यह कोई हादसा नहीं बल्कि मुनाफाखोरों द्वारा की गई हत्याएं हैं
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एकदम नजदीक सत्यनिकेतन नाम के एक पीजी की ईमारत ढहने की घटना ने देश की बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक बार फिर उघाड़ कर रख दिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एकदम नजदीक सत्यनिकेतन नाम के एक पीजी की ईमारत ढहने की घटना ने देश की बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक बार फिर उघाड़ कर रख दिया है।
आज देश भर में छात्र बेहतर और सम्मानजनक शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। अलग-अलग राज्यों और शहरों से छात्र अपने स्कूलों की बदहाल तस्वीरें सामने ला रहे हैं। कहीं स
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जो भाषण दिया उस पर जंतर-मंतर संघर्ष की स्पष्ट छाप थी। जेन जी को भरमाने के लिए मोदी ने देश के विकास की झूठी गाथा के साथ मुफ्त
छात्रों के आंदोलन की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से उभर आया ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’। कुछ ही दिनों में यह सोशल मीडिया पेज इंस्टाग्राम, रेड
दिल्ली/ जंतर-मंतर पर हजारों छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। हाथों में तख्तियां, बैनर और झंडे लिए छात्र अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगा रह
19 जुलाई को जंतर मंतर धरनास्थल पर शाम के लगभग 4 बजे मैंने प्रवेश किया। पटेल चैक मेट्रो स्टेशन के गेट से जंतर मंतर धरनास्थल पर पहुंचने में आधा घंटा से अधिक लगा। इसकी दूरी
जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं का संघर्ष इतिहास रच चुका है। किसी के आगे न झुकने का दम्भ भरने वाली मोदी सरकार को छात्रों-युवाओं ने झुकने को मजबूर कर दिया। शिक्षा मंत्री धर्मे
* भारत में 15 से 29 वर्ष की उम्र के नौजवानों की आबादी 36 करोड़ 70 लाख है। इनमें से 26 करोड़ 30 लाख नौजवान शिक्षा के क्षेत्र से बाहर हैं। और देश के संभावित श्रम बल का हिस्सा
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।