विविध

मोदी के 18-18 घंटे काम के परिणाम आने लगे

मोदी ने केन्द्र की सत्ता में बैठते ही लफ्फाजियों की झड़ियां लगानी शुरू कर दी थीं। मोदी ने अपने आप को 18-18 घंटे काम करने वाले के रूप में प्रचारित कराया। इस बात को इस रूप म

लो हिसाब हाकिम से

अधमरा पड़ा है जमीन पर 
बची सांसें थोड़ी हैं।
लो हिसाब हाकिम से उसने कितनी लाठियां 
तोड़ी हैं।
कतरा-कतरा पड़ा है 
सांस का नब्ज उसकी टटोली है।

इस साल की बरसात ने किया बुरा हाल

इस साल बरसात के मौसम में काफी तबाही-बरबादी देखने को मिली। पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक बारिश ने काफी कहर बरपा किया। बरसात के पानी में मकान माचिस की डिब्बियों की तरह बहते

‘‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’’

यह एक जानी-पहचानी बात है कि शासक वर्ग जब जिस वक्त जो नारे उछालता है हकीकत में वह स्वयं या तो उस पर यकीन नहीं रखता है या फिर वह अपने नारे के जरिये हकीकत पर पर्दा डालने का

सैनिक तख्तापलट के बाद नाइजर - साम्राज्यवादियों के बीच टकराव का एक क्षेत्र

26 जुलाई के सैनिक तख्तापटल के बाद नाइजर में कई तरह ही ताकतें सक्रिय हो गयी हैं। एक तरफ, अमरीकी साम्राज्यवादी, फ्रांस और यूरोपीय संघ है। ये साम्राज्यवादी ताकतें इकोवास (पश

बर्बरता की ओर

जब चेतन सिंह चौधरी ने चलती रेल के अलग-अलग डिब्बों में अपने अधिकारी टीकाराम मीना और तीन मुसलमान यात्रियों की चुन-चुन कर हत्या की तो हिन्दू फासीवादी सरकार और उसके समर्थकों

पंतनगर वि.वि. : परियोजना शिक्षकों पर शासन का हमला

पंतनगर/ उत्तराखंड शासन के 4 जुलाई 2023 के आदेशानुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर 34 शिक्षकों (जो 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे) को एक झटके में

फासीवाद विरोधी अभियान : संघी लंपटों और पुलिस के अड़ंगे

फरीदाबाद/ इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयुक्त प्रयासों के तहत केंद्रीय

जिन्दगी और मौत

जिन्दगी और मौत के बीच फासला बहुत कम रह जाता है। यह तब महसूस हुआ जब किसी को केवल मुसलमान होने पर मारा जा सकता है। 31 जुलाई को नूंह में हुई साम्प्रदायिक हिंसा को आधार बनाकर

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर मऊ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन व जनसभा

9 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसे क्रियान्वित करते हुए संयुक्त किसान मोर्च

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।