अविश्वास प्रस्ताव : बहुमत को नहीं दोष गोसाईं
पूंजीवादी राजनीति में जब थोक के भाव विधायक-सांसद खरीदे जाने लगे, तो मुद्दा-आधारित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान किसी विचारोत्तेजक बहस की अपेक्षा नहीं की जा सकती। आठ अगस्त से
पूंजीवादी राजनीति में जब थोक के भाव विधायक-सांसद खरीदे जाने लगे, तो मुद्दा-आधारित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान किसी विचारोत्तेजक बहस की अपेक्षा नहीं की जा सकती। आठ अगस्त से
बीते एक साल से भी ज्यादा समय से सी एण्ड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड हरिद्वार के बी.टी.
पिछले दिनों काशीपुर में काशी विश्वनाथ टेक्सटाइल कम्पनी की बस पलटने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गयी और दर्जनों मजदूर घायल हो गये। मृतक मजदूर फैक्टरी से कुछ ही दूरी पर प्
आज देश की सारी समस्यायें गरीबी, बेकारी, महंगाई खत्म हो गयी हैं। खेतों में दिन-रात मेहनत करते-घाटे की खेती करते गरीब किसान की बदहाली गायब हो गयी है। अब देश की इकलौती सर्वप
इस वर्ष भी पन्द्रह अगस्त के दिन वही सब दुहराया जायेगा जो हर वर्ष दुहराया जाता है। वही प्रधानमंत्री के लम्बे-लम्बे भाषण। सारहीन, जुमलों से भरे हुए और डींग मारते भाषण। खाये
शहीद उधमसिंह हमारे देश के वो महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिये जिम्मेदार तत्कालीन गवर्नर जनरल ओ’ ड्वायर को लंदन जाकर गोली से उड़ा दिया था और ह
हमारे देश में बढ़ता हुआ हिन्दू फासीवादी आंदोलन सबके जीवन को प्रभावित कर रहा है। आने वाले वक्त में यह रोजमर्रा के जीवन को किन-किन मामलों में और प्रभावित कर सकता है इसे हम ज
23 जुलाई को फरीदाबाद (हरियाणा) में इंकलाबी मजदूर केंद्र और परिवर्तनकामी
मार्क ट्वेन के हवाले से एक कहावत है- ‘झूठ, महाझूठ और आंकड़े’। इसका आशय यह है कि आंकड़ों के जरिये कुछ भी साबित किया जा सकता है। इसीलिए आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
प्रोटेरिअल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (हिताची), प्लाट नं 94-95, सेक्टर-8, आईएमटी मानेसर के ठेका मज़दूरों का 23 दिन की जुझारू हड़ताल के बाद समझौता सम्पन्न हुआ। 22 जुलाई 2023 को
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।