रुख से उनके परदा हटता जाये है

Published
Wed, 04/01/2026 - 15:50
/rukha-se-unake-pardaa-hatata-jaaye-hai

‘संस्कारी पार्टी’ के संस्कार रिस-रिस कर बाहर आ रहे हैं। कुछ मामले पूरी नग्नता से दिखने लगे हैं। कुछ पर परदा या सस्पेंस बना हुआ है। ताजा मामला महाराष्ट्र की महिला आयोग की अध्यक्षा भाजपा नेता का है। महिला आयोग का गठन महिलाओं को सुरक्षा-सम्मान देने के लिए किया गया। लेकिन इसकी अध्यक्षा के एक ऐसे व्यक्ति के साथ गहरे रागात्मक सम्बन्ध उजागर हुए हैं जो दर्जनों महिलाओं को अपनी यौन कुंठा का शिकार बना चुका है। ये महाशय हैं अशोक खरात। यह पेशे से ज्योतिषी है और अपनी पहुंच के कारण यह निरंतर महिलाओं को अपनी यौन कुंठा का शिकार बनाता रहा है। इसके पास ऐसे मामलों से जुड़े 100 से अधिक वीडियो बरामद हुए हैं। 
    
महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्षा रुपाणी चाकणकर कई वीडियो में अशोक खरात के साथ दिखाई दी। किसी वीडियो में ज्योतिषी को धूप न लगे तो छाता करती हुयी। किसी वीडियो में इसके चरण धोती हुई। तो किसी वीडियो में पूरे भक्ति भाव से इसके साथ पूजा करते हुए। 
    
ज्योतिष अशोक खरात को एक मामले में जब गिरफ्तार कर लिया गया तो भाजपा ने बदनामी से बचने के लिए अशोक खरात से पल्ला झाड़ लिया। रूपाणी चाकणकर से भी इस्तीफा दिलवा दिया गया। 
    
महिलाओं से अनैतिक सम्बन्धों के मामले में एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम भी उछला हुआ है। इस बार नाम उछालने वाला और कोई नहीं प्रधानमंत्री की बायोग्राफी लिखने वाली मधु किश्वर हैं। साथ ही भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी लगातार मोदी के कई महिलाओं के साथ अनैतिक सम्बन्धों की बात करते रहते हैं। इससे पहले भी आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और वर्तमान में भाजपा नेता कपिल मिश्रा द्वारा पहले दिल्ली विधानसभा में मोदी के सेक्स स्कैन्डल की बात कही गयी और एक सीडी व काल रिकार्ड की बात कही गयी। बताया जाता है कि यह सीडी व अन्य सबूत 2014 से ही कोर्ट में जमा हैं लेकिन अभी तक कोई फैसला इस पर नहीं आया है। मोदी पर इस तरह के आरोप नये नहीं हैं। इससे पहले आनंदी बेन के पति द्वारा लिखी चिट्ठी भी काफी वायरल हुई थी। कुछ अधिकारी भी जब तब ऐसी बातें करते रहे हैं। लेकिन हर बार सवालों को ठंडी मौत मरने के लिए छोड़ दिया जाता रहा। 
    
महिलाओं से अनैतिक सम्बन्धों के मामले में भाजपा के बड़े नेता नितिन गडकरी का नाम भी सामने आया है। जिसमें एक वीडियो में ‘बाबी’ नाम की महिला नितिन गडकरी समेत कई भाजपा नेताओं के नाम लेकर उनके महिलाओं से अनैतिक सम्बन्धों की बात कह रही है। 
    
इन गंभीर आरोपों के बावजूद हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। मोदी सहित भाजपा नेता, कारपोरेट मीडिया मुंह में दही जमाये बैठा हुआ है।  

आलेख

/peace-bond-vishesh-karyakari-majistrate-v-shakti-prathakkaran-siddhant

शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धान्त यह मत प्रस्तावित करता है कि लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए जरूरी है कि कार्यपालिका-विधायिका व न्यायपालिका परस्पर स्वतंत्र हों। अगर कार्यपालिका किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करना चाहे तो न्यायपालिका उसे रोक दे। फ्रांसीसी दार्शनिक मांतेस्क्यू को इस शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त का मूल प्रस्तावक माना जाता है।

/regime-change-or-vyavastha-parivartan

पूंजीवादी जनतंत्रों में चुनाव ‘सेफ्टी बाल्व’ का काम करता है। बदहाल और दुःखी परेशान लोग नयी सरकार को चुन उम्मीद करते हैं कि उनकी जिन्दगी में शायद बेहतरी हो जाये। अमरीका जैसे देश में तो इसी वजह से दोनों प्रमुख पार्टियां बारी-बारी से सत्ता में आती रहती हैं। चुनाव के जरिये सरकारें बदलती रहती हैं और पूंजीवादी व्यवस्था बदस्तूर चलती रहती है। मजदूर-मेहनतकश जनता बेहतरी की मृग मरीचिका में जीती रहती है। 

/janavad-ka-sawal-aur-majdoor-varg

मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।