औरत -वरवर राव
ऐ औरत!
वह तुम्हारा ही रक्त है
जो तुम्हारे स्वप्न और पुरुष की उत्कट आकांक्षाओं को
शिशु के रूप में परिवर्तित करता है।
ऐ औरत!
वह तुम्हारा ही रक्त है
जो तुम्हारे स्वप्न और पुरुष की उत्कट आकांक्षाओं को
शिशु के रूप में परिवर्तित करता है।
तुम्हारी उस मुस्कुराहट पर
जो तुम ‘संधि-पत्र’ (ज्तमंजल) पर हस्ताक्षर करते वक्त
कैमरों को दिखा रहे थे।
इतिहास गवाह है-
हम सीढ़ियां हैं -
तुम हमें पैरों तले रौंदकर
हर रोज बहुत ऊपर उठ जाते हो
फिर मुड़कर भी नहीं देखते पीछे की ओर
तुम्हारी चरणधूलि से धन्य हमारी छातियां
नये साल की पहली सुबह
जीवन संगिनी ने लम्बी उम्र की कामना की
मैं अल-सुबह सैर पर निकला,
बादलों के टुकड़ों से झांकते
तारों से मुलाकात की
साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल (1 जनवरी 1937-23 दिसम्बर 2025) की याद में उनकी एक कविता
मैं विद्रोही हूं और
आजादी मेरा लक्ष्य
तुममें से बहुतों ने किये हैं ऐसे संघर्ष
इसलिए तुम्हें जुड़ना चाहिए मेरे काम से।
मेरा काम है
आजादी का सपना।
तुम्हारे हाथ
चट्टानों की तरह संजीदा
जेल में गाए जाने वाले गीतों की तरह उदास
जुते हुए बैलों की चाल की तरह भारी
भूखे मरते हुए बच्चों के चेहरे की तरह भयानक
1
अच्छाई से क्या फायदा
अगर अच्छों को मार गिराया जाए
या उन्हें मार गिराया जाए
जिनके लिए वे अच्छे हैं?
एक आजाद चिड़िया
फुदकती है,
हवा के पंखों पर सवार
और नदी की लहरों पर
बहती हुई उस छोर तक।
अपने परों को
नारंगी सूरज की रोशनी
में डुबोए हुए,
करता है सवाल एक जेन-जी
जो पैदा हुआ हिन्दू घर में
एक हिन्दू खतरे में कैसे?
देश का राष्ट्रपति : हिन्दू
देश का उप राष्ट्रपति : हिन्दू
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि