19 सितम्बर को अर्जेन्टीना की राजधानी ब्यूनसआयर्स में 350 संगठनों ने राष्ट्रपति मिलेई की नीतियों के खिलाफ ‘मार्च आफ एंगर’ में हिस्सा लिया। इन संगठनों में मजदूर यूनियन, छात्र संगठन, वामपंथी राजनीतिक पार्टियां, मानव अधिकार संगठन और सामाजिक संगठन थे। ‘मार्च आफ एंगर’ का उद्देश्य राष्ट्रपति मिलेई की तीन सालों से जारी आर्थिक नीतियों का विरोध करना था जिसके कारण बेरोजगारी, गरीबी लगातार बढ़ रही है। मार्च आफ एंगर के दौरान वेतन व पेंशन में वृद्धि, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य में फंड की वृद्धि और छंटनियों से सुरक्षा की मांगें प्रमुख रूप से उठीं।
जब से राष्ट्रपति मिलेई ने अर्जेन्टीना की सत्ता संभाली है तब से वे आई एम एफ के इशारे पर चल रहे हैं। उन्होंने अर्जेन्टीना की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कटौती कार्यक्रम लागू किये। इसमें सब्सिडी में कटौती, सरकारी खर्च कम करना शामिल है। सब्सिडी में कटौती का परिणाम शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे सार्वजनिक खर्च में मिलने वाले फंड में कटौती के रूप में निकला है जिसके कारण शिक्षा व स्वास्थ्य महंगे हुए हैं। अर्जेन्टीना में 1949 से यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस फ्री है लेकिन अब उसके बजट में आधी तक की कटौती हो गयी है।
इसी तरह सरकारी खर्च कम करने का परिणाम पेंशन व वेतन में मुद्रास्फीति के अनुरूप बढ़ोत्तरी न होने के रूप में सामने आया है। फलस्वरूप लोगों के लिए आवश्यक जरूरतें पूरा करना मुश्किल होता गया है।
इसके अलावा सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव किया है। सरकारी नियंत्रण को कम किया है जिसके कारण मजदूर वर्ग की स्थिति बद से बदतर होती गयी है। उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। उनकी नौकरियों पर छंटनी की तलवार लटकती गयी है। मजदूर वर्ग की 45 प्रतिशत आबादी ऐसी है जिसके कोई श्रम अधिकार नहीं हैं। वह लगातार असुरक्षा के साये में जी रही है।
समाज में इन कटौती कार्यक्रमों का परिणाम बढ़ती गरीबी व बेरोजगारी के रूप में सामने आ रहा है। गरीबी की दर 30 प्रतिशत से ऊपर हो चुकी है तो बेरोजगारी की दर 7.9 प्रतिशत है। मुद्रास्फीति 200 प्रतिशत से घटकर भले ही 30 प्रतिशत हो गयी हो लेकिन आम लोगों के लिए दैनिक जरूरतों का सामान खरीदना मुश्किल होता गया है।
जब से मिलेई सत्ता में आये हैं तब से खनन, ऊर्जा, कृषि में निवेश बढ़ा है लेकिन निर्माण, मैन्युफेक्चरिंग और खुदरा क्षेत्र पिछड़े हैं जिसकी वजह से रोजगार तेजी से घटे हैं। इसी दौरान आयात भी तेजी से बढ़ा है और घरेलू उत्पादन पर इसका असर पड़ा है।
अर्जेन्टीना में तेल व गैस के भण्डार हैं। इसलिए यहां के संसाधनों की लूट के लिए देशी व विदेशी पूंजी लालायित है। आई एम एफ के जरिये विदेशी पूंजी यहां के संसाधनों पर नियंत्रण कायम कर रही है। इसलिए आई एम एफ कटौती कार्यक्रमों का स्वागत कर रहा है।
आई एम एफ की प्रबंध निदेशक ने अभी हाल ही में अर्जेन्टीना का दौरा किया और कहा कि अर्जेन्टीना आगे बढ़ रहा है और यहां के लोगों में विश्वास है कि सब कुछ सही होगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है जो मार्च आफ एंगर में व्यक्त हो रही है।