अब जनगणना के जरिये जासूसी व नागरिकता परीक्षण

Published
Sun, 11/01/2026 - 07:50
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फासीवादी मोदी सरकार 2026-27 में जनगणना करा रही है। इसके पहले चरण में मकान गणना का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में जनगणना हेतु 40 सवालों की जो सूची सरकार ने जारी की है वह मोदी सरकार के कुत्सित इरादों को जगजाहिर कर देती है। दरअसल, इन सवालों के जरिये मोदी सरकार हर नागरिक की तमाम व्यक्तिगत जानकारियों के साथ-साथ इनके आधार पर फिर से नागरिकता परीक्षण की मंशा लिए हुए है। 
    
इस बार जनगणना के साथ जाति गणना भी की जा रही है। पर जाति गणना जिस रूप में की जा रही है उससे साफ है कि सरकार बिहार की जाति गणना से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। जाति गणना के तहत व्यक्ति को बिहार में व मौजूदा जनगणना में खुद अपनी जाति बताने को कहा गया है। बिहार में इसका परिणाम यह निकला कि लाखों की संख्या में जातियां सामने आ गयीं। व जाति गणना का कोई परिणाम नहीं निकला। विपक्ष ने मांग की थी कि कुछ विकल्पों को देकर उस पर व्यक्ति को सही का निशान लगाने, को कहा जाये ताकि विभिन्न जाति समूहों की वास्तविक आबादी का पता चल सके। पर सरकार के इरादे जाति गणना को किसी सही नतीजे तक पहुंचाने के नहीं लगते। अनुमान लगाया जा रहा है कि कई लाख जातियां इस जनगणना में सामने आ जायेंगीं।
    
40 प्रश्नों की सूची में व्यक्ति के मोबाइल नं., आधार नं., वोटर आई डी व पासपोर्ट नं. की जानकारी भी पूछी जायेगी। ये जानकारियां न केवल जनगणना के सांख्यिकीय उद्देश्यों से विचलन है बल्कि पहचान योग्य जानकारियां व्यक्ति की निजता व गोपनीयता का भी उल्लंघन हैं। इसी तरह व्यक्ति के नाम के साथ माता-पिता का नाम देने की शर्त सरकार की जनगणना के प्रति मंशा पर शक पैदा करती है। 
    
एक अन्य प्रश्न में कोविड-19 टीकाकरण की जानकारी पूछना इस जनगणना में समझ से परे है। आखिर सरकार वर्षों पहले के इस टीकाकरण की जानकारी से क्या हासिल करना चाहती है। 
    
1971 से जनगणना के दौरान राष्ट्रीयता संदर्भी प्रश्न नहीं पूछा जाता रहा है पर इस जनगणना में ‘घोषित राष्ट्रीयता’ का प्रश्न पूछना सरकार की मंशा को शक के दायरे में लाता है। 
    
इसी तरह व्यक्ति के बैंक खातांे की जानकारी संदर्भी प्रश्न पुनः व्यक्ति की निजता पर हमला बोलता है। 
    
कुल मिलाकर माता-पिता, स्थायी पता व राष्ट्रीयता सरीखी जानकारियों के जरिये सरकार नया राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर तैयार कर सकती है। 
    
अभी तक जनगणना के काम में सरकारी कर्मी लगाये जाते रहे हैं पर इस जनगणना में निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, निजी बैंकों व कम्पनियों के कर्मचारी व साथ ही राज्य सरकार द्वारा ‘उपयुक्त’ माना गया कोई व्यक्ति भी जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है। ऐसे में आशंका जतायी जा रही है कि बड़े पैमाने पर संघी स्कूलों (शिशु मंदिर-विद्या मंदिर) के शिक्षक व संघ के अन्य लोग जनगणना कार्य में लगाये जायेंगे। जनगणना कार्य के नाम पर उनकी जेबें भी गर्म की जायेंगी। ये न केवल आंकड़ों को सरकार के साथ-साथ संघ के लिए एकत्र करेंगे बल्कि नतीजों को प्रभावित करने के लिए आंकड़ों को संघी चश्मा भी पहनायेंगे। 
    
कुल मिलाकर सरकार जहां इस जनगणना के जरिये जाति गणना का मजाक बना रही है बल्कि एस आई आर के बाद जनगणना के जरिये नागरिकता परीक्षण की भी साजिश कर रही है। साथ ही वह हर व्यक्ति की गोपनीय जानकारी भी इकट्ठा करने का प्रयास कर रही है जो भविष्य में पुलिस राज कायम करने में मददगार बनेगा। सरकार की इन साजिशों का विरोध जरूरी है। 

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