गांवों में शराब की दुकानें खोले जाने पर महिलायें-ग्रामीण संघर्षरत
पंतनगर/ दिनांक 12 मार्च 2025 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के न्यायधीश रविन्द्र मैथानी की पीठ द्वारा पंतनगर विश्वविद्यालय में पिछले 15-20 वर्षों से
पंतनगर/ दिनांक 13 अप्रैल 2025 को जलियांवाला बाग हत्याकांड व पंतनगर गोलीकांड की याद में ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा से जुड़ी यूनियनों/संगठनों द्वारा रामली
फरीदाबाद/ Elkay कम्पनी हरियाणा के फरीदाबाद शहर में प्लाट नम्बर 141, सेक्टर 24 में स्थित है। यह काफी पुरानी कम्पनी है। इसमें कॉपर की हर साइज की तार बनाने का काम होता है। ह
काशीपुर/ जिला उधमसिंह नगर में स्थित काशीपुर शहर जहां छोटे-बड़े कई कारखाने और फैक्टरियां हैं। इन्हीं फैक्टरी ग्रुपों में से एक ग्रुप है जिसका नाम के वी एस
हरिद्वार/ यहां लक्सर क्षेत्र में जे के टायर ग्रुप की टायर फैक्टरी मौजूद है। यहां के मजदूर अपने हकों के लिए संघर्षरत हैं। हर 3 साल में यहां कर्मचारियों का
हरिद्वार/ हरिद्वार के निकट लक्सर क्षेत्र में धनपुरा में 2004 से स्थापित ग्रेट व्हाइट ग्लोबल कम्पनी में इलेक्ट्रिक पार्ट्स का काम होता है। यहां 1700 मजदूरों में से 80 प्रतिशत महिलाए
गुड़गांव/ वर्तमान समय में भले ही मजदूर आंदोलन ठहरा या पीछे हटा हो, लेकिन पूंजीपति वर्ग का डर कम नहीं हुआ है। पूंजीपति वर्ग अपने डर को भिन्न-भिन्न तरीकां से कम करने की तरकीबें निकालत
गुड़गांव/ बिलासपुर से तावड़ू रोड पर स्थित शंकाई प्रगति इण्डिया लिमिटेड के मजदूरों का धरना दिनांक 10 मार्च से चल रहा है। कम्पनी में लगभग 250 मजदूर काम कर रह
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।