गाजापट्टी में युद्ध विराम क्या जारी रहेगा?

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अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों को उजाड़कर कहीं दूसरे देशों में बसाने की योजना को पलीता लगने के बाद अब अमरीकी साम्राज्यवादी सीधे हमास के साथ वार्ता करने को विवश हो गये। वे इजरायली सत्ता से स्वतंत्र हमास के साथ सीधे वार्ता करने लगे। एक तरफ ट्रम्प की गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों को उजाड़ने की योजना को अरब देशों के शासकों के विरोध का सामना करना पड़ा। सिर्फ इतना ही नहीं, अरब देशों ने गाजापट्टी के पुनर्निर्माण की एक वैकल्पिक योजना भी पेश की। इन देशों के शासक अभी तक फिलिस्तीनी संघर्ष का समर्थन नहीं कर रहे थे बल्कि इनमें से कई तो इसके विरोध में थे। लेकिन वहां की जनता के इसके व्यापक समर्थन को वे अपने लिए भी खतरा मानते रहे हैं। यह एक बड़ा कारण रहा है जिसने इन शासकों को वैकल्पिक योजना पेश करने के लिए मजबूर किया। 
    
इस वैकल्पिक योजना का यहूदी नस्लवादी शासकों ने विरोध किया और गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों को उजाड़ कर मिश्र, जार्डन या और कहीं बसाने की ट्रम्प की योजना का समर्थन किया। इजरायली शासकों ने समझौते के तहत युद्ध विराम के पहले चरण के पूरा हो जाने के बाद दूसरे चरण में जाने से इंकार कर दिया। वे पहले चरण को और बढ़ाने की मांग करते रहे और पहले चरण में ही सारे बंधकों की रिहाई की मांग कर डाली। इजरायली शासक युद्ध विराम का बार-बार उल्लंघन करते रहे। उन्होंने राहत सामग्री के गाजापट्टी जाने पर रोक लगा दी। 
    
लेकिन जैसे ही ट्रम्प की गाजापट्टी को नरक बना देने की धमकियों के बावजूद अमरीकी साम्राज्यवादी सीधे हमास के साथ वार्ता करने के लिए आ उपस्थित हुए वैसे ही इजरायल को भी दूसरे चरण के युद्ध विराम के लिए वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधि भेजने पड़े। 
    
यहूदी नस्लवादी इजरायली शासक लगातार समझौते का उल्लंघन करते रहे हैं। वे इस दौरान करीब 116 लोगों की गाजापट्टी में हत्या कर चुके हैं। वे सिर्फ गाजापट्टी में ही ये हत्यायें नहीं कर रहे हैं; वे पश्चिमी तट पर भी फिलिस्तीनियों को उजाड़ रहे हैं और उनकी हत्यायें कर रहे हैं। वे लेबनान में समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं। सीरिया के दक्षिणी इलाके पर वे कब्जा कर चुके हैं। वे ईरान पर हमला करने की धमकी दे रहे हैं। इन सभी में अमरीकी साम्राज्यवादी उनका समर्थन व सहयोग कर रहे हैं। 
    
इजरायल के इन आक्रामक और समझौते का उल्लंघन करने वाले कदमों का जवाब देने के लिए हमास और हिजबुल्ला के साथ-साथ यमन के हौथी लोगों ने भी कदम उठाना शुरू कर दिया है। वे न सिर्फ यहूदी नस्लवादी इजरायली हुकूमत को चेतावनी दे रहे हैं बल्कि अमरीकी साम्राज्यवादियों को भी बता रहे हैं कि वे उनकी इस इलाके में दखलंदाजी का विरोध करेंगे। 
    
अभी हाल ही में ईरान, चीन और रूस की नौसेनाओं का संयुक्त अभ्यास हुआ है। 
    
इसने भी अमरीकी साम्राज्यवादियों की ईरान को धमकाने और उसे अलग-थलग करने की योजना को पीछे धकेला है। 
    
पश्चिमी एशिया की यह स्थिति गाजापट्टी में युद्ध विराम को जारी रखने की संभावना को बढ़ा रही है लेकिन यहूदी नस्लवादी हुकूमत इसे तोड़ने की कोशिशें करती रहेगी। 

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