9 जुलाई को आंणद को बड़ोदरा से जोड़ने वाला पुल जो कि महिसागर नदी के ऊपर बना हुआ था, ठीक बीच से टूट गया। पुल के टूटने से पुल पर चल रहे वाहन नदी में गिर गये और 20 से अधिक लोग मारे गये। कई लापता हैं और कई घायल हैं। कई घरों के रोटी कमाने वाले इस पुल के नदी में गिरने से खत्म हो गये। मोदी-शाह की जुबान से अब यह नहीं निकल रहा है कि यह ‘‘एक्ट ऑफ गॉड’’ (भगवान की करतूत) नहीं बल्कि ‘‘एक्ट आफ फ्राड’’ (भ्रष्टाचार की करतूत) है।
‘एक्ट ऑफ गॉड’ नहीं ‘एक्ट ऑफ फ्राड’ की बात मोदी जी ने 7 अप्रैल 2016 को तब बोली थी जब कलकत्ता में एक पुल गिर गया था। तब मोदी जी ने बंगाल की जनता का आह्वान किया था कि वह पुल गिरने को ‘भगवान का संकेत समझे और ममता सरकार को गिरा दे’। अब वे किसका आह्वान करेंगे कि किसकी सरकार को जनता गिरा दे।
9 जुलाई को टूटे पुल की हालत खस्ता थी और कई दिनों से स्थानीय पत्रकार और यू-ट्यूब चैनल चलाने वाले इसकी खस्ता हालत की चर्चा कर रहे थे। कोई सुनने वाला नहीं था। केन्द्र व राज्य दोनों में भाजपा की अंधी-बहरी सरकर है। ‘डबल इंजन’ की सरकार के दोनों इंजन नकारा हैं।
‘न खाता हूं न खाने दूंगा’ की बात करने वाले मोदी के राज में भ्रष्टाचार बेलगाम है। एक के बाद एक पुल गिर रहे हैं। नेशनल हाइवे धंस रहे हैं। और ऐसा सिर्फ गुजरात में ही नहीं, जहां-जहां डबल इंजन सरकारें हैं, वहां-वहां ऐसा हो रहा है। गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, बिहार में पिछले समय कई-कई पुल गिरे हैं तो हरियाणा, उत्तर प्रदेश में नई-नई बनी सड़कें धरती में समा गयी हैं।
रिपोर्ट आयी है कि पिछले 40 साल में 2130 पुल गिरे हैं। और इस दौरान लगभग आधे समय देश में भाजपा ने पहले बाजपेई और फिर मोदी के नेतृत्व में राज किया है। पिछले ग्यारह साल से तो मोदी जी ही विराजमान हैं और गुजरात में तो दो दशक से अधिक समय से वे सरकार चला रहे हैं।
मोदी और उनके लगुए-भगुए, गोदी मीडिया निरन्तर ‘गुजरात माडल’ की अंतहीन दंत कथाएं सुनाते रहे हैं। और मोदी का गुजरात माडल, संस्थागत भ्रष्टाचार के साथ-साथ शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार का अनुपम उदाहरण बन गया है। गुजरात में हाल के समय एक के बाद एक पुल ही नहीं गिरे बल्कि एक से बढ़कर लुटेरे-ठग भी निकले हैं। मेहुल चौकसी, नीरव मोदी, किरण पटेल न जाने कितने चार सौ बीस हैं जो कि कल तक मोदी के या तो करीबी थे या फिर मोदी के करीब होने का लाभ उठाकर दोनों हाथ से दौलत लूट मौज मार रहे थे।
मोदी और अडाणी के आपसी रिश्तों की तो कहानियां ही कहानियां हैं। मोदी के गुजरात और केन्द्र में राज के दौरान ही अडाणी का सितारा बुलंद हुआ है। 2014 में पहली दफा प्रधानमंत्री बनने पर शपथ लेने वे अडाणी के जहाज में बैठकर ही दिल्ली गये थे। और फिर तो अडाणी को भारत के हवाई अड्डे, बंदरगाह आदि तमाम किस्म की संपदा के साथ प्राकृतिक सम्पदा थाल में रखकर परोसे जाने लगे। वैसे भारत में नहीं अडाणी पर सं.रा. अमेरिका में भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। भारत में तो मोदी जी के रहते कभी कोई जांच संभव नहीं है। अडाणी की तरह अम्बानी और टाटा की भी खूब मौज रही है। लगभग मुफ्त में मोदी सरकार ने टाटा को ‘एयर इण्डिया’ सौंप दिया। और फिर सारे मानकों को किनारे रखकर टाटा ने ‘एयर इण्डिया’ को निचोड़ना शुरू कर दिया। नतीजा गुजरात में ही भयानक विमान दुर्घटना जिसमें दो सौ से ज्यादा लोग मारे गये।
‘गुजरात माडल’ पर मोदी के जीते जी ही ‘टोटल सियाप्पा’ हो गया है। (‘सियाप्पा’ पंजाबी शब्द है जिसका अर्थ ‘मातम मनाना, छाती पीट-पीट कर रोना है’। यह बहु प्रचलित शब्द, कई संदर्भ में प्रयोग होता है। ‘टोटल सियाप्पा’ का मतलब त्रासदी पूर्ण अराजकता है।) और इस अर्थ में गुजरात माडल पर संघी-भाजपाई और उनके चाटुकारों को छाती पीट पीटकर सियाप्पा करना चाहिए। और स्वयं मोदी-शाह को ‘सियाप्पा करने में पहलकदमी लेनी चाहिए। अपने परिवार के लोगों को भी इस काम में लगाना चाहिए।