2026 का ट्रम्प का स्टेट आफ यूनियन भाषण ऐसे समय में दिया गया है जब ईरान के चारों ओर से व्यापक फौजी घेरेबंदी अमरीका ने कर रखी है। यह 2003 के इराकी हमले के बाद सबसे व्यापक घेरेबंदी है। ट्रम्प ने अपने इस भाषण में कहा कि वे ईरान को किसी भी हालत में परमाणु बम बनाने नहीं देंगे। इधर ट्रम्प कांग्रेस के समक्ष अपना भाषण दे रहे थे वहीं, उसके वार्ताकार ईरान के साथ समझौता वार्ता के तीसरे चक्र की तैयारी कर रहे थे। ईरान के साथ तीसरे चक्र की अप्रत्यक्ष बातचीत में अमरीकी वार्ताकारों ने यूरेनियम संवर्धन को पूर्णतया समाप्त करने, अपने यूरेनियम को किसी तीसरे देश के बजाय अमरीका को सौंपने और भविष्य में कभी भी यूरेनियम संवर्धन को न बढ़ाने जैसी शर्तें रखीं। स्वाभाविक था कि ईरान के शासक इसे स्वीकार नहीं कर सकते थे। क्योंकि यह समझौता नहीं था बल्कि अब अमरीकी सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण था। अमरीकी साम्राज्यवादी ईरान के साथ ऐसी शर्तें रख रहे हैं, जिससे कि उन्हें ईरान पर हमला करने का औचित्य मिल जाये। लेकिन ट्रम्प के भाषण में ईरान पर थोपी गयी शर्तों के बारे में कोई चर्चा नहीं थी। इस भाषण के कुछ समय बाद ही अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया।
ट्रम्प ने अपने भाषण में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो का अपहरण करके अमरीका की जेल में डालने को अपनी प्रशंसा के बतौर पेश किया। किसी देश के ऊपर हमला करके उसके चुने हुए राष्ट्रपति के अपहरण को जायज ठहराने का काम ट्रम्प ने किया। इसी भाषण में पश्चिमी गोलार्द्ध में अपने प्रभुत्च को बरकरार रखने वाले उन्नीसवीं सदी के मुनरो सिद्धांत को और ज्यादा जोरदार तरीके से लागू करने की शेखी बघारी।
ट्रम्प जहां विदेशों में हमला करने, हुकूमत परिवर्तन करने और दुनिया भर में अपने सैनिक अड्डों को बनाये रखने तथा रक्षा बजट को अभी तक के उच्चतम स्तर तक पहुंचाने की शेखी बघार रहा था, वहीं अपने को इस भाषण में भी शांति दूत के बतौर पेश कर रहा था। उसने गाजापट्टी में इजरायली नरसंहार का कोई जिक्र तक नहीं किया।
जहां वह युद्धरत देशों में समझौता कराने पर अपनी पीठ थपथपा रहा था, वहीं वह ईरान में लम्बे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए अपनी युद्ध मशीनरी को लगातार बढ़ा रहा है।
खुद अपने देश के बारे में उसने यह दावा किया कि अमरीकी अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है और कीमतें तेजी से गिरने का दावा ट्रम्प ने किया।
ट्रम्प के लफ्फाजी भरे इस भाषण की वास्तविकता ठीक इसके उलटी है। अर्थव्यवस्था की अगर बात की जाये तो इस समय अमरीका के ऊपर राष्ट्रीय कर्ज 384 खरब डालर है। यह कर्ज प्रति दिन 8 अरब डालर की दर से बढ़ रहा है। मौजूदा वर्ष में घाटा 19 खरब डालर का होगा जो 2036 तक 31 खरब डालर तक पहुंच जायेगा।
दूसरी तरफ डालर के मूल्य में 2025 में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। इसका असर व्यापक महंगाई के रूप में पड़ा है। 2020 के बाद से खाद्य पदार्थों की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। आवास की लागत 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। प्राकृतिक गैस की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी हैं।
अमरीका में आर्थिक असमानता बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। लेकिन अरबपतियों को टैक्सों में छूट दी जा रही है और मजदूर- मेहनतकश आबादी पर टैक्सों का बोझ बढ़ाया जा रहा है।
