मजदूर संघर्ष

16 फरवरी : ग्रामीण भारत बंद एवं औद्योगिक हड़ताल के मौके पर रैली, सभा, ज्ञापन एवं पुतला दहन

मोदी सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 16 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा आहूत ग्रामीण बंद एवं औद्योगिक हड़ताल को व्

भोजनमाताओं का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा उत्तराखंड में कुमाऊं के हल्द्वानी में 24 फरवरी और गढ़वाल के हरिद्वार में 25 फरवरी को जोरदार विरोध-प्रदर्शन किए गये।
    

मध्य प्रदेश के हरदा में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट

6 फरवरी को सुबह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 150 किलोमीटर दूर हरदा जिले के बैरागढ़ गांव में पटाखा बनाने वाली फैक्टरी में विस्फोट होने से 13 लोगों की मौत हो गयी (हालांकि

लखनऊ के शक्ति भवन में बिजली संविदाकर्मियों का प्रदर्शन

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ के नेतृत्व में 5 फरवरी 2024 को शक्ति भवन मुख्यालय, लखनऊ पर प्रदर्शन किया गया। निविदा संविदा

बनभूलपुरा (हल्द्वानी) की घटना में शासन-प्रशासन की भूमिका की न्यायिक जांच की मांग; उत्तराखण्ड सरकार का पुतला दहन

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में 8 फ़रवरी के प्रकरण, जिसमें एक मदरसा और नमाज स्थल ढहाने के बाद भड़की हिंसा में पुलिस फायरिंग में 5-6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबक

मासा के आह्वान पर मनाया गया ‘मजदूर प्रतिरोध दिवस’

दिनांक 8 फरवरी को भारत में 17 संघर्षशील और क्रांतिकारी श्रमिक संगठनों/यूनियनों के एक समन्वय मंच, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिल

हिट एण्ड रन कानून के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल में आटो यूनियन की सक्रियता

बरेली/ औपनिवेशिक कानूनों से मुक्ति के नाम पर मोदी सरकार ने उससे भी ज्यादा कठोर काले कानून पास किये हैं। ‘भारतीय न्याय संहिता’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संह

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।