पिंजरे में कैद चिड़िया -माया एंजलो
एक आजाद चिड़िया
फुदकती है,
हवा के पंखों पर सवार
और नदी की लहरों पर
बहती हुई उस छोर तक।
अपने परों को
नारंगी सूरज की रोशनी
में डुबोए हुए,
एक आजाद चिड़िया
फुदकती है,
हवा के पंखों पर सवार
और नदी की लहरों पर
बहती हुई उस छोर तक।
अपने परों को
नारंगी सूरज की रोशनी
में डुबोए हुए,
करता है सवाल एक जेन-जी
जो पैदा हुआ हिन्दू घर में
एक हिन्दू खतरे में कैसे?
देश का राष्ट्रपति : हिन्दू
देश का उप राष्ट्रपति : हिन्दू
ऐ शोषक!
तुम्हारे लिए आसान होगा
हमें कैद कर देना
पर हमें इससे डर नहीं लगता
बल्कि आती है
तुम्हारी इस धूर्तता पर हंसी।
कितना डरते हो तुम हमसे
जीवन के इस पल में...
हमने महसूस किया है, कल को
जब बात उठी है, पुरखों की...
हमने याद किया है, भगत सिंह को।
लाख पैदा हुए, लाख मुर्दा हुए
वही तो अब तक जिंदा है...
कौन जात हो भाई?
‘‘दलित हैं साब!’’
नहीं मतलब किसमें आते हो?
आपकी गाली में आते हैं
गंदी नाली में आते हैं
और अलग की हुई थाली में आते हैं साब!
पहले खेत बिके
फिर घर फिर जेवर
फिर बर्तन
और वो सब किया जो गरीब और अभागे
तब से करते आ रहे हैं जब से यह दुनिया बनी
पत्नी ने जूठा धोया
ये जगह जो अभी
योजनाओं और नीतियों में
ले रही आकार
जिस पर झूम रही सरकार
घात लगाए हैं विश्व-व्यापी व्यापार
और तुम हो कितने गंवार
तुम जैसों के कारण ही
काश ये बेटियां बिगड़ जाएं
इतना बिगड़ें के ये बिफर जाएं
उन पे बिफरें जो तीर-ओ-तेशा लिए
राह में बुन रहे हैं दार ओ रसन
और हर आजमाइश द- ए -दार -ओ द- रसन
बात करते हैं और सपने बहुत देखते हैं लोग
बेहतर भविष्य के लिए,
सुखी स्वर्णिम लक्ष्य के लिए,
देखा जाता है उन्हें दौड़ते हुए और पीछा करते हुए,
हम अत्याचारी से पूछते हैं-
हमें यातना देना कब बंद करोगे तुम
वह हमसे पूछता है-
सांप कब खड़ा होगा अपने पैरों के बल
चूहा कब शादी करेगा बिल्ली के बच्चों से
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।