पलायन एक्सप्रेस -ज्ञानेन्द्रपति

Published
Tue, 09/01/2026 - 15:50
/palayan-express-gyanendrapati

जिसे कहा जा रहा है
स्वाधीन भारत का अमृत-काल
वह अनृत-काल है, सच पूछो तो
सुहाने झूठों का जंजाल
इसे ही देखो
बिहार-यू पी से चलायी जा रही हैं जो नई ट्रेनें
कहने को किफायती व स्तरीय सुविधा-सम्पन्न
विकसित आर्थिकी वाले उन सुदूर प्रदेशों 
तक पहुंचाने वाली ट्रेनें
जहां खटने-कमाने पहुंचते हैं ठसमठस
बिहार-यू पी के बेरोजगार नौजवान
विपन्नता के मारे
कतार बांधे
स्वार्थी समृद्धि के दुआरे
शोषित होने
पोषित होने
बहिरागत घोषित होने
हतभागे
भागे-भागे
जन्मभूमि से दूर
तलाशते कर्मभूमि
चुनते अनचाहा विस्थापन, बेमन
खाली हाथों की मुट्ठी में
गड़ती भाग्य-रेखा लिये, मौन
खटने-हड़ने को तत्पर जिंदगी की कड़ी धूप में
स्नेह-छाया से वंचित
उचाट-चित्त
ये ट्रेनें
उन्हीं नौजवानों को
कृपालु सौगात हैं दयालु सरकार की
रेलवे मंत्रालय-यंत्रालय की
जिन्हें कहा जा रहा है-
अमृत भारत एक्सप्रेस
सम्पन्न जनों के महंगे नफीस वातानुकूलित 
द्रुतगामी वंदे भारत एक्सप्रेस का विपन्न सहोदर
अमृत भारत एक्सप्रेस
अरे! इन्हें
पलायन एक्सप्रेस क्यों नहीं कहते
जो होता इनका सही नाम
राष्ट्रजापी महानुभाव!
लेकिन हां, तुम्हारा अमृत-काल तो है ही
अनृत-काल
सुहाने झूठों का जंजाल!  

साभार: https://samalochan.com/

आलेख

/janavad-ka-sawal-aur-majdoor-varg

मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।