कैसा लगता है दलित होना
आधे घंटे से मेरे आंसू नहीं रुक रहे हैं। यह किसी वंशानुगत बीमारी की तरह लग रहा है। गला रुंध रहा है, छोटी हिचकियां उठ रही हैं। हिचकियां दबाने से गला दुखता है।
आधे घंटे से मेरे आंसू नहीं रुक रहे हैं। यह किसी वंशानुगत बीमारी की तरह लग रहा है। गला रुंध रहा है, छोटी हिचकियां उठ रही हैं। हिचकियां दबाने से गला दुखता है।
आर एस (R S) काटन मिल के मजदूरों का जीवन 12-12 घंटे ड्यूटी के साथ बीत रहा था। मजदूरों की दिनचर्या में काम करना, भोजन बनाना, भोजन करना और सोना ही जीवन बना हुआ था। मजदूरों से दिन-रात जब जरूरत हो, काम
इन मुक्त व्यापार समझौतों को मोदी सरकार अपनी बहुत बड़ी सफलता व उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है। सब्जबाग दिखाये जा रहे हैं। और एक से बढ़कर एक काल्पनिक आंकड़े पेश किये जा रहे हैं।
फरीदाबाद/ 9 जनवरी को फरीदाबाद में पी एफ आफिस में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा पी एफ निकासी में सरकार द्वारा किए जा रहे मजदूर विरोघी बदलाव को वापस लेने की
वेनेजुएला के समयानुसार 3 जनवरी तड़के लगभग 2.00 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 11ः30 बजे) अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित चार शहरों पर जनसंहारक भयंकर बमबार
उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं लंबे समय से न्यूनतम वेतन व स्थाई रोजगार के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं की मांगों को लगातार अनसुनी कर रही है। इसलिए प
रुद्रपुर/ रुद्रपुर नगर निगम और प्रशासन द्वारा 7 दिसंबर 2025 को खेड़ा बस्ती स्थित ईदगाह के मैदान पर अन्यायपूर्ण तरीके से कब्जा कर लिया गया। नगर निगम द्वारा
अंकिता भण्डारी प्रकरण में संलिप्त वी आई पी का नाम सामने आने के बाद से समूचे उत्तराखण्ड में जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदेश की जनता, विभिन्न क्रांतिकारी-जनवादी संगठन, कांग्रे
गुडगांव/ दिनांक 11 जनवरी 2026 को बेलसोनिका यूनियन ने 4 घोर मजदूर विरोधी लेबर कोड्स पर गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार की शुरुआत क्रांतिकारी
हरिद्वार/ हेमिल्टन हाउसवेयर्स प्राइवेट लिमिटेड (Hamilton Housewares Pvt.
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि