एक और निर्भया

Published
Sun, 09/27/2026 - 00:42

आस्था कुंज पार्क घटना

देश की राजधानी दिल्ली में 21 सितम्बर की शाम को कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना घटी। इस घटना ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया और राजधानी दिल्ली में एक बार 2013 में हुए निर्भया बलात्कार कांड की यादें ताजा कर दीं। घटना ने दिखा दिया कि महिला सुरक्षा के बड़े प्रचार सिर्फ होर्डिंग्स तक ही सीमित हैं असल में देश की राजधानी भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है।

पीड़ित छात्रा ने बताया कि वह अपने जन्मदिन पर कालकाजी मंदिर से लौटने के बाद अपने मित्र के साथ पार्क में बैठी थी तभी तीन व्यक्ति आसिफ (प्याज व्यापारी), हेमंत (वकील) और मुकेश (बी एस सी छात्र) आते हैं और अपने को पुलिस बताकर उन्हें डराने-धमकाने लगते हैं। लड़की के नाबालिग होने, कानूनी धाराओं आदि कानूनी बातें कर दोनों को डांटते हैं। वे छात्रा के मित्र को दूर ले जाते हैं और छात्रा को पार्क के सुनसान हिस्से में ले जाकर गले पर चाकू रखकर बलात्कार करते हैं। छात्रा ने बताया कि बलात्कार करते हुए उन्होंने अपने साथ लाये कंडोम का इस्तेमाल किया। बलात्कार करने के बाद उसे जल्दी से कपड़े पहनने को कहा लेकिन अंडरगारमेंट उन्होंने अपने पास रख लिये। उसके बाद उन्होंने उसे धमकाया कि वह किसी से कुछ न कहे नहीं तो वे उसे जान से मार देंगे।

छात्रा ने पूरा वाकया अपने मित्र को बताया और फिर पुलिस को सूचना दी। पुलिस को जब बलात्कारियों का हुलिया बताया तो वह समझ गयी कि एक अपराधी आसिफ है। क्योंकि वह पुलिस के लिए काम करता था। पुलिस अपनी मदद के लिए मुखबिर, पुलिस मित्र आदि तरीके से लोगों को शामिल करती है। आसिफ को पैर पर गोली मारकर गिरफ्तार किया गया। अन्य दो को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बी एन एस और पोस्को के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

छात्रा के साथ हैवानियत की घटना कई सवाल पैदा करती है। एक तो यह कि पूरी घटना शाम को एक पब्लिक पार्क में अंजाम दी गयी। क्या दिल्ली में अपराधी इतने बेखौफ हो गये हैं कि वे अपनी दरिंदगी को इस तरह अंजाम दे दे रहे हैं। रात को छोड़ो क्या दिल्ली में महिलाएं शाम के वक्त भी सुरक्षित नहीं हैं।

दूसरा क्या दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था आसिफ जैसे मददगारों के भरोसे पर है। जाहिर है जब आप ऐसे अपराधियों को मददगार बनायेंगे तो वे बदले में ‘‘पुलिस में अपनी पहुंच’’ सोच कर और भी बेखौफ हो जायेंगे। और अपनी बारी में वे समाज में लोगों को प्रताड़ित करने का ही काम करेंगे।

आसिफ और उसके बलात्कारी गिरोह के मामले में यह बात सौ फीसदी सही है। यह कोई आम अपराधी नहीं बल्कि हार्डकोर अपराधी बन चुके हैं। ये जब घर से निकल रहे हैं तो बंदूक, चाकू, कंडोम लेकर निकल रहे हैं। ये उनकी पहले से ही किसी महिला को शिकार बनाने की योजना को दिखाता है।

नकली पुलिस बनकर रौब झाड़ना, दूसरा धमकाना और किसी शिकारी कुत्ते की तरह शिकार करना इनकी फितरत को दिखाती है। शातिर अपराधी की तरह पूर्व योजना और फिर सबूत मिटाना (कंडोम का इस्तेमाल, अंडरगारमेंट ले जाना) इनके हौंसलों को दिखाता है।

आस्था कुंज में घटी यह हैवानियत निर्भया कांड की याद ताजा कर देती है। निर्भया कांड के बाद दिल्ली सहित पूरे देश के विरोध प्रदर्शनों की लहर पैदा हुई। आस्था कुंज की घटना ने भी पूरे देश को झकझोर दिया है। दिल्ली सहित कई स्थानों पर छात्राओं ने घटना के खिलाफ मुखरता से आवाज उठायी है, फिर से महिला सुरक्षा का सवाल उठ खड़ा हुआ है। निर्भया कांड के बाद कड़े कानून, चैराहे पर फांसी आदि बातें हुईं। सरकार ने मजबूर होकर वर्मा कमेटी बनायी और कानूनों को थोड़ा सख्त किया गया। लेकिन इसके बावजूद देश में कोई एक दिन ऐसा नहीं बीता जिस दिन देश में यौन हिंसा की दर्जनों घटनाएं न घटी हों।

जब देश की राजधानी में आस्था कुंज की घटना घटी तो उसी समय बिहार के जमुई-समस्तीपुर की भी घटनाएं घटीं। जो दिखाती हैं कि क्या गांव क्या शहर महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (छब्त्ठ) की 2024 की रिपोर्ट की मानें तो देश भर में इस साल बलात्कार के 29,536 मामले (यानी लगभग 80 मामले रोज) हुए। अकेले दिल्ली में बलात्कार के 1058 मामले दर्ज किये गये हैं। सितम्बर 2026 तक दिल्ली में 1000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से सैकड़ों मामले नाबालिगों से जुड़े हैं।

आखिर ऐसा क्यों? क्योंकि सवाल कड़े कानूनों का नहीं है। सवाल है कानून ईमानदारी से लागू हों, सवाल है पूंजीवादी व्यवस्था पर, सवाल है पुरुष प्रधान सामंती सोच का जो हर दिन ऐसे कुंठित लोगों को पैदा कर रही है, पाल-पोस रही है। जो हैवानियत से भरे हुए हैं। फासीवादियों के सत्ता पर बैठ जाने के बाद तो यह घुटन, बंदिशें और भी बढ़ गयी हैं। क्योंकि यहां बलात्कारी ‘माननीयों’ की एक लम्बी फेहरिस्त है।

आस्था कुंज की घटना के बाद लेडी श्री राम कालेज में छात्राओं की सुरक्षा के नाम पर आनलाइन क्लासेज शुरू कर दी गयीं। ऐसा करना महिलाओं को सुरक्षा देने में दिल्ली पुलिस की नाकामी को दिखाता है। गौरतलब है कि आस्था कुंज की घटना के बाद श्री राम कालेज व अन्य छात्राओं में गहरा आक्रोश था और उन्होंने इस घटना के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया। छात्राओं की सुरक्षा के नाम पर आनलाइन क्लास चालू करना छात्राओं की इन प्रदर्शनों में भागीदारी को रोकना भी है।

पूर्ण सुरक्षा और पूर्ण बराबरी के लिए अभी और बड़े सामाजिक आंदोलनों की जरूरत है। जिन आंदोलन के निशाने पर पूंजीवादी व्यवस्था, सामंती सोच और फासीवाद होगा। इनके खिलाफ संघर्ष और जीत से ही महिला द्रोही व्यवस्था को बदलकर एक नया समाज बना सकते हैं। जहां महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा और बराबरी हासिल होगी।

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