अर्थव्यवस्था

जेन स्ट्रीट, दलाल स्ट्रीट और जुआरी पूंजीवाद

/zen-street-dalal-street-and-juaari-capitalism

पिछले दो-तीन दशकों से भारतीय शासकों ने एक मुहिम के तहत भांति-भांति की सट्टेबाजी को समाज में प्रोत्साहित किया है। इसमें शेयर बाजार (‘‘डेरिवेटिव बाजार’ सहित) की सट्टेबाजी प्रमुख है। संप्रग सरकार और भाजपा सरकार दोनों ने ही इसे खूब प्रोत्साहित किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने लोगों को मजबूर किया है कि लोग इस सट्टेबाजी की ओर जायें। जब बैंकों में जमा पर ब्याज दर महंगाई दर से नीचे हो तो लोग कहीं और पैसा लगाने को मजबूर हो जायेंगे। 

जब टेक्सास में पानी का स्तर बढ़ रहा था, एक अपरिहार्य आवाज खामोश की जा चुकी थी

/jab-tekxas-mein-pani-ka-star-badh-raha-tha-ek-aparihaarya-awaaz-khamosh-ki-ja

जब एक पत्रकार ने पूछा कि 4 जुलाई को पानी के स्तर के अपने मारक शिखर पर पहुंचने से पहले गुआडलूपे नदी के किनारे के समर कैंप के बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक क्यों नहीं पहुंच

बांग्लादेश : हसीना सरीखे हश्र की ओर बढ़ती यूनुस सरकार

/bangladesh-hasinaa-sareekhe-hashra-ki-aur-badati-yunus-sarkara

शेख हसीना सरकार की रुखसती को अभी वर्ष भर भी पूरा नहीं हुआ है कि बांग्लादेश की सड़कें एक बार फिर से प्रदर्शनों की गवाह बन रही हैं। यूनुस सरकार के प्रति बांग्लादेश की जनता क

असमानता-शोषण-बेकारी के समुद्र पर टिकी चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था

/inequility-shoshan-unemplyoment-ke-samundra-par-tiki-chauthi-badi-economy

हाल ही में नीति आयोग के सी ई ओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) बी वी आर सुब्रमण्यम ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत जापान को पीछे छोड़ते हुये दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्थ

उथल-पुथल की राह पर वैश्विक अर्थव्यवस्था

/uthal-puthal-ki-raah-par-vaishawik-arthvyavastha

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘वर्ल्ड इकानामिक आउटलुक’ के मुताबिक 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था उथल-पुथल वाली अनिश्चित राह की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट ट्

भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था

/bhartiy-share-baajaar-aur-arthvyavastha

1980 के दशक से ही जो यह सिलसिला शुरू हुआ वह वैश्वीकरण-उदारीकरण का सीधा परिणाम था। स्वयं ये नीतियां वैश्विक पैमाने पर पूंजीवाद में ठहराव तथा गिरते मुनाफे के संकट का परिणाम थीं। इनके जरिये पूंजीपति वर्ग मजदूर-मेहनतकश जनता की आय को घटाकर तथा उनकी सम्पत्ति को छीनकर अपने गिरते मुनाफे की भरपाई कर रहा था। पूंजीपति वर्ग द्वारा अपने मुनाफे को बनाये रखने का यह ऐसा समाधान था जो वास्तव में कोई समाधान नहीं था। मुनाफे का गिरना शुरू हुआ था उत्पादन-वितरण के क्षेत्र में नये निवेश की संभावनाओं के क्रमशः कम होते जाने से।

परजीवी और मेहनतकश

/parasite-and-mehanatakash

सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश पढ़े-लिखे समझदार लोग माने जाते हैं। कम से कम उनसे देश-दुनिया के बारे में इतनी समझदारी की उम्मीद की जाती है कि वे ढंग से न्याय कर सकें

मनमोहन सिंह : क्रूर-जनविरोधी नीतियों का विनम्र शुरुआतकर्ता

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे। पूंजीवादी मीडिया उनकी विनम्रता के गुणगान कर रहा है। बेशक वे एक विनम्र प्रधानमंत्री थे। उनमें इंदिरा-राजीव या मोदी की तरह अकड़ का न

भारतीय अर्थव्यवस्था की गति और नियति

/bharatiy-arthvyawastha-ki-gati-aur-niyati

यहां याद रखना होगा कि बड़े पूंजीपतियों को अर्थव्यवस्था के वास्तविक हालात को लेकर कोई भ्रम नहीं है। वे इसकी दुर्गति को लेकर अच्छी तरह वाकिफ हैं। पर चूंकि उनका मुनाफा लगातार बढ़ रहा है तो उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं है। उन्हें यदि परेशानी है तो बस यही कि समूची अर्थव्यवस्था यकायक बैठ ना जाए। यही आशंका यदा-कदा उन्हें कुछ ऐसा बोलने की ओर ले जाती है जो इस फासीवादी सरकार को नागवार गुजरती है और फिर उन्हें अपने बोल वापस लेने पड़ते हैं। 

अमेरिकी लुटेरी स्वास्थ्य बीमा कंपनियां

/ameriki-luteri-swasthay-beema-companies

बीते दिनों अमेरिका में एक दिलचस्प वाकया घटित हुआ। 4 दिसम्बर को यूनाइटेड हेल्थ केयर के सीईओ ब्रायन थाम्पसन की मैनहट्टन में निवेशकों की एक बैठक में जाते समय गोली मारकर हत्य

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।