विविध

ट्रंप टैरिफ के आगे मोदी सरकार के समर्पण की शुरूआत

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मोदी सरकार के सामने संकट यही है कि वह रूस से मिल रहे सस्ते तेल को चुने या फिर अमेरिका के साथ प्रति वर्ष होने वाले कुल व्यापार लाभ को। अपनी फितरत के अनुसार तो भारत सरकार और भारतीय पूंजीपति यही चाहते हैं कि उनको दोनों जगह से होने वाला लाभ बदस्तूर जारी रहे। किन्तु डोनाल्ड ट्रंप इस सारे खेल में भाजपाईयों और उनके यारों का गुरू है। उसने वर्तमान और भविष्य के द्विपक्षीय व्यापार में भारत को हो रहे लाभ को अपना हथियार बनाया और अपनी वैश्विक शक्ति संतुलन की राजनीति के मोहरे सैट करके मोदी सरकार को ‘पटरी’ पर ला डाला।

हिन्दू फासीवाद के लंपट दस्ते

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नवनिर्वाचित संयुक्त सचिव दीपिका झा द्वारा अम्बेडकर कालेज के एक प्रोफेसर सुजीत कुमार को थप्पड़ मारने की घट

UPSC की बीमारी

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शुरूआती समय में UPSC की तैयारी की सोचता था तो मुखर्जीनगर और बत्रा सिनेमा स्वप्नलोक की दुनिया जैसा था। मुझे लगता था कि बौद्धिकता और नैतिकता का केंद्र यहीं पर होगा क्योंकि

नयी शिक्षा नीति के भूत-प्रेत

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संघी ठीक इसी वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या उसका मन माफिक इस्तेमाल करते हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि आज की वैज्ञानिक पद्धति के द्वारा वेदों में आधुनिक विज्ञान को नहीं ढूंढा जा सकता। इसी तरह आज की वैज्ञानिक पद्धति से प्राचीन भारत में परमाणु बम, मिसाइल या हवाई जहाज के अस्तित्व को नहीं प्रमाणित किया जा सकता। इसीलिए वे अपनी सुविधानुसार इस वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या तोड़ते-मरोड़ते हैं। और कोई चारा न होने पर ये सापेक्षिकतावादी या संदेहवादी रुख अख्तियार कर लेते हैं। आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धति को संदेह के दायरे में लाकर ये अपनी बेसिर-पैर की बातों को जायज ठहराने का प्रयास करते हैं।

हैप्पी दीपावली

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दीपावली की तैयारी महीनां पहले से शुरू हो जाती है। हर कोई तैयारी कर रहा होता है दीपावली को लेकर। कोई कुछ खरीदना चाहता है तो कोई कुछ। बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। चड्ढी-बनि

समान नागरिक संहिता पर सेमिनार

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देहरादून/ प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने 26 अक्टूबर 2025 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ‘समान नागरिक संहिता : जनवाद का विस्तार या फासीवादी हमला’ वि

मजदूरों के पास निरंतर संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं

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हरिद्वार/ किर्बी बिल्डिंग सिस्टम लिमिटेड, सिडकुल हरिद्वार के मजदूरों का संघर्ष जारी है। इस बीच 9-10 महीनों से लगातार संघर्ष में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। प्

माब लिंचिंग के प्रयास के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के साथ घरना-प्रदर्शन

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रामनगर (उत्तराखंड) के छोई व  बैलपड़ाव में 23 अक्टूबर के घटनाक्रम में मॉब लिंचिंग के प्रयास के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग ने अब आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। इस मा

आज की दुनिया में नई दुनिया का ख्वाब

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एक नई दुनिया का ख्वाब देखने वालों के प्रति वर्तमान व्यवस्था का रुख क्रूरता व हिंसा से भरा हुआ है। और अगर इसके लिए उन्हें फासीवाद की शरण लेनी पड़े तो उन्हें उससे भी गुरेज नहीं है। कोई नई दुनिया का ख्वाब न देखे इसके लिए वे तीखा विचारधारात्मक संघर्ष भी छेड़ते हैं। कभी कहते हैं कि ‘इतिहास का अंत हो गया है’ (मानो इनके कहने से मानवजाति नये इतिहास का निर्माण करना छोड़ देगी), तो कभी कहते हैं इस पूंजीवादी व्यवस्था का कोई विकल्प नहीं है (दियर इज नो अल्टरनेटिव-टीना)। ये बातें सरासर झूठ हैं। न तो इतिहास का अंत किया जा सकता है और न ही यह बात सच है कि पूंजीवाद का विकल्प नहीं है। पूंजीवाद का विकल्प वैज्ञानिक समाजवाद है।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।