विविध

लोकसभा चुनाव परिणामों के निहितार्थ

स्पष्ट है कि भाजपा व राजग के फिर सत्तासीन होने में बड़े पूंजीपति वर्ग का बहुत बड़ा हाथ है। हिन्दू फासीवादियों के अपने ठोस आधार के साथ यही वह कारक है जो उन्हें सत्ता में पहुंचा देता है। यही 2014 व 19 के लिए सच था और यही 2024 के लिए भी सच है। और कोई कारण नहीं है कि बड़ा पूंजीपति वर्ग अपनी सोच व नीति में परिवर्तन करे। 

आपका नजरिया - अम्बेडकरवादी संगठनों का हश्र

14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती कार्यक्रम में दो जगह पर मैं शामिल हुआ। पिछले साल भी 14 अप्रैल को दो कार्यक्रमों में शामिल हुआ था। पिछले साल और इस साल के अनुभव लगभग समान हैं।

सिलेक्ट इंटरप्राइजेज कंपनी में मजदूरों का शोषण

बरेली/ लगातार बढ़ती बेरोजगारी नौजवानों को निराशा व पस्तहिम्मती में ढकेल रही है। बरेली शहर में इसी तरह के बेरोजगार घर, मकान, जेवर गिरवी रखकर कर्ज लेकर आटो

चूड़ी जुड़ाई मजदूरों की दशा

फिरोजाबाद/  फिरोजाबाद शहर में चूड़ी उत्पादन प्रक्रिया में नियोजित/कार्यरत चूड़ी जुड़ाई मजदूरों को चूड़ी जुड़ाई कार्य हेतु केरोसिन मिट््टी का तेल सेवायोजकों द्

हरिद्वार : एक मजदूर की मौत पर मजदूरों का संघर्ष

हरिद्वार/ दिनांक 27 मई को स्नो पैक कम्पनी नियर अम्बेडकर चौक, बाहदराबाद औद्योगिक क्षेत्र, हरिद्वार में सुबह 8.30 बजे भगवान दयाल नामक मजदूर की मशीन में इमर

एक मजदूर की व्यथा

    मेरा नाम श्याम सिंह है। मैं राजीव नगर फरीदाबाद में रहता हूं और परमालपुर कैमूर बिहार का स्थाई निवासी हूं। Talbrose आटोमोटिव components Ltd फरीदाबाद 14/1 में काम करने क

दिल्ली से गुजरात तक : आग से मरते मजदूर-मेहनतकश

दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र, नरेला औद्योगिक क्षेत्र व हरियाणा के कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में मई महीने में लगातार आग लगने की घटनाएं होती रहीं और कथित लोकतंत्र का पर्व

एक राष्ट्र-एक चुनाव-समान नागरिक संहिता : फासीवादी एजेण्डा

गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि सत्ता में आने पर वे अगले 5 वर्षों में पूरे देश में एक साथ चुनाव करायेंगे व साथ ही समान नागरिक संहिता लागू करेंगे। सुनने में पहली नजर

महाराष्ट्र : पुणे पोर्श कार हादसा

महाराष्ट्र के पुणे में 18 मई की रात को एक नाबालिग (17 साल 4 महीने) लड़के ने अपनी पोर्श कार से मोटरसाइकिल सवार दो लोगों (एक युवक और एक युवती) को तेज स्पीड से टक्कर मार दी।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।