ट्रम्प ने दुनिया भर के देशों पर अत्यधिक टैरिफ थोप दिया है। जब अमरीका के सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रम्प के इस टैरिफ थोपने को उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित कर दिया, तब ट्रम्प ने इस स्टेट आफ यूनियन भाषण में सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया और फिर कहा कि उसके पास टैरिफ बढ़ाने के और रास्ते हैं। उसके पास ऐसे रास्ते हैं जिसमें अमरीकी कांग्रेस की स्वीकृति जरूरी नहीं होगी। सर्वोच्च न्यायालय के फैसला आने के बाद ही उसने 15 प्रतिशत टैरिफ और लगा दिया। यानी ट्रम्प को न तो किसी न्यायालय के फैसले की परवाह है और न ही कांग्रेस की चिंता। वह ऐसा दिखावा कर रहा है। लेकिन उसके इस दिखावे, पाखण्ड और आक्रामक रुख के पीछे का असली कारण एक डरा हुआ शासक ट्रम्प है। एक तो उसका डर अभी हाल में ही होने वाले मध्यावधि चुनावों के कारण है। दूसरा अमरीकी साम्राज्यवाद की विश्वव्यापी पैमाने पर कमजोर होती जा रही स्थिति भी उसके डर का कारण है। अपनी इस आर्थिक तौर पर कमजोर होती जा रही स्थिति को वह सैन्य बल और राजनीतिक बांहें मरोड़ने के तौर-तरीके के जरिये ढंकने की कोशिश कर रहा है।
अपने स्टेट आफ यूनियन भाषण में ट्रम्प ने आई.सी.ई. आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन द्वारा दशकों से अमरीकी नागरिक के बतौर रहे लोगों को जबरदस्ती अमरीका से बाहर करने को जायज ठहराया। ट्रम्प ने आई.सी.ई. के गार्डों द्वारा लोगों की हत्याओं को बाकायदा उचित घोषित किया। सोमालिया के अमरीकी नागरिकों को समुद्री लुटेरा कहा और यह कहा कि वे अमरीका के अरबों डालर लूट कर ले जाते हैं। ‘सेवा अमरीका फर्स्ट’ के प्रावधानों का इस्तेमाल करके अप्रवासियों और अन्य लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की अपनी योजना को ट्रम्प ने अपने भाषण में वर्णित किया।
इसके अतिरिक्त आई.सी.ई. के तहत लोगों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां जारी हैं। इसके लिए नजरबंदी शिविरों का निर्माण किया गया है। इसमें अभी तक लगभग 60 हजार लोग बंद हैं। अमरीकी कांग्रेस ने और ज्यादा शिविरों का निर्माण करने के लिए 45 अरब डालर आवंटित किये हैं।
आई.सी.ई. द्वारा की जा रही बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के विरोध में कई बड़े शहरों में व्यापक प्रदर्शन हुए हैं। कम से कम बारह राज्यों के गवर्नरों ने आई.सी.ई. की इस जोर-जबरदस्ती के जरिये लोगों को गिरफ्तार करने के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। ट्रम्प की श्वेत नस्लवादी सत्ता के विरोध में न सिर्फ अश्वेत और अन्य नस्ल के लोग बल्कि श्वेत आबादी का अच्छा खासा हिस्सा खड़ा हुआ है।
ट्रम्प इस बात का दावा कर रहे थे कि मेक अमरीका ग्रेट अगेन (ड।ळ।) के तहत वे बड़े पैमाने पर विनिर्माण उद्योगों को अमरीका में वापस ले आयेंगे। इससे अमरीका में बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिलेगा। रोजगार बढ़ना तो दूर की बात है, इस समय रोजगारों में बड़े पैमाने पर कटौती की गयी है।
ट्रम्प के स्टेट आफ यूनियन भाषण में एपस्टीन फाइल का जिक्र तक नहीं है। एपस्टीन नामक व्यक्ति जो सजायाफ्ता बाल यौन अपराधी था। इसके अमरीकी शासकों सहित दुनिया भर के शासकों के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध थे। दुनिया भर के पूंजीवादी नेता, नौकरशाह और धन्नासेठ उसके विमान और टापू का इस्तेमाल अपनी यौन तृप्ति के लिए अबोध बालिकाओं का यौन शोषण करके करते थे और कईयों को बाद में मार भी डालते थे। एपस्टीन इन नेताओं, नौकरशाहों, धन्नासेठों से बातचीत करता था, ईमेल करता था, दावतें देता था और उनकी वीडियो बनाता था। कहा जाता है कि वह मोसाद (इजरायली खुफिया एजेंसी) का एजेण्ट था। इस एपस्टीन फाइल में करीब तीन लाख पेज हैं। अमरीका के न्याय विभाग ने इस फाइल को सार्वजनिक करने का आदेश दे दिया है। इस फाइल में भारत के मंत्री, पूंजीपति, नौकरशाहों तक का नाम बताया जाता है। इसमें ट्रम्प का भी नाम है। अमरीकी न्याय विभाग ने ट्रम्प के नाम को सार्वजनिक नहीं किया है। इससे पूंजीवादी समाज की चरम पतनशीलता का पता चलता है। चूंकि एपस्टीन फाइल में दोनों पूंजीवादी पार्टियों के शीर्ष नेताओं का नाम है, इसलिए दोनों पूंजीवादी पार्टियों की इसके खुलासे से परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए ट्रम्प के भाषण में एपस्टीन फाइल का जिक्र तक नहीं है।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
