जाति समस्या पर सेमिनार
बदायूं/ दिनांक 27 अप्रैल 2025 को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और जनहित सत्याग्रह मोर्चा द्वारा जाति के सवाल पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का व
बदायूं/ दिनांक 27 अप्रैल 2025 को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और जनहित सत्याग्रह मोर्चा द्वारा जाति के सवाल पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का व
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस अथवा मई दिवस मजदूरों के संघर्षों का प्रतीक दिवस है जो कि पहली मई को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न क्रांतिकारी संगठन एवं वर्ग सचे
हरिद्वार/ सिडकुल में एंकर पैनासोनिक कंपनी के लगभग 4000 से अधिक स्थायी एवं अस्थायी मजदूरों ने अपनी हड़ताल को एक हफ्ते के बाद आश्वासन पर समाप्त कर दिया। हरि
हरिद्वार/ हरिद्वार के सिडकुल में किर्बी के मजदूरों की बीस सालों की तानाशाही के खिलाफ 10 दिन की ऐतिहासिक हड़ताल आंशिक जीत के साथ समाप्त हुई। इस हड़ताल में ल
हरिद्वार/ दिनांक 29 अप्रैल को सिडकुल (हरिद्वार, उत्तराखंड) में एंकर (पैनासोनिक) कंपनी के मजदूर वेतन वृद्धि और शोषण उत्पीड़न के खिलाफ काम बंद कर सडकों पर उ
पंतनगर/ 15 अप्रैल 2025 को ट्रेड संयुक्त मोर्चा से जुड़ी यूनियन पंतनगर कर्मचारी संगठन पंतनगर, वि.वि.श्रमिक कल्याण संघ पंतनगर, राष्ट्रीय सफाई मजदूर कांग्रेस
दिल्ली/ इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा संयुक्त रूप में फासीवाद पर सेम
नैनीताल/ उत्तराखंड में 27 जनवरी, 2025 को समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू कर दिया गया है जिसके विरोध में 25 अप्रैल को उत्तराखंड के विभिन्न सामाजिक-राजनीत
उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं रोज-ब-रोज कई समस्याओं से जूझ रही हैं। सरकार एक तरफ ईजा-बैणी महोत्सव मना रही है। उज्ज्वला गैस योजना को घर-घर पहुंचाने की बात कर रही है। लेकिन कई
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।