जब टेक्सास में पानी का स्तर बढ़ रहा था, एक अपरिहार्य आवाज खामोश की जा चुकी थी

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जब एक पत्रकार ने पूछा कि 4 जुलाई को पानी के स्तर के अपने मारक शिखर पर पहुंचने से पहले गुआडलूपे नदी के किनारे के समर कैंप के बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक क्यों नहीं पहुंचाया गया, स्थानीय स्तर के शीर्ष अधिकारी रॉब केली ने साधारण सा जवाब दिया : ‘‘कोई नहीं जानता था कि ऐसी भीषण बाढ़ आ रही है’’। 
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जो बात केली ने नहीं बताई और जो कि अब काफी चर्चा में है कि मौसम विभाग का कर्मचारी जिसकी जिम्मेदारी थी कि चेतावनियों पर अमल हो- पॉल यूरा - ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्मेंट एफिसिएंसी (डी ओ जी ई) द्वारा प्रस्तावित किए जा रहे कटौती कार्यक्रमों के बीच हाल ही में अनियोजित समयपूर्व सेवानिवृत्ति ले ली थी। उसके द्वार खाली किये गये स्थान को नहीं भरा गया। 
    
वाशिंगटन के किसी कटौती प्रेमी नौकरशाह के लिए उसका नौकरी छोड़ना एक विशाल बही खाते पर हुआ एक छोटा किन्तु स्वागतयोग्य घटाव रहा होगा। लेकिन एक ऐसे क्षेत्र जो इस तरह की खतरनाक घटनाओं की वजह से चपल बाढ़ो वाली गली कहलाता है, उसके लिए ऐसा नहीं है। नदी किनारे सैकड़ों बच्चे टामट कैंपों में सोए हुए थे। योजना यह थी बाढ़ के खतरनाक स्तर तक पहुंचने पर ऊपरी इलाकों के कैंपों के लोग निचले इलाके के लोगों को सूचित करेंगे। लेकिन जब काउंटी का सबसे ऊंचा अधिकारी ही सजग नहीं था, तो कैंप आयोजकों से कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे खतरे को भांप लेते- या, एक ऐसे क्षेत्र में जहां मोबाइल फोन संपर्क कमजोर है, वहां खतरे को लेकर उचित कार्यवाही कर पाते?
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आपदा संबंधी मुस्तैदी सबसे पेचीदी सार्वजनिक सेवाओं में से एक है। प्राकृतिक आपदाएं नियमित तौर पर सभी स्थानों पर आती हैं। लेकिन वे बता कर नहीं आती। इसका मतलब है कि इनके लिए तैयार रहने के लिए अतिरिक्त सावधानियों की जरूरत होती है। इसके लिए जरूरत होती है कि कई लोग तब भी काम पर हो जब कुछ भी गलत नहीं हो रहा हो। ताकि यह सुनिश्चित हो कि किसी अनहोनी की सूरत में वे कार्यवाही करें। इसके लिए महंगी अवरचना की जरूरत होती है जो कि सामान्य समय में खाली पड़ी रहती है। इसलिए यह राज्य की क्षमता और बुद्धिमत्ता का बहुत अच्छा संकेतक होता है। ...
    
किसी चीज के समय विशेष में उपयोग में नहीं आने का अर्थ हमेशा ही उसका जाया होना नहीं होता।....
    
टेक्सास बाढ़ की विषम परिस्थिति जहां गुआडलूपे नदी 45 मिनट में 26 फीट ऊंची उठ गयी, हम निश्चित तौर पर नहीं जान सकते कि क्या फर्क पड़ता अगर पॉल यूरा अपनी नौकरी पर बना रहता। लेकिन हम जानते हैं कि जब राष्ट्रीय मौसम सेवा ने चेतावनी जारी करनी शुरू की, तब से चार घंटे बीत गये जब करबिले शहर के पुलिस विभाग ने सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर अपने फेसबुक पेज पर पहली चेतावनी जारी की। काउंटी शेरीफ कार्यालय ने 5 बजकर 32 मिनट पर यह किया, यहां भी फेसबुक पर। 6 बजकर 22 मिनट पर करबिले सिटी हॉल बता रहा था, यह भी फेसबुक पर ही, कि क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है और आज का 4 जुलाई का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। 
    
