इम्पीरियल ऑटो कंपनी के मजदूरों का संघर्ष

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फरीदाबाद/ इम्पीरियल ऑटो इंडस्ट्रीज के मथुरा रोड स्थित प्लांट के मजदूर बीते 2 हफ्ते से मनमाने तरीके से कम्पनी से निकाले जाने के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। यह कंपनी आटो पार्ट्स बनाने का काम करती है। फरीदाबाद में कंपनी के कई प्लांट लगे हैं। 
    
2019 में जब मथुरा रोड स्थित प्लांट चालू हुआ तो यहां दूसरे प्लांट से मजदूरों को स्थानांतरित कर लाया गया। ये मजदूर जिनमें बड़ी संख्या में महिला मजदूर थीं, बीते 2 से 5 वर्ष से पुराने प्लांट में कार्यरत थीं। पर नये प्लांट में इनकी नये ठेकेदार के तहत नयी ज्वायनिंग दिखा पुराने रिकार्ड गायब कर दिया गया। मजदूरों ने जब इसका विरोध किया तो उन्हें पुराना रिकार्ड रखे जाने का झूठा वायदा दिया गया। 
    
कम्पनी में मजदूरों को ओवरटाइम का भुगतान सिंगल रेट से भी कम पर किया जाता रहा था। सितम्बर 24 में इस प्लांट के गेट पर नयी कम्पनी सुपर पालीटेक का बोर्ड लगा दिया गया। कम्पनी के भीतर पहले की तरह ही काम होता रहा। मजदूरों के पूछने पर उन्हें बताया गया कि मजदूरों का रिकार्ड पहले जैसा ही रहेगा। पर कुछ वक्त बीतते-बीतते किसी न किसी बहाने मजदूरों को निकालने का सिलसिला शुरू हो गया। 
    
19 दिसम्बर, 2024 को छुट्टी से एक घण्टे पहले मजदूरों को कहा गया कि कल से आपकी सेवा समाप्त कर दी गयी हैं। यह सुनकर सभी महिला-पुरुष मजदूर हैरान हो गये। अगले दिन मजदूर कंपनी गेट पर इकट्ठा हुए और अपने निष्कासन का विरोध करने लगे। मौके पर पहुंचे इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ताओं ने उन्हें संघर्ष में सहयोग दिया। 
    
पहले मुंशी फिर ठेकेदार और फिर पुलिस बुलाकर प्रबंधन ने मजदूरों को धमकाने का प्रयास किया। पर मजदूर डटे रहे। अंततः प्रबंधन को मजदूरों को 23 दिसम्बर को वार्ता का समय देना पड़ा। 23 दिसम्बर को कम्पनी पहुंचने पर वहां पहले ही पुलिस मौजूद थी। मजदूर बड़ी संख्या में धरने पर बैठ गये। प्रबंधन वार्ता को मजबूर हुआ। उसने 26 दिसम्बर को पुराने प्लांट में मजदूरों को बुलाया और किसी के साथ अन्याय न होने का वादा किया। 
    
26 दिसंबर को सुबह 10ः00 बजे से पहले ही मजदूर कंपनी गेट पर इकट्ठा होने लगे और मैनेजमेंट भी समय पर पहुंच गया, पुलिस भी मौजूद थी, प्रबंधन वर्ग द्वारा 19 दिसंबर को निकाले गए मजदूरों की लिस्ट नाम बोलकर कंपनी में वार्ता के लिए बुला लिया गया जहां पहले प्रबंधन वर्ग इन मजदूरों को पहचानने से भी मना कर रहा था या हम कुछ नहीं जानते यह हमारे मजदूर नहीं है, इस तरह कह रहा था परंतु मजदूरों की एकता और संघर्ष करने के बाद अब कुछ आफर कर रहा है।
    
पहले ऐसे वैसे दाम लगाकर मजदूर को रफा दफा करने की रणनीति पर मैनेजमेंट चला, परंतु मजदूरों के ना मानने पर खासकर महिला मजदूरों के, फिर मैनेजमेंट को जिन मजदूरों को 5 साल से ऊपर यानी ग्रेच्युटी बन रही थी, 45000 से 50,000 के बीच में देने के लिए और शेष मजदूरों को काम कर रहे सालों के हिसाब से दो सैलरी या एक सैलरी देने के लिए मजबूर होना पड़ा। मजदूर यह सब अपनी एकता और संघर्ष के दम पर ही हासिल कर पाए।
    
परंतु बाहर मजदूरों की संख्या बढ़ने पर ही थी बहुत पहले, 5-6 महीने पहले, दीपावली के बाद काम छोड़कर गए मजदूर भी कंपनी गेट पर आने लगे।
    
27 दिसम्बर को इंपीरियल आटो के महिला एवं पुरुष मजदूरों ने कंपनी गेट पर अपने हिसाब की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया है।
    
मजदूर जुलूस की शक्ल में फैक्टरी गेट पर पहुंचे। जहां पुलिस ने मजदूरों को रोकने के लिए धक्का-मुक्की की व लाठियां चलाने का प्रयास किया जिसमें एक महिला मजदूर को हाथ में चोट आई लेकिन इतने पर भी मजदूर डटे रहे व पुलिस प्रशासन को पीछे हटने को मजबूर कर दिया। जिससे मैनेजमेंट वार्ता को मजबूर हुआ व अगली वार्ता में मैनेजमेंट ने सोमवार 30 दिसम्बर तक समय मांगा। मजदूरों का कहना है कि कंपनी ने जो प्लांट बेचा है उसमें बरसों से काम करने वाले लोगों का हिसाब नहीं किया है इसलिए मजदूरों की मांग है कि उनका हिसाब चुकता किया जाए।
    
इंकलाबी मजदूर केंद्र मजदूरों के संघर्ष में उनकें साथ खड़ा है। -फरीदाबाद संवाददाता

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