चन्द्रशेखर आजाद के शहादत दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम
27 फरवरी 2025 को अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद के शहादत दिवस के अवसर पर इमके, प्रमएके, पछास व क्रालोस ने मिलकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया और आजाद के दिखाये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
27 फरवरी 2025 को अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद के शहादत दिवस के अवसर पर इमके, प्रमएके, पछास व क्रालोस ने मिलकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया और आजाद के दिखाये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
लखनऊ/ देश में जब भी मजदूरों पर संकट आया है तब उन्होंने अपने संघर्ष के बल पर विजय हासिल की है। आज देश की सड़कें सूनी और विपक्ष मौन है। पीड़ित वर्ग अपने काम
गुरुग्राम/ 31 जनवरी को सैकड़ों श्रमिक सुबह डीसी कार्यालय पर शांतिपूर्वक एकत्र हुए थे। वे मारुति सुजुकी अस्थायी मजदूर संघ की समिति के सदस्यों, श्रम अधिकारि
इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन व प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र फरवरी माहर में संयुक्त रूप से हिन्दू फासीवाद के खिलाफ अभियान
हरिद्वार/ दिनांक 26 जनवरी 2025 को ‘बढ़ते फासीवादी हमले तथा ट्रेड यूनियन के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर हरिद्वार में ट्रेड यूनियनों की कार्यशाला इंकलाबी मजदूर
गुड़गांव/ दिनांक 29 जनवरी 2025 को गुड़गांव पुलिस ने 144 दिनों से मानेसर में धरना दे रहे मारुति के बर्खास्त मजदूरों को दोपहर डिटेन कर बसों में भर कर मानेसर
लालकुंआ/ सेन्चुरी पेपर मिल में अगस्त 2024 से नवम्बर 2024 तक चली स्थायी श्रमिकों द्वारा त्रिवार्षिक समझौते को अपनी मांगों के अनुरूप कराने की मुहिम का समाप
गुड़गांव/ दिनांक 10 जनवरी 2025 को बेलसोनिका यूनियन ने श्रम विभाग की मध्यस्थता में हुए 12(3) के त्रिपक्षीय समझौते (दिनांक 01 जून 2023) को लागू करवाने के लि
हरिद्वार/ उत्तराखंड के हरिद्वार में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन का दो दिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के दूसरे दिन 3 जनवरी 2025 को सम्मेलन क
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।