7 बजकर 32 मिनट पर शहर ने पोस्ट किया कि, ‘‘अगर आप गुआडलूपे नदी के किनारे रह रहे हैं तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।’’ तब तक कई घंटों के लिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के रास्ते डूब चुके थे। 
    
आपदा के बाद ट्रंप प्रशासन ने और टेक्सास के स्थानीय अधिकारियों ने एक बार मौसम सेवा पर दोष मढ़ा तो फिर पलटी मारते हुए उसका बचाव किया। व्हाईट हाउस की प्रवक्ता ने पहले चेतावनी देने के लिए मौसम सेवा की सराहना की, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘‘किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी। कोई यह नहीं देख पाया। वहां काफी योग्य लोग हैं, लेकिन वे भी देख नहीं पाए’’। टेक्सास के आपदा प्रबंधन विभाग ने राष्ट्रीय मौसम सेवा पर दोष मढ़ा कि उनकी भविष्यवाणी में पानी की इतनी बड़ी मात्रा का जिक्र नहीं था जितना कि देखा गया। होमलैंड सिक्यूरिटी के विभाग ने एजेंसी द्वारा समयवार कार्यवाही का विस्तृत ब्यौरा पेश करते हुए बताया कि, ‘‘राष्ट्रीय मौसम सेवा ने 12 घंटे पहले फ्लड वाच के माध्यम से नोटिस दिया और चार घंटे पहले फ्लैश फ्लड की चेतावनी दी। जैसे जैसे तूफान तीव्र होता गया वैसे वैसे एलर्ट का स्तर भी बढ़ाया गया।’’
    
समस्या यह है कि कोई जटिल व्यवस्था उतनी ही मजबूत होती है जितना कि उसका सबसे कमजोर बिन्दु। मौसम सेवा समय से सटीक भविष्यवाणी दे रही थी। लेकिन भविष्यवाणियां लोगों को सक्रिय नहीं करतीं। विश्वसनीय उचित समय पर दी गयी चेतावनी जिसे वे सुनें और जिस पर वे भरोसा करें, वैसी चेतावनी ही लोगों को सक्रिय करती है। 
    
नाजुक मसलों के लिए बनी अवरचना की वहन क्षमता योजना के साथ-साथ काफी कष्टों के साथ धीमे-धीमे हासिल किये गये ज्ञान के जरिए उत्पन्न होती है। यह सब सामान्य समय में बर्बादी और विलासिता प्रतीत होता है। जांच ने दिखाया कि काउंटी अधिकारियों ने वर्षों तक बेहतर चेतावनी व्यवस्था के लिए रडार, पैमाने, सायरन के साथ-साथ मोबाइल नेटवर्क स्थापित करने के लिए राज्य एजेंसियों से 10 लाख डालर के फंड की मांग की। उनकी मांगों को कई बार ठुकराया गया और अंत में उन्होंने मांग करनी ही छोड़ दी। 
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मैंने कई होशियारों के मुंह से सुना है कि जैसा कि सैकड़ों बच्चे ठीक नदी किनारे सो रहे थे और जैसा कि बाढ़ का पानी बहुत तेजी से बढ़ा, ऐसे में वास्तविकता में कुछ भी नहीं किया जा सकता था। लेकिन एक कैंप मिस्टिक में जहां 27 कैंपवासी बह गये, वहीं वे बच्चे जिनके कैंप कुछ ही ऊंचे स्थान पर थे, सभी बच गये। सिर्फ निचले केबिन में रह रहे लोगों की क्षति हुई। ये निचले केबिन ऊपरी केबिन से मात्र चौथाई मील की दूरी पर थे। हर क्षण कीमती था। (न्यूयार्क टाइम्स के एक लेख के अंशों का अनुवाद)

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