डोनाल्ड ट्रम्प जब से दुबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब से वे ऐसे-ऐसे कारनामे कर रहे हैं कि अनायास ही वे महान स्पेनिश लेखक मिगुएल डे सर्वेंट्स के उपन्यास ‘डॉन क्विगजोट’ के पात्र सांजोपाजा की याद दिला देते हैं। उनकी शांति स्थापित करने की स्व निर्मित कथाओं के आधार पर उन्होंने शांति के नोबेल पुरूस्कार पर अपना दावा पेश किया था। उन्हें पुरूस्कार मिले इसके लिए उन्होंने न जाने किस-किस से अपने लिए पैरवी करवायी। इनमें बलूचों पर बमबारी करने वाले पाकिस्तान की सेना का अध्यक्ष आसीम मुनीर था तो गाजा पट्टी में नरसंहार का अपराधी नेतन्याहू भी था। जिसके सिर पर यौन अपराध से लेकर दुनिया में व्यापार युद्ध छेड़ने का आरोप है वह अपने लिए शांति का नोबेल पुरूस्कार चाहता है। और उसकी पैरवी करने वाले भी उसी की तरह के युद्धोन्मादी, अपराधी और शांति के दुश्मन हैं।
खैर! इस साल के शांति के नोबेल पुरूस्कार की घोषणा हुयी और वेनेजुएला की एक महिला राजनेता मारिया कोरीना मचादो को यह पुरूस्कार दे दिया गया। पुरूस्कार देने वाली कमेटी ने मारिया की तारीफ में कसीदे गढ़े और कहा यह पुरूस्कार ‘‘ऐसी महिला को जा रहा है जिन्होंने गहराते अंधेरे के बीच लोकतंत्र की लौ को जलाए रखा है’’।
मारिया कोरीना क्या है इसका आसानी से अनुमान तब लग जाता है जब उन्होंने अपना पुरूस्कार वेनेजुएला की जनता के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को समर्पित कर दिया। इस रूप में ट्रम्प खुद को खुश कर सकते हैं कि आखिर में इस साल पुरूस्कार तो उन्हीं को समर्पित हो गया है।
मारिया भी बांग्लादेश के नोबेल प्राप्त मोहम्मद युनूस की तरह ही हैं। वे वेनेजुएला में अमेरिका के आशीर्वाद से सत्ता की प्रबल दावेदार हैं।
असल में लम्बे समय से तेल और गैस से सम्पन्न वेनेजुएला अमरीकी साम्राज्यवाद की आंखों में खटक रहा है। पहले हृयूगो शावेज और अब निकोलस मुदरो उसको आंखें दिखाते रहे हैं। शावेज ने तो वेनेजुएला के तेल और गैस का राष्ट्रीयकरण कर अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी। अमेरिकी साम्राज्यवाद पहले शावेज को सत्ता से हटाने के सब यत्न करने के बाद असफल रहा तो अब वह यही काम मुदरो के साथ करना चाहता है। और यहां तक कि अब मियां ट्रम्प उस पर सीधे हमले की धमकी दे रहा है। अमेरिकी साम्राज्यवाद के घृणित मंसूबों के लिए मारिया कोरीना मचादो एक मोहरा भर है।
मारिया की साख बढ़ाने और महिमामण्डन करने के लिए ही उन्हें शांति का नोबेल पुरूस्कार दिया गया। मियां ट्रम्प को भले ही शांति का नोबेल पुरूस्कार न मिला हो परन्तु उनकी अपनी चेली को तो मिल ही गया है।