यानी कि 20 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जाता है। ब्याज ना चुकाने के कारण किसानों को अपनी जमीनों को बेचना पड़ता है या किसान आत्महत्या को मजबूर होते हैं। 

    गन्ने के भुगतान का समय से ना मिल पाना और कर्ज के बोझ के नीचे दबा रहने के साथ गन्ना किसानों को घटतौली का सामना भी करना पड़ता है। अधिकांश किसानों को अपना गन्ना तौल केन्द्रों पर ले जाना पड़ता है। तौल केन्द्रों से गन्ना ले जाने का किराया 11 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को चुकाना पड़ता है। तौल केन्द्रों पर तौल इंचार्ज 5 से 6 प्रतिशत की दर से गन्ना कम कर देता है। एक तौल इंचार्ज का समय 20 दिन होता है। फिर दुबारा तौल इंचार्ज 20 दिन के लिए आ जाता है। 20 दिन के टर्न में एक तौल इंचार्ज 300 से 400 कुंतल गन्ना अपने पास रख लेता है। फिर इस गन्ने को बड़े किसानों या फार्मरों को बेच देता है। या उनकी पास बुक से रसीद काट कर दे देता है। तौल केन्द्रों पर बड़े किसान अपना गन्ना धर्मकांटों पर तौल कराकर अपना गन्ना घटतौली से बचा लेते हैं। मध्यम या छोटे किसान यानी कि गरीब किसानों के गन्ने की घटतौली होती रहती है। क्योंकि मध्यम या छोटे किसानों के पास अपने संसाधन नहीं हो पाते हैं। वह अपना गन्ना दूसरों के संसाधनों से गन्ना केन्द्रों पर ले जाते हैं। अगर वह धर्मकांटों पर अपना गन्ना ले जाते हैं तो ट्रैक्टर-ट्राली का किराया ज्यादा चुकाना पड़ता है। घटतौली से नुकसान छोटे किसानों को अधिक उठाना पड़ता है। 

    आज किसानों की हालत लगातार बुरी होती जा रही है। चुनाव के समय सरकारें किसानों की कर्ज माफी का ऐलान करती हैं। मगर सरकारों द्वारा की गयी घोषणा कोरी बकवास निकलती है। सरकारें केन्द्र में हों या राज्य में अब वह खेती पर किये जा रहे खर्च में कटौती कर रही हैं। सरकारें मिलों का निजीकरण कर अपना पल्ला झाड़ना चाहती हैं। उधर किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। आज पूरे देश में किसानों की हालत खराब होती जा रही है। देश भर में किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। पूंजीपतियों के लिए काम कर रही सरकारों को आज किसानों की कोई चिंता नहीं रह गयी है। -जसपुर संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर क्लिक करें।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स


हमें जॉइन करे अन्य कम्यूनिटि साइट्स में

घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर
-फैक्टरी में घटने वाली घटनाओं की रिपोर्ट भेज कर
-मजदूरों व अन्य नागरिकों के कार्य व जीवन परिस्थितियों पर फीचर भेजकर
-अपने अनुभवों से सम्बंधित पत्र भेज कर
-विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि से महत्वपूर्ण सामग्री भेज कर
-नागरिक में छपे लेखों पर प्रतिक्रिया व बेबाक आलोचना कर
-वार्षिक ग्राहक बनकर

पत्र व सभी सामग्री भेजने के लिए
सम्पादक
'नागरिक'
c/oशीला शर्मा
उदयपुरी चोपड़ा, मनोरमा विहार
पीरूमदारा, रामनगर
(उत्तराखण्ड) 244715
ई-मेल- nagriknews@gmail.com
बेबसाइट- www.enagrik.com
वितरण संबंधी जानकारी के लिए
मोबाइल न.-7500714375

सूचना
प्रिय पाठक
आप अपनी फुटकर(5 रुपये)/ वार्षिक(100 रुपये)/ आजीवन सदस्यता(2000 रुपये) सीधे निम्न खाते में जमा कर सकते हैंः
नामः कमलेश्वर ध्यानी(Kamleshwar Dhyani)
खाता संख्याः 09810100018571
बैंक ऑफ बड़ौदा, रामनगर
IFSC Code: BARBORAMNAI
MCIR Code: 244012402
बैंक के जरिये अपनी सदस्यता भेजने वाले साथी मो.न. (7500714375) पर एस एम एस या ईमेल द्वारा अपने पूरे नाम, पता, भेजी गयी राशि का विवरण व दिनांक के साथ भेज दें। संभव हो तो लिखित सूचना नागरिक कार्यालय पर भी भेज दें।
वितरक प्रभारीः कमलेश्वर ध्यानी
मो.न.- 7500714375
ईमेलः nagriknews@gmail.com
नागरिक के प्रकाशन में सहयोग करने के लिए आप से अनुदान अपेक्षित है।
सम्पादक
‘नागरिक’