भारत का मजदूर वर्ग उदारीकरण- निजीकरण की नीतियों के भारत में लागू होने के बाद की सबसे तीव्र लहरों में से एक (और संभवतः सबसे व्यापक) से गुजर रहा है। यद्यपि यह लहर अप्रैल माह की शुरूआत में मानेसर की फैक्टरियों से शुरू हुई। पर इसकी आहट मार्च माह में जगह-जगह फूटे संघर्षों से मिलनी शुरू हो गयी थी। पानीपत की रिफाइनरी निर्माण के मजदूरों का संघर्ष अप्रैल-मई में आने वाले तