शहीद दिवस पर पदयात्रा
पंतनगर/ दिनांक 13 अप्रैल को पंतनगर गोलीकांड व जलियांवाला बाग कांड की स्मृति में इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, प्रगतिशील महिला
पंतनगर/ दिनांक 13 अप्रैल को पंतनगर गोलीकांड व जलियांवाला बाग कांड की स्मृति में इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, प्रगतिशील महिला
मोदी सरकार की कार्यशैली ही ऐसी हो गयी है कि उसे जनता को आश्चर्य में डालने व तंग करने में मजा आने लगा है। नोटबंदी, लॉकडाउन सरीखे फैसले अचानक घोषित कर सरकार ने जनता को भारी
....विगत 2 अप्रैल से गुड़गांव के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में होंडा कंपनी के ठेका मजदूरों से शुरू हुई मजदूरों की स्वतः स्फूर्त हड़तालें और प्रदर्शन मानेसर की अनेकों कंपनियों
मानेसर के प्डज् औद्योगिक क्षेत्र गुड़गांव में ठेका मजदूरों द्वारा न्यूनतम वेतन वृद्धि, 8 घंटे काम, ओवरटाइम भुगतान और काम की बेहतर स्थितियों की जायज मांग को लेकर चल रहे शां
अमरीकी साम्राज्यवादी और यहूदी नस्लवादी इजरायली शासकों ने खाड़ी के देशों के शासकों को ईरान के विरुद्ध युद्ध में प्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी कराने की पूरी कोशिश की। वे इस बात के लिए उनको उकसाते रहे कि ईरान ने उनके देश पर हमला किया है, इसलिए उन्हें इस हमले का विरोध करना चाहिए।
पूंजीवादी सोच की यह समस्या है कि वह अपने विश्लेषण में स्वयं पूंजीपति व्यवस्था के मूलभूत चरित्र को कभी संज्ञान में नहीं लेती। वह कभी स्वीकार नहीं करती कि यह अन्याय-अत्याचार और शोषण वाली वर्गीय व्यवस्था है जो पूंजीपति वर्ग के हित में उसके हिसाब से चलती है। कि छिपी या खुली हिंसा इसका अनिवार्य तत्व है।
बूढ़े लोग पूरे घाघपने, धूर्तता के साथ दुनिया पर शासन कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प (79), शी जिनपिंग (73), पुतिन (73), लूला (80), मोदी (75) जैसे बूढ़े दुनिया के अधिकांश देशों म
23 मार्च 2026 को जबकि भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस पर लोग उन्हें याद कर रहे थे, उसी रात तड़के 3 बजे भाजपा सरकार द्वारा शाहजहांपुर में नगर निगम के पास 1972 में
अभी मार्च 2026 में भारत की संसद ने एक नया बिल पास किया- ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक। यह विधेयक ट्रांसजेंडर और एल जी बी क्यू समुदाय के कानूनी अधिकारों पर हमला है। विपक्ष और
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।