युद्धोन्माद के विरुद्ध बर्तोल्त ब्रेख्त की कविताएं

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:19
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युद्ध जो आ रहा है (1936-38)

युद्ध जो आ रहा है
पहला युद्ध नहीं है।
इसे पहले भी युद्ध हुए थे।
पिछला युद्ध जब खत्म हुआ
तब कुछ विजेता बने और कुछ विजित-
विजितों के बीच आम आदमी भूखों मरा
विजेताओं के बीच भी मरा वह भूखा ही।


 

नेता जब शान्ति की बात करते हैं (1936-38)

नेता जब शान्ति की बात करते हैं
आम आदमी जानता है
कि युद्ध सन्निकट है
नेता जब युद्ध का कोसते हैं
मोर्चे पर जाने का आदेश
हो चुका होता है


 

वे जो शिखर पर बैठे हैं, कहते हैंः (1936-38)

वे जो शिखर पर बैठे हैं, कहते हैंः
शान्ति और युद्ध के सार तत्व अलग-अलग हैं
लेकिन उनकी शान्ति और उनका युद्ध
हवा और तूफान की तरह हैं
युद्ध उपजता है उनकी शान्ति से
जैसे मां की कोख से पुत्र
मां की डरावनी शक्ल की याद दिलाता हुआ
उनका युद्ध खत्म कर डालता है
जो कुछ उनकी शान्ति ने रख छोड़ा था।


 

जनरल, तुम्हारा टैंक एक शक्तिशाली वाहन है

जनरल, तुम्हारा टैंक एक शक्तिशाली वाहन है
वह जंगलों को रौंद देता है
और सैकड़ों लोगों को चपेट में ले लेता है
लेकिन उसमें एक दोष है
उसे एक चालक चाहिए

जनरल, तुम्हारा बमवर्षक जहाज
शक्तिशाली है
तूफान से तेज उड़ता है वह और
एक हाथी से ज्यादा भारी वजन उठाता है
लेकिन उसमें एक दोष है
उसे एक कारीगर चाहिए

जनरल, आदमी बहुत
उपयोगी होता है
वह उड़ सकता है और
हत्या भी कर सकता है
लेकिन उसमें एक दोष है

वह सोच सकता है

मूल जर्मन से अनुवाद : मोहन थपलियाल

आलेख

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