स्थानीय
भाजपा के बुलडोजर राज के खिलाफ जन सम्मेलन की तैयारियां तेज
रामनगर/ वन ग्राम पूछडी में बुल्डोजर कार्रवाही के बाद भड़के ग्रामीणों के आक्रोश ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 21 दिसंबर
आटो-रिक्शा टैम्पो चालक वेलफेयर एसोशिएसन का सम्मेलन सम्पन्न
बरेली/ आटो-रिक्शा टैम्पो चालक वेलफेयर एसोशिएसन का 11 वां सम्मेलन बरेली जं.
पूछडी में बुल्डोजर का कहर : आंदोलन जारी
रामनगर/ उत्तराखंड में रामनगर के वन ग्राम पूछडी में 7 दिसम्बर को सरकार ने बुल्डोजर चलाकर 60 से अधिक गरीब मेहनतकशों के घरों को मटियामेट कर डाला। वन विभाग औ
श्रम न्यायालय के फैसलों के विरोध में प्रदर्शन
गुड़गांव/ दिनांक 4 दिसम्बर 2025 को बेलसोनिका यूनियन व इंकलाबी मजदूर केन्द्र ने गुरूग्राम श्रम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसलों के विरोध में लघु सचिवालय गुर
छत्तीसगढ़, राजस्थान, म.प्र. - किसानों को उजाड़ती सरकार
आजकल मोदी सरकार घमंड में चूर है। 2024 के आम चुनाव की बुरी गत से उबर कर वह अपने को अजेय समझने लगी है। इसीलिए वह मजदूरों-किसानों पर रोज नये-नये हमले बोलकर पूंजीपतियों का मु
वेतन वृद्धि समझौता के लिए किर्बी के मजदूरों का संघर्ष तेज
हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल
क्लस्टर योजना के विरोध में भोजनमाताओं का प्रदर्शन और ज्ञापन
रामनगर/ उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद करने के विरोध में रामनगर में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा विरोध प्रद
देरी से वेतन दिए जाने पर बैठकी हड़ताल, मिली आंशिक जीत
गुड़गांव/ शिवम आटो टेक कंपनी बिनोला गुड़गांव में स्थित है। यह कंपनी हीरो मोटो कार्प के लिए कल-पुर्जे बनाती है। इस कंपनी के कई प्लांट हैं। इस कंपनी में तीन
मजदूर की जान लेने वाले डाक्टर का क्लिनिक सीज
हरिद्वार/ सिडकुल, हरिद्वार के हिन्दुस्तान यूनिलीवर कम्पनी के श्रीचन्द मजदूर के हाथ में फ्रेक्चर हुआ था। रॉड पड़ी थी। उसका इलाज रानीपुर मोड़ के प्राईवेट सिटी अस्पताल में चल रहा था। हत
राष्ट्रीय
आलेख
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि