विविध

चतुर मशीनें और बुद्धू इंसान

/chatur-machine-and-buddhoo-insaan

उपभोक्तावाद के इस दौर में तब भी इंसान ही उपभोक्ता सामानों का मालिक होता था और उनकी हैसियत से अपनी हैसियत हासिल करता था। एक सीमित अर्थ में ही ये सामान इंसानों के मालिक होते थे। जब किसी की हैसियत किसी दूसरे से तय होने लगे तो दूसरा स्वभावतः ही एक अर्थ में पहले वाले का मालिक होने लगता है। दूसरा पहले को चलाने लगता है। उपभोक्तावादी सामान इंसानों के जीवन की गति को तय करने लगते हैं। 

पंजाब : मेडिकल कैम्प के अनुभव

/punjab-medical-camp-ke-anubhav

पंजाब की भीषण बाढ़ में पीड़ित जनता को राहत पहुंचाने के लिए 23 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक विभिन्न स्थानों पर आपदा राहत मंच द्वारा मेडिकल कैम्प लगाया गया। आपदा राहत मंच प्रोग्रे

फैक्टरी में अपंग बनते मजदूर

/factory-mein-apang-banate-workers

कानपुर देहात के मोगनी पूरबराया के इंदिरा नगर कालोनी निवासी शीबू कुमार फरीदपुर बरेली में केसरपुर के पास स्थित एल्युमिनियम फैक्टरी में काम करते थे। शीबू कुमार ने बताया कि व

जनवाद पर शिकंजा कसता प्रशासन

/democracy-par-shikanjaa-kasataa-prashashan

दिल्ली/ दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव सम्पन्न हो गए हैं। एक बार फिर से DUSU में बाहुबल और धन बल की जीत हुई है। उपाध्यक्ष पद पर NSUI के प्रत्याशी तो अन्य सभी पद

न्याय पाने में बाधा बनता पुलिस प्रशासन

/nyaay-paane-mein-baadhaa-banataa-police-prashaashan

22 सितंबर 2025 की शाम को बवाना औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 4 के डी ब्लाक के प्लाट नंबर 165 में स्थित एक फैक्टरी के मजदूर (राजेश शाह) की लिफ्ट गिरने से चोट लग जाने से मृत्य

भारतीय राजसत्ता की खुराक : गर्म, ताजा रक्त

/indian-state-ki-khurak-garam-taajaa-rakt

इस खूनी राजसत्ता की मार भारत का सबसे बड़ा शोषित वर्ग- मजदूर वर्ग हर रोज झेलता है। वर्दीधारी लोग उसे कहीं भी कभी भी बेवजह पीट सकते हैं। फैक्टरी के भीतर, सड़क पर, घर में उसे कहीं भी तंग किया जा सकता है। फैक्टरी दुर्घटना से लेकर आपदा तक में उसकी मौत को आसानी से गिनती से बाहर कर दिया जाता है। अपने शोषण के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें अक्सर ही लाठी-गोली-जेल का सामना करना पड़ता है। 

पेपर लीक और उत्तराखण्ड सरकार : ना-नुकुर से नकल जिहाद तक

/paper-leak-and-uttarakhand-government-naa-nukur-se-nakal-jihaad-tak

एक बार फिर उत्तराखण्ड में प्रतियोगी परिक्षाओं के परीक्षार्थी छले गए। 21 सितम्बर, 2025 को हुई संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद उत्तराखण्ड स

अंकिता भंडारी हत्याकांड की तीसरी बरसी पर उत्तराखंड के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन

/ankita-bhandari-hatyakand-ki-teesari-barashi-par-uttarakhand-ke-kai-cities-mein-protest

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को इस 18 सितम्बर को तीन साल पूरे हो गये हैं लेकिन अंकिता के परिजनों को अभी भी पूरा इंसाफ नहीं मिला है। इस हत्याकांड के तार सत्ता से स

उत्तराखण्ड से उठी आवाज ‘पेपर चोर गद्दी छोड़’

/uttarakhand-se-uthi-voice-paper-chor-gaddi-chod

उत्तराखण्ड के विभिन्न इलाकों में युवा सड़कों पर संघर्षरत हैं। युवा ‘पेपर चोर गद्दी छोड़’ के नारे से उत्तराखण्ड को गुंजायमान कर धामी सरकार को घेर रहे हैं। एक के बाद एक भर्ती

पंजाब में मेडिकल कैंप का आयोजन

/punjab-mein-medical-camp-ka-ayojan

पंजाब के अमृतसर से 35-40 किमी दूर स्थित गांवों में 23 सितम्बर से मेडिकल कैंप का आयोजन किया जा रहा है। मेडिकल कैंप संयुक्त तौर पर चलाया जा रहा है। इसे संयुक्त रूप से आयोजि

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।