ग्रामीण मजदूरों का अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन
मऊ-बलिया/ 12 जनवरी को ग्रामीण मजदूर यूनियन बलिया की ओर से तहसील मुख्यालय रसड़ा पर धरना-प्रदर्शन किया गया। धरने से पहले दर्जनों महिला और पुरुष मजदूरों ने म
मऊ-बलिया/ 12 जनवरी को ग्रामीण मजदूर यूनियन बलिया की ओर से तहसील मुख्यालय रसड़ा पर धरना-प्रदर्शन किया गया। धरने से पहले दर्जनों महिला और पुरुष मजदूरों ने म
बेलसोनिका प्रबंधन की छंटनी की साजिशों के खिलाफ यूनियन का वर्ष 2021 से संघर्ष जारी है। वर्ष 2021 से वर्ष 2023 तक चले लगभग ढ़ाई साल के इस शानदार संघर्ष में बेलसोनिका प्रबंधन
प्रबंधन ने कार्यकारी अध्यक्ष समेत तीन मजदूरों को किया कम्पनी से बाहर
हरिद्वार/ हरिद्वार सिडकुल स्थित राजा बिस्कुट के मजदूरों का लम्बा संघर्ष सम्मानजनक समझौते के साथ समाप्त हो गया है। प्रबंधन मजदूरों की ग्रेच्युटी, बोनस सहि
बकाया मानदेय के भुगतान सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर क्रमिक अनशन
इंपीरियल आटो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 21/1 कंपनी फरीदाबाद के सेक्टर 5 में स्थित है। यह कंपनी गाड़ी इंजन के लिए पार्ट्स बनाती है। फरीदाबाद के स्तर पर इंपीरियल
उ.प्र. सरकार ने इजरायल में निर्माण मजदूरों के बतौर काम करने के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं। उ.प्र.
24 दिसंबर को इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर मोरावली इंडस्ट्रियल पार्क में स्थित निकिल प्रोसेसिंग प्लांट इंडोनेशिया सिंगशान स्टेनलेस स्टील प्लांट में ब्लास्ट होने से 19 म
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।