मजदूरों-मेहनतकशों की बस्ती में ठगों का डेरा
जैसे बाबाओं की आवक-जावक होती रहती है। पुराने ठग अपना प्रभाव खो देते हैं तो नये ठग, नया वेश धारण कर, नयी बातों के साथ अपना धंधा चालू करते हैं। ठीक यही राजनैतिक क्षेत्र में भी घटता है। एक नेता की जगह दूसरा नेता। एक पार्टी की जगह दूसरी पार्टी। एक का जादू उतरता है तो दूसरे का जादू चढ़ता है।