मोदी की अमेरिका यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा पिछले दिनों काफी चर्चा का मुद्दा रही। भारत के चाटुकार मीडिया ने दिन-रात की कवरेज कर यह साबित करने की कोशिश की कि मोदी एक वैश
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा पिछले दिनों काफी चर्चा का मुद्दा रही। भारत के चाटुकार मीडिया ने दिन-रात की कवरेज कर यह साबित करने की कोशिश की कि मोदी एक वैश
देहरादून/ प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड नैनीताल के बैनर तले भोजनमाताओं ने राजधानी देहरादून में विशाल प्रदर्शन कर भयंकर शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज बु
मई के महीने में सी एस डी एस-लोकनीति के एक सर्वेक्षण का परिणाम काफी चर्चा में रहा। इस सर्वेक्षण ने दिखाया था कि प्रधानमंत्री पद के लिए जहां नरेन्द्र मोदी 43 प्रतिशत लोगों की पसंद थे वहीं 27 प्रतिशत
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन का आठवां सम्मेलन 24-25 जून 2023 को उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में आएशा पैलेस में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली के प्रतिनिधियों ने भागीद
पिछले दिनों देश के प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका की यात्रा पर थे। अमेरिका में मोदी के प्रवास के दौरान वह सब कुछ हुआ जो हो सकता था। स.रा.
जून अंत में बिहार के पटना में जी-20 के देशों की ट्रेड यूनियनों की एल-20 (लेबर-20) की बैठक आयोजित हुई। लेकिन इस बैठक की अध्यक्षता आर एस एस के मजदूर संगठन- भारतीय मजदूर संघ
अभी बीते 28 मई 2023 को देश की नई संसद सेण्ट्रल विस्टा का उद््घाटन हुआ है। इस उद्घाटन समारोह में सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी व उसके कुछ सहयोगी दलों ने ही हिस्सेदार
बीते कुछ समय से समूचे उत्तराखण्ड में पुलिस का सत्यापन अभियान चल रहा है। इस सत्यापन अभियान के तहत पुलिस उत्तराखण्ड के बाहर के व्यक्तियों, किरायेदारों, दुकानदारों, फड़-ठेली
हरिद्वार में ‘देवभूमि श्रमिक संगठन हिंदुस्तान यूनिलीवर’ सिडकुल हरिद्वार द्वारा अपने पूरे प्लांट के 1500 मजदूरों के मध्य मजदूर वर्ग की वर्गीय एकता को मजबूत करने के लिए एक पुस्तिका ‘मकड़ा और मक्खी’ का
भारत में पत्रकारों पर हमले अब आए दिन की बात बन गए हैं। राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप के हालिया आंकड़े इस बात को और भी स्पष्ट करते हैं। इस ग्रुप ने आंकड़ों को इकट्ठा कर यह
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।