साम्राज्यवाद
नेपाल बाढ़: व्यवस्था जन्य आपदा
नेपाल बाढ़ की भयावह तस्वीरें टीवी चैनलों व सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। सैकड़ों लोगों के मारे जाने, हजारों लापता होने व सम्पत्ति के भारी नुकसान का अनुमान है। लापता लोगों में
पश्चिम एशिया के संकट का वैश्विक प्रभाव
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
कम्युनिज्म का भूत
करीब पौने दो सौ वर्ष पहले कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र में माक्र्स-एंगेल्स ने लिखा था कि सारी दुनिया के शासकों को कम्युनिज्म का भूत सता रहा है। आज इतने वर्षों बाद भी मा
एआई डेटा केंद्रों के पर्यावरणीय प्रभाव
अरबपति प्रौद्योगिकी उद्योगपतियों को रोजगार क्षीण करने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े अनियंत्रित डेटा केंद्रों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका भर में श्र
वेनेजुएला: भीषण भूकम्प और अमरीकी हस्तक्षेप
24 जून को वेनेजुएला में दो बार तेज भूकम्प आया। इस भूकम्प में अब तक लगभग डेढ़ हजार लोगों के मारे जाने व 50 हजार से अधिक के लापता होने की खबर है। सर्वाधिक तबाही सैन सेबेस्टि
अल्बानिया में जेरेड कुशनर द्वारा जमीन कब्जाने का विरोध
अल्बानिया बाल्कन का एक छोटा सा देश है। यहां पर भी, जब पूर्वी यूरोप के देशों की संशोधनवादी सत्ताओं का पतन हुआ, उसी समय केे आस-पास छुट्टा पूंजीवाद आ गया। तब से अल्बानिया मे
अमेरिका और चीन: थ्यूसीडाइड्स फांस?
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
होरमुज नाकाबंदी के बीच ट्रंप की चीन यात्रा का अर्थ
इस वार्ता के चाहे जो भी परिणाम हों, लेकिन एक बात निश्चित है कि अमरीकी साम्राज्यवाद का कमजोर होते जाना तय है और इसके प्रतिद्वंद्वी के बतौर चीनी साम्राज्यवाद का उभरना और रूसी व चीनी साम्राज्यवादियों का गठबंधन मजबूत होते जाना साफ दिखाई पड़ रहा है।
राष्ट्रीय
आलेख
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।