विविध

बनभूलपुरा में दर्जनों झोपड़ियां जलकर हुई राख

हल्द्वानी/ बीते 20 अप्रैल की रात में हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में दो दर्जन से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इस अग्निकांड में बस्तीवासियों का बिस्तर,

पूंजीवादी जनतंत्र में चुनाव और जन-जीवन के मुद्दे

सुनील कानुगोलू का नाम कम ही लोगों ने सुना होगा। कम से कम प्रशांत किशोर के मुकाबले तो जरूर ही कम सुना होगा। पर प्रशांत किशोर की तरह सुनील कानुगोलू भी ‘चुनावी रणनीतिकार’ है

बनभूलपुरा के पीड़ितों की मदद हेतु अभियान

हल्द्वानी बनभूलपुरा में 8 फरवरी 2024 को प्रशासन द्वारा मदरसा व मस्जिद को हाईकोर्ट में सुनवाई होने के बावजूद भी बुलडोजर से तोड़ने के कारण उपजे विवाद के बाद हुए उपद्रव में प

मजदूर पूंजीपतियों की गुलामी क्यों करें? कब तक करें?

भारत ही नहीं विश्व का मजदूर आंदोलन एक विचित्र अवस्था से गुजर रहा है। मजदूर वर्ग के पुराने संगठन, पार्टियां अपने ढलान की ओर हैं, और नये संगठन, नये आंदोलन विकसित नहीं हो पा

आठ साल की बच्ची की हत्या की घटना

आज जैसे ही मैं सोया मेरी नींद अचानक खुल गयी। मैं परेशान था। परेशान एक घटना ने कर रखा था जो आज पूरे दिन मेरे दिलों दिमाग पर घूमती रही। एक आठ साल की बच्ची जिसको उसकी सौतेली

गाजा के संघर्ष को बयां करते बहादुर पत्रकारों को सलाम!

फिलिस्तीन (गाजा) का संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। इस लंबे संघर्ष ने फिलिस्तीनी जनता विशेष रूप से फिलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों के जीवन को बहुत तकलीफदेह बना दिया है।

कौन ले जाएगा उन्नति के शिखर पर

‘‘खेलने के लिए मैंदान होने चाहिए, जहां बच्चे मुफ्त में खेलें और सीखें।’’ ‘‘हास्टल होने चाहिए जहां बाहर से आने वाले छात्र रह सकें।’’ ‘‘नशे पर रोक लगनी चाहिए।’’

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की हालत

हम बरेली शहर के मढ़ीनाथ और बंशीनगला मोहल्ले की बात कर रहे हैं। यहां अलग-अलग नाम से दो सेण्टर संचालित होते हैं। यहां कई कर्मचारी हैं व एक डॉक्टर भी है। यहां छोटी-छोटी बीमार

जब अपनी पर गुजरी, तो दिखी तानाशाही

पिछले कुछ समय से मोदी सरकार के इशारे पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विपक्षी पार्टियों विशेष रूप से आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं पर प्रिवेंशन आफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट 2002

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।