मेघालय : कोयला खदान में विस्फोट, 27 मजदूरों की मौत
मेघालय में 5 फरवरी को एक कोयला खदान में विस्फोट होने से 27 मजदूरों की मौत हो गयी। अभी भी कई मजदूर 100 मीटर गहरे गड्डे में फंसे हैं। यह खदान पूर्वी जयंतिया हिल्स में थांगस
मेघालय में 5 फरवरी को एक कोयला खदान में विस्फोट होने से 27 मजदूरों की मौत हो गयी। अभी भी कई मजदूर 100 मीटर गहरे गड्डे में फंसे हैं। यह खदान पूर्वी जयंतिया हिल्स में थांगस
12 फरवरी की आम हड़ताल पिछले कुछ वर्षों की हड़तालों से कहीं अधिक सफल रही। स्कीम वर्कर्स, गिग मजदूरों-सरकारी कर्मियों के साथ कई जगह निजी क्षेत्र की यूनियनों ने भी हड़ताल की। द
वर्मा जी की सरकारी नौकरी उस समय लगी जब पांचवीं जमात फेल आदमी को भी सरकारी नौकरी मिल जाती थी। और प्रमोद का दाखिला उस समय सरकारी स्कूल में हुआ जब सरकारी कर्मचारियों के बच्चों का सरकारी स्कूल में पढ़ना
रोम जल रहा था
नीरो बंशी बजा रहा था
हमारा नीरो बंशी नहीं
डमरू बजा रहा है।
जनता दूषित पानी पीकर मर रही है
वह ड्रम बजा रहा है
रूपया रसातल में जा रहा है
आजकल उत्तराखंड हिंदुत्व की प्रयोगशाला बना हुआ है। यहां लंपट, गुंडा तत्वों को हिंदुत्व के नाम पर गुंडागर्दी करने की खुली छूट मिली हुई है। कभी पूर्वोत्तर के छात्र एंजल चकमा
हकीकत में क्या हुआ है? भारत के स्वयंभू राष्ट्रवादियों ने अमेरिकी साम्राज्यवादियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। और एक तरीके से अपने इतिहास को फिर से दुहरा दिया है। आजादी की लड़ाई के समय ये ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के ‘आज्ञाकारी सेवक’ थे और आज ये अमेरिकी साम्राज्यवादियों के आज्ञाकारी अनुचर बने हुए हैं।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।