ट्रम्प का यह भाषण मूलतया अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सैन्य ताकत और राजनीतिक तौर पर गुण्डागर्दी का जीवंत नमूना है। यह शेखी बघारने वाले, आत्म मोहग्रस्त एक ऐसे राष्ट्रपति का भाषण है जो झूठ और पाखण्ड से भरा हुआ है। यह देश के भीतर मजदूर-मेहनतकश लोगों को अधिकारों से वंचित करने वाला और उनके जीवन को और ज्यादा कठिन व तकलीफ की ओर ले जाने की योजना प्रस्तुत करने का भाषण है। जबकि दूसरे देशों के साथ धौंसपट्टी व हमला करने की धमकी पर आधारित भाषण है।
ट्रम्प ने इस भाषण में अमरीका को स्वर्ण युग में ले जाने की पाखण्डपूर्ण घोषणा की है। अपने इस भाषण में और इसके पहले भी ट्रम्प ने कहा है कि वे शांति स्थापित करने वाले राष्ट्रपति के बतौर अपने को जाना जाता देखते हैं। ट्रम्प ने इसके उलटे आचरण किया है। इस समय ईरान में हमले की वह पूरी तैयार कर रहा है। हालांकि अमरीका के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी ने कहा है कि ईरान पर आक्रमण करने का मतलब यह है कि अमरीका के सैनिकों को भी भारी नुकसान होने का खतरा है। उक्त जनरल के अनुसार, ईरान वेनेजुएला नहीं है कि कुछ ही समय में उसके राष्ट्रपति का अपहरण कर लिया जाये। ईरान में सत्ता परिवर्तन इतनी जल्दी नहीं होगा। अमरीका और इजरायल की यही कोशिश लम्बे समय से रही है कि खामेनेई की हुकूमत को हटा दिया जाये। इसके लिए तब तक अमरीका को सफलता मिलना सम्भव नहीं है जब तक ईरान के अंदर से खामेनेई सत्ता के विरोधी एक बड़ी ताकत के बतौर उभर कर सामने नहीं आते हैं।
अब तक अमरीकी साम्राज्यवादी व्यापक फौजी घेरेबंदी के बावजूद ईरान की सत्ता को समर्पण करने के लिए मजबूर नहीं कर सके हैं।
ईरान की सत्ता ने कह दिया है कि वे ईरान पर किसी भी आक्रमण का पुरजोर ताकत के साथ जवाब देंगे और यह एक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो जायेगा।
इससे अमरीकी साम्राज्यवादी ज्यादा सावधान हो गये हैं। हालांकि ट्रम्प ने बार-बार अमरीकी विजय का दावा इस भाषण में किया है। लेकिन इसी भाषण में ट्रम्प ने यह भी कहा है कि ईरान की मिसाइलें यूरोप तक मार कर सकती हैं और जल्द ही वे अमरीका तक मार करने वाली अपनी क्षमता का विस्तार कर लेंगी। ट्रम्प के इस भाषण में यह डर भी दिखाई देता है।
कुछ अमरीकी शीर्ष अधिकारी यह चाहते थे कि पहले इजरायल हमला करे, फिर अमरीका उसके समर्थन में पूरी ताकत के साथ उतरे।
फिलहाल ईरान और अमरीका के बीच अगले चक्र की अप्रत्यक्ष वार्ता आगे वियना में होनी तय थी। अगले चक्र की वार्ता के पहले ही अमरीका-इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। ईरान पर होने वाला हमला अमरीकी साम्राज्यवादियों के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव को और ज्यादा कमजोर करेगा। ईरान में बड़े पैमाने पर तबाही-बर्बादी होगी ही। लेकिन इससे चीनी साम्राज्यवादी और रूसी साम्राज्यवादी ईरान के पक्ष में खड़े हो और ज्यादा मजबूत होकर उभर सकते हैं।
ट्रम्प के स्टेट आफ यूनियन भाषण में इसी निष्कर्ष से डरकर इसकी चर्चा न के बराबर की गयी है। विजय के तमाम दावों के बावजूद, तमाम शेखी बघारने के बावजूद ट्रम्प, अमरीकी साम्राज्यवादी सरगना, इसी संभावना से डर रहा है।