रिपोर्ट

एलके (Elkay) कम्पनी में मजदूरों का शोषण

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फरीदाबाद/ Elkay कम्पनी हरियाणा के फरीदाबाद शहर में प्लाट नम्बर 141, सेक्टर 24 में स्थित है। यह काफी पुरानी कम्पनी है। इसमें कॉपर की हर साइज की तार बनाने का काम होता है। ह

मजदूर की मौत पर संघर्ष

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काशीपुर/ जिला उधमसिंह नगर में स्थित काशीपुर शहर जहां छोटे-बड़े कई कारखाने और फैक्टरियां हैं। इन्हीं फैक्टरी ग्रुपों में से एक ग्रुप है जिसका नाम के वी एस

टायर फैक्टरी में वेतन समझौते को लेकर कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना

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हरिद्वार/ यहां लक्सर क्षेत्र में जे के टायर ग्रुप की टायर फैक्टरी मौजूद है। यहां के मजदूर अपने हकों के लिए संघर्षरत हैं। हर 3 साल में यहां कर्मचारियों का

ग्रेट व्हाइट ग्लोबल कम्पनी के मजदूरों का संघर्ष

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हरिद्वार/ हरिद्वार के निकट लक्सर क्षेत्र में धनपुरा में 2004 से स्थापित ग्रेट व्हाइट ग्लोबल कम्पनी में इलेक्ट्रिक पार्ट्स का काम होता है। यहां 1700 मजदूरों में से 80 प्रतिशत महिलाए

ठेका व स्थाई मजदूरों में अंतर करने के लिए बदली यूनिफार्म

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गुड़गांव/ वर्तमान समय में भले ही मजदूर आंदोलन ठहरा या पीछे हटा हो, लेकिन पूंजीपति वर्ग का डर कम नहीं हुआ है। पूंजीपति वर्ग अपने डर को भिन्न-भिन्न तरीकां से कम करने की तरकीबें निकालत

छंटनी के खिलाफ मजदूर संघर्षरत

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गुड़गांव/ बिलासपुर से तावड़ू रोड पर स्थित शंकाई प्रगति इण्डिया लिमिटेड के मजदूरों का धरना दिनांक 10 मार्च से चल रहा है। कम्पनी में लगभग 250 मजदूर काम कर रह

शहादत दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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हमारे देश के महान क्रांतिकारियों भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू को ब्रिटिश उपनिवेशवादियों ने 23 मार्च, 1931 के दिन फांसी पर चढ़ा दिया था। और ये नौजवान क्रांतिकारी ‘‘इंकलाब ज़िं

मारुति मजदूरों का प्रदर्शन

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नई दिल्ली/ 19 मार्च 2025 को मारुति सुजुकी के अस्थायी कर्मचारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री कार्यालय में

पेरिस कम्यून दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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पेरिस कम्यून मानव इतिहास की अविस्मरणीय घटना है जब पेरिस के मजदूरों ने पूंजीपतियों के ‘‘स्वर्ग पर धावा’’ बोलते हुये सत्ता को अपने हाथों में ले लिया था। 18 मार्च 1871 को फ्

आलेख

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।