सावित्री बाई फुले के जन्म दिवस पर परिचर्चा
दिनांक 3 जनवरी को प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर विचार गोष्ठी-परिचर्चाओं का आयोजन किया गया। रामनगर, हरिद्
दिनांक 3 जनवरी को प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर विचार गोष्ठी-परिचर्चाओं का आयोजन किया गया। रामनगर, हरिद्
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि
वो जुमला गढ़ते हैं कि
बेटी बचाओ? बेटी पढ़ाओ?
मकसद साफ है
पहले बेटी तो बचाओ तभी तो पढ़ाओगे।
हर जगह नजर है उनकी हमारी बेटियों पर
कैसे और कहां तक छुपाओगे?
वेनेजुएला की स्वतंत्रता व सम्प्रभुता पर अमरीकी साम्राज्यवादी आक्रमण की हर ओर से निंदा हुयी है। कुछ ही ऐसे शासक हैं जो मोदी की तरह मौन या तटस्थ हैं। और बहुत-बहुत थोड़े से हैं जो इजरायल के नेतन्याहू की तरह हैं जो निर्लज्जतापूर्वक ट्रम्प के साथ खड़े हैं। क्यांकि वे भी ट्रम्प की ही तरह नमूने हैं। खास बात यह है कि ट्रम्प का सबसे ज्यादा विरोध स्वयं स.रा.अमरीका में हुआ है। बड़े-बड़े विशाल जुलूस निकले हैं जिनमें वेनेजुएला पर अमरीकी हमले की निंदा की गयी है।
आजादी के बाद देश में पूंजीवादी विकास के चलते 1980-90 के दशक तक गांवों-कस्बों का जो स्वरूप उभरा वह अत्यन्त अजीबो-गरीब था। वह एक साथ विकास के होने और न होने दोनों को व्यक्त करता था। इसमें सामंती मूल्य-मान्यताएं और आचार-विचार अत्यन्त उलझे हुए तरीके से पूंजीवादी महत्वाकांक्षाओं से तालमेल बैठाये हुए थे। उपभोक्तावादी सामानों से लबरेज दहेज की मांग और पूर्ति इसका उदाहरण है।
ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के दौरान अमरीकी बड़ी तेल कम्पनियों से वायदा किया था कि वे वेनेजुएला के तेल भण्डार पर उनका नियंत्रण फिर से कायम कर देंगे। ट्रम्प के चुनाव प्रचार में इन बड़ी तेल कम्पनियों ने भारी धन चंदे के रूप में दिया था। वेनेजुएला में ह्यूगो चावेज ने इन कम्पनियों की नियंत्रणकारी स्थिति को समाप्त करके राज्य के मालिकाने की कम्पनी बना दी थी। अब ये तेल कम्पनियां राष्ट्रीयकरण किये जाने के बाद अपने नुकसान के हरजाने की मांग करेंगी। सबसे बढ़कर तो अब वेनेजुएला के तेल भण्डार पर इनका कब्जा होगा।
बरेली/ आटो-रिक्शा टैम्पो चालक वेलफेयर एसोशिएसन का 11 वां सम्मेलन बरेली जं.
2047 तक देश को विकसित बनाने की मोदी सरकार की नौटंकी जारी है। देश विकसित बने न बने पर देश के कानून जरूर विकसित भारत नाम के हो जायेंगे। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा से जुड़ा एक न
काकोरी के शहीद - रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिडी और रोशन सिंह हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी रहे हैं। इनमें बिस्मिल और अशफाक की दोस्ती हिंदू-म
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।