फासीवाद

नवादा : दलितों के साथ यह हिंसा कब रुकेगी?

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18 सितम्बर को बिहार के नवादा जिले में दबंगों ने 80 महादलितों के घर फूंक दिये। नवादा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र की कृष्णा नगर दलित बस्ती को दबंगां द्वारा न केवल आग के ह

एक देश एक चुनाव : फासीवादी परियोजना

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मोदी सरकार तेजी से एक देश एक चुनाव की ओर कदम बढ़ा रही है। हाल ही में उसने रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश को स्वीकार लिया। अब उम्मीद लगाई जा रही है कि अगल

वक्फ विधेयक : मुसलमानों पर संघी सरकार का एक और हमला

वक्फ सम्पत्ति कुप्रबंधन का हवाला दे वह इस सम्पत्ति को ही छीनने की मंशा से प्रेरित है

बीते दिनों मोदी सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक संसद में पेश किया। फिलहाल यह विधेयक संसदीय समिति के पास चला गया है। जहां मोदी सरकार इस विधेयक को पास कराने पर उतारू है वहीं

नये आपराधिक कानून : अधिक क्रूर-अधिक दमनकारी तंत्र की संहिता

तीन आपराधिक कानून ना तो ‘ऐतिहासिक’ हैं और ना ही ‘क्रांतिकारी’ और न ही ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले

ये तीन आपराधिक कानून ना तो ‘ऐतिहासिक’ हैं और ना ही ‘क्रांतिकारी’ और न ही ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले। इसी तरह इन कानूनों से न्याय की बोझिल, थकाऊ अमानवीय प्रक्रिया से जनता को कोई राहत नहीं मिलने वाली। न्यायालय में पड़े 4-5 करोड़ लंबित मामलों से भी छुटकारा नहीं मिलने वाला। ये तो बस पुराने कानूनों की नकल होने के साथ उन्हें और क्रूर और दमनकारी बनाने वाले हैं और संविधान में जो सीमित जनवादी और नागरिक अधिकार हासिल हैं ये कानून उसे भी खत्म कर देने वाले हैं।

फ्रांस-जर्मनी : दक्षिणपंथियों-नवफासीवादियों के बढ़ते कदम

फ्रांस का पूंजीपति वर्ग फासीवादी सरकार को स्वीकारने के बेहद करीब पहुंच चुका है

दक्षिणपंथी ताकतें पूरी दुनिया के पैमाने पर उभार पर हैं। शासक वर्ग का इनको समर्थन दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और इस समर्थन पर सवार हो अपने विभाजनकारी मुद्दों के जरिये ये जनता

मुख्य न्यायाधीश की गणेश पूजा में मोदी जी

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश देश के सबसे प्रमुख संवैधानिक पद ही नहीं बल्कि इस बात के द्योतक हैं कि इन पदों पर बैठे लोगों का आचरण ऐसा होगा कि वह देशवासियों

मोदी जी ! मणिपुर में (गृह) युद्ध कब थमेगा

मोदी सरकार का रूस-यूक्रेन के बीच शांति कायम करने का प्रयास राजनैतिक शिगूफेबाजी

पिछले वर्ष मई माह में शुरू हुआ मैतेई तथा कूकी समुदायों के बीच खूनी संघर्ष आज तक नहीं थम सका। मोदी जी स्वयं रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रुकवाने के नाम पर दोनों द

नारा राम का कर्म शैतान का

साम्प्रदायिकता की विष बेल फैलाने को उतारू संघी मण्डली

लोकसभा चुनाव में हुई बुरी गत से संघी मण्डली मानो घबरा गयी है। शीर्ष से लेकर नीचे तक के कारकून इस वक्त बौखलाये नजर आ रहे हैं। वे अपने से दूर होती जा रही जनता को फिर से अपन

गाजियाबाद में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बांग्लादेशियों पर हमला

झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीबों पर हमला

बांग्लादेश में लंबे समय से आरक्षण विरोधी आंदोलन और प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद अराजकता का माहौल बना हुआ है। क्योंकि ये आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रहा ब

कांवड़ यात्रा : फासीवादी प्रयोगशाला में चूहा बना बेरोजगार मजदूर-मेहनतकश तबका

कांवड़ियों की यह ज्यादातर आबादी मजदूर-मेहनतकश वर्ग से आती है

जुलाई के महीने के साथ ही उत्तर भारत की सड़कों पर एक विभीषिका शुरू होती है। इस विभीषिका को कांवड़ यात्रा कहा जाता है। भगवा कपड़ों में उत्तर भारत के राजमार्गों पर चल रहे ये का

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।