राजनीति

चुनाव और भ्रष्टाचार का मुद्दा

भारत में चुनाव और भ्रष्टाचार के मुद्दे का सनातनी साथ है। चाहे आम चुनाव हों अथवा किसी राज्य के विधानसभा के चुनाव हों, भ्रष्टाचार का मुद्दा, प्रकट हो ही जाता है। चुनाव के ठीक पहले भ्रष्टाचार का मुद्द

भानुमती का कुनबा, कांग्रेस और हिन्दू फासीवादी

2024 के लोकसभा चुनाव को अब बहुत ज्यादा वक्त नहीं रह गया है। इसी के हिसाब से पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने दांव चल रहे हैं। इस बीच जैसे-जैसे मोदी सरकार ने विपक्ष को धराशायी करने के लिए तमाम हथकं

अमृतपाल सिंह : पंजाब में साम्प्रदायिक-राजनैतिक साजिशों का मोहरा

पंजाब का खालिस्तानी अलगाववादी नेता अमृतपाल सिंह आजकल फरार है। पुलिस देश के हर कोने में उसकी तलाश कर रही है। पंजाब के कई जिलों में इण्टरनेट सेवा ठप है। अमृतपाल के तमाम सहयोगी पकड़े जा चुके हैं पर अमृ

वाम-उदारवादी और ‘‘पप्पू’’

स्वराज पार्टी के नेता योगेन्द्र यादव राहुल गांधी की ‘भारत-जोड़ो’ यात्रा में शुरू से अंत तक शामिल हुए थे। उन्हीं की तरह बहुत सारे गैर-सरकारी संगठनों के लोग भी। इसी यात्रा के दौरान एक इंटरव्यू में उन्

मोदी चुप संसद ठप

भारतीय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सत्ता पक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ा रहा। हंगामा इस बात को लेकर था कि राहुल गांधी विदेश में दिये गये भाषण के लिए माफी मांगें। भाजपा ने इस मांग को लेकर लोकसभा और राज

बढ़ते अंतर्विरोध, बढ़ती निरंकुशता

मोदी-शाह की सरकार कभी इस पार्टी तो कभी उस पार्टी के नेताओं को हैरान-परेशान कर रही है। कभी किसी पार्टी के नेता को ई डी हिरासत में ले रही है तो कभी किसी पार्टी के। भाजपा की इन पार्टियों को ध्वस्त कर

मर्ज कुछ, इलाज कुछ

उच्चतम न्यायालय के चुनाव आयुक्त के चयन संबंधी फैसले ने एक हलचल सी पैदा कर दी। 2 मार्च को उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध

अडाणी और संसद

भारत के शीर्ष पूंजीपति गौतम अडाणी के शेयरों में हिंडनबर्ग रिपोर्ट से शुरू हुआ गिरावट का दौर जारी है। इस बीच अडाणी व हिंडनबर्ग के बीच के आरोप-प्रत्यारोप अब भारत की संसद व सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।