युद्ध विरोधी नारों के साथ मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:34
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इस बार 8 मार्च : अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली से लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड तक आयोजित कार्यक्रमों में युद्ध की गूंज रही। सभा-गोष्ठियों में अमेरिका-इजराइल गठजोड़ द्वारा ईरान पर जारी हमलों में मारे जा रहे मासूम बच्चों और निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये दो मिनट का मौन रखा गया। युद्ध विरोधी नारों के साथ जुलूस निकाले गये। वक्ताओं ने अमेरिकी साम्राज्यवाद को दुनिया की जनता का सबसे बड़ा दुश्मन बताया और कहा कि युद्ध की गाज सबसे अधिक महिलाओं पर ही गिरती है। 
    
दिल्ली में 8 मार्च पर प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई। तदुपरांत दोपहर में शाहबाद डेरी में सभा कर जुलूस निकाला गया। इस दौरान अमेरिका-इजराइल गठजोड़ द्वारा ईरान पर किये जा रहे हमलों के विरोध का आह्वान किया गया। 
    
गुड़गांव में इस अवसर पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा विचार गोष्ठी की गई एवं जुलूस निकाला गया जिसमें परिवर्तनकामी छात्र संगठन तथा प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की। कार्यक्रम का समापन साहिर लुधियानवी के प्रसिद्ध गीत ‘‘वो सुबह कभी तो आयेगी से किया गया’’। 
    
फरीदाबाद में इस मौके पर इंकलाबी मजदूर केंद्र और परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा सभा की गई एवं जुलूस निकालकर अश्लील उपभोक्तावादी संस्कृति का पुतला फूंका गया। वक्ताओं ने कहा कि एपस्टिन फाइल के खुलासे बता रहे हैं कि ये पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया किस कदर सड़-गल चुकी है। 
    
गोहाना में 8 मार्च पर समतामूलक महिला मंच द्वारा विचार गोष्ठी कर शहर में जुलूस निकाला गया। इस दौरान टटिहरी गाने के निर्माताओं एवं संगीतकारों पर सख्त कार्रवाही की मांग की गई। 
    
कुरुक्षेत्र में इस अवसर पर जन संघर्ष मंच, हरियाणा द्वारा जनसभा कर शहर में जुलूस निकाला गया। इस दौरान सफीदों (जिला जींद) की एक रंग फैक्टरी में लगी आग में मरी 5 महिला मजदूरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये दो मिनट का मौन रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि ये दुर्घटना नहीं बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा की गई हत्यायें हैं। 
    
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र एवं प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड द्वारा 8 मार्च के अवसर पर उत्तराखंड में व्यापक कार्यक्रम एवं विरोध-प्रदर्शन आयोजित किये एवं संयुक्त विरोध-प्रदर्शनों में भागीदारी की। हरिद्वार से लेकर काशीपुर, जसपुर, रामनगर, हल्द्वानी, बिंदुखत्ता, पंतनगर और रुद्रपुर जैसे तराई-भाबर के कस्बों-शहरों से लेकर नैनीताल, बेतालघाट, अल्मोड़ा के देघाट, चम्पावत जिले के लोहाघाट, पाटी, चम्पावत एवं बालाकोट जैसे पहाड़ी क्षेत्रों तक आयोजित इन प्रदर्शनों में अमेरिका-इजराइल गठजोड़ द्वारा ईरान के एक स्कूल पर बमबारी कर 150 से भी अधिक बच्चियों की हत्या की घनघोर भर्त्सना की गई और युद्ध विरोधी नारे गूंजे। 
    
इस दौरान वक्ताओं ने ईरान पर जारी हमलों पर मोदी सरकार की चुप्पी को शर्मनाक और अमेरिकी साम्राज्यवादियों के समक्ष आत्मसमर्पण बताया। इसके अलावा मोदी सरकार द्वारा लाये गये नये मजदूर विरोधी लेबर कोड्स को वापस लिये जाने तथा भोजनमाताओं का मानदेय बढ़ाने एवं उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिये जाने की मांग भी बुलंद की गई। तराई-भाबर क्षेत्र में इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, रुद्रपुर में डालफिन मजदूर यूनियन और हरिद्वार में किर्बी श्रमिक कमेटी के कार्यकर्ताओं ने भी इन कार्यक्रमों में बढ़कर भागीदारी की। 
    
इसके अलावा रुद्रपुर में सेंटर फार स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (सी एस टी यू) द्वारा एक परिचर्चा, रामनगर में महिला एकता मंच द्वारा युद्ध विरोधी सभा एवं उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी व प्रगतिशील जन एकता मंच द्वारा विचार गोष्ठी कर महिला अधिकारों पर अपनी आवाज बुलंद की गई। 
    
बरेली में इस मौके पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा विचार गोष्ठी की गई जिसमें नये लेबर कोड्स के तहत महिला मजदूरों से नाईट शिफ्ट में काम कराने के प्रावधान की सख्त आलोचना कर इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। कार्यक्रम में आटो रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन एवं क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की। 
    
लखनऊ में इस अवसर पर संत रविदास ज्ञान विहार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र एवं क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की। 
    
मऊ और बलिया में 8 मार्च पर इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा ग्रामीण महिलाओं की बैठकें की गई। बैठकों में अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के इतिहास और वर्तमान में जारी युद्ध पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जब तक साम्राज्यवादी व्यवस्था कायम है तब तक युद्धों की विभीषिका से मुक्ति नहीं मिल सकती।         -विशेष संवाददाता

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