ये जगह जो अभी
योजनाओं और नीतियों में
ले रही आकार
जिस पर झूम रही सरकार
घात लगाए हैं विश्व-व्यापी व्यापार
और तुम हो कितने गंवार
तुम जैसों के कारण ही
नहीं हो पा रही स्मार्ट-सिटी साकार
सोच रहे योजनाकार
कैसे हो उनका स्वप्न साकार
एक ऐसा शहर
जहां नहीं हो पंक्ति का आखिरी आदमी
वही तो गंधाता है और गंदगी फैलाता है
किचिर-किचिर करता है
पचर-पिच्च थूकता है
जहां-तहां हगता मूतता है
कचरे के ढेर में कुकुरमुत्ते-सी
झोंपड़ी में सोता है जहां आए दिन
पैदा होते अवांछित बच्चे
क्या इन सबके बीच बन सकता है
स्मार्ट-सिटी का जादुई स्वरूप...
स्मार्ट-सिटी के लिए
स्मार्ट नागरिकों की होगी भरती
जिनके पास हों रंग-बिरंगे स्मार्ट-कार्ड,
कई शहरों में मकान, फार्म-हाउस
ऊंचा ओहदा, उच्च कुल का धनपति गोत्र
लंबी गाड़ियां, सजीले ड्राइवर, कड़क रक्षक
स्मार्ट बीवियां, स्मार्ट बच्चे, स्मार्ट सेक्रेटरी
जो नहीं होता पात्र
उसे नहीं होगा स्मार्ट-सिटी में प्रवेश का अधिकार
स्व-चालित सेंसर पकड़ डालेंगे
यदि किसी ने जबरन घुसने का किया प्रयास
ऐसे नामुराद गंवार
होंगे सजा के भागीदार....