गाजा की महिलाओं-बच्चों के खून में हाथ रंगते भारतीय शासक
जब से इजरायल द्वारा गाजा में भीषण नरसंहार शुरू हुआ है तब से भारतीय शासकों की इजरायल के प्रति पक्षधरता किसी से छिपी नहीं है। भारत के केन्द्र में काबिज संघ-भाजपा इजरायल के
जब से इजरायल द्वारा गाजा में भीषण नरसंहार शुरू हुआ है तब से भारतीय शासकों की इजरायल के प्रति पक्षधरता किसी से छिपी नहीं है। भारत के केन्द्र में काबिज संघ-भाजपा इजरायल के
इंकलाबी मजदूर केन्द्र के एक कार्यकर्ता की बातचीत एक खुशी नाम की महिला से होती है।
भारत के प्रमुख उद्योगों में एक ऑटो उद्योग है जो जीडीपी में 7 प्रतिशत योगदान करता है। ऑटो उद्योग अपने कम्पोनेन्ट के लिए मैन्युफैक्चरिंग से माल जुटाता है और जीडीपी के 7 प्र
रेलवे को भारत की जीवन रेखा कहा जाता है। रेलवे भारत में सबसे बड़ा रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र है। अगर रोजगार की बात छोड़ भी दें तो रेलवे गरीब मेहनतकशों के यातायात का सस्
भयंकर गर्मी से परेशान गुड़गांव के अमेजन के मजदूरों ने आवाज उठायी है। अमेजन इण्डिया वर्कर्स एसोसिएशन ने भयंकर गर्मी में काम कर रहे अमेजन के मजदूरों को राहत देने की बात की ह
NEET (राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा) 2024 का 4 जून को रिजल्ट जारी हुआ। रिजल्ट जारी होने से एक दिन पहले ही परीक्षा में धांधली के आरोप सामने आ गए थे। बिहार में दो लोगों
जब देश के मुखिया को खुद के बायोलाजिकल की जगह दैवीय होने का भ्रम होने लगे तो फिर देश में कोई भी चमत्कार संभव है। ऐसा ही एक चमत्कार चुनावी वोटिंग मशीन ईवीएम ने कर दिखाया है
1994 के सत्ता हस्तांतरण के बाद भी श्वेत पूंजीपतियों और साम्राज्यवादियों की लूट पूर्ववत जारी रही। संघर्ष के सालों में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस, सुधारवादी दक्षिण अफ्रीका की कम्युनिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन फेडरेशन कोसाटु का त्रिपक्षीय गठबंधन जो बना था वह सत्तासीन होने के बाद जारी रहा। लम्बे संघर्ष के दौरान जो व्यापक जन समर्थन मिला था, वह सत्ता में आने के बाद भी जारी रहा। 1999 के चुनाव में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस को 70 प्रतिशत मत मिले थे।
भाजपा 2024 लोकसभा चुनाव में बहुमत से नीचे क्या आयी, संघ की मानो जान में जान आ गयी। मोदी-शाह के आगे मातृ संगठन की दोयम होती जा रही स्थिति से मानो संघ को उबरने का मौका मिल
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।