विविध

दुनिया : दक्षिणपंथी और फासीवादी उभार

भारत में, मई 2014 से ही मोदी-शाह की अगुवाई में संघ परिवार सत्ता पर काबिज है। इन हिंदू फासीवादियों ने अपने फासीवादी एजेंडे के अनुरूप समाज और संस्थाओं को काफी हद तक ढाला है

अलविदा मैकाले, सुस्वागतम् हिटलर !

हिन्दू फासीवादियों की केन्द्रीय सरकार ने भारत के आपराधिक कानूनों को बदलने की घोषणा कर दी है। भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदल

हिंदू फासीवाद के विरुद्ध व्यापक अभियान

देश में लगातार गहरा रहे हिंदू फासीवाद के खतरे के मद्देनजर जुलाई-अगस्त माह में इसके विरोध में एक अभियान संगठित किया गया। यह अभियान इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र

अडाणी पर मेहरबान मोदी सरकार

प्रधानमंत्री मोदी की देश के शीर्ष पूंजीपति अडाणी से यारी किसी से छुपी नहीं है। यह यूं ही नहीं है कि मोदी के 10 वर्ष के शासन में सबसे ज्यादा फलने-फूलने वाला अडाणी समूह ही

अभियान में प्रशासन द्वारा अवरोध पैदा करने की कोशिश

हल्द्वानी (उत्तराखंड)/ 16 अगस्त की शाम को हल्द्वानी के बनभूलपुरा के इलाके में परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और प्रगतिशील महिला ए

भारत लोकतंत्र की जननी कैसे है?

बीते कुछ समय से मोदी सरकार ने लोकतंत्र का जाप बढ़ाते हुए भारत को न केवल सबसे बड़ा लोकतंत्र बल्कि लोकतंत्र की जननी कहना शुरू कर दिया तो सभी इतिहासकार अचम्भे में पड़ गये। वैसे

ठेका मजदूरों ने संघर्ष के दम पर हासिल किया वेतन

पंतनगर/ दिनांक 24 अगस्त 2023 को जुलाई माह का वेतन भुगतान नहीं होने से गुस्साए गार्डन सैक्सन के ठेका मजदूरों ने सुबह काम बंद कर दिया। मजदूरों ने लम्बित जुलाई माह का वेतन और हर माह क

नूंह दंगे : एक रिपोर्ट

6 अगस्त 2023 को इंकलाबी मजदूर केंद्र से योगेश और राजू, राष्ट्रीय मतदाता परिषद से सतीश मराठा जी और स्वराज इंडिया से तनवीर अहमद जी की एक सामूहिक टीम फैक्ट फाइंडिंग के लिए न

शहतूत के गिरने के बाद

शहतूत के गिरने के बाद
जमीन लाल रंग के निशानों से भर जाती है
और नुकीले टुकड़ों पर
रक्त और लिपटा मांस
गिरने की पीड़ादायी यंत्रणा को 
बयां करता है

शहतूत

फैक्टरी में सीमेंट की चादरें बदलनी हैं, काम पर ठेकेदार ने जल्दी बुलाया है। अर्जुन को ठेकेदार के अंडर में काम करते हुए एक लम्बा अरसा हो गया था। अलग-अलग फैक्टरियों में काम

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।