ईएसआईसी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए धरना-प्रदर्शन
फरीदाबाद/ हरियाणा के ईएसआईसी मेडिकल कालेज अस्पताल व डिस्पेंसरियों में इलाज के नाम पर कभी पूरी दवाइयां नहीं तो कभी डाक्टर नहीं, कभी जांच नहीं जैसे मामलों
फरीदाबाद/ हरियाणा के ईएसआईसी मेडिकल कालेज अस्पताल व डिस्पेंसरियों में इलाज के नाम पर कभी पूरी दवाइयां नहीं तो कभी डाक्टर नहीं, कभी जांच नहीं जैसे मामलों
9 दिसम्बर 2024 को महिला मजदूरों की मांगों को लेकर श्रम विभाग, रोशनाबाद (हरिद्वार) पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेतृत्व में प्रदर्शन किय गया। सिडकुल (हरिद्वार) में महिला मज
पंतनगर/ 37 दिनों तक आमरण अनशन पर रहने के बाद डालफिन के मजदूरों का संघर्ष भाजपा के प्रदेश मंत्री विकास शर्मा के आश्वासन के पश्चात 26 नवम्बर को समाप्त हो ग
पंजाब में जनवादी संगठनों द्वारा मानव अधिकार दिवस के अवसर पर व्यापक पैमाने पर विरोध मार्च, सम्मेलन आयोजित किये। पंजाब के तीन दर्जन से अधिक जनवादी संगठनों के संयुक्त मंच ने 10 दिसंबर, 24 को अंतर्राष्
बीते दिनों कुछ किसान संगठनों ने केन्द्र सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ दिल्ली मार्च का आह्वान किया था। जब 8 दिसम्बर को पंजाब से किसानों के कुछ जत्थों ने दिल्ली की ओर कूच कि
आई एम टी मानेसर में स्वास्तिक आटो इंजीनियरिंग प्रा. लि.
दिल्ली/ प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा महिला-मजदूरों पर बढ़ते शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ 10 नवंबर 2024, रविवार, को देश की राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन आयोज
फरीदाबाद/ 30 अक्टूबर की देर रात 2ः00 बजे से 17 वर्षीय किशोरी एसी नगर झुग्गी मजदूर बस्ती फरीदाबाद से संदिग्ध हालत में घर से लापता हो गई थी। परिवारजनों द्व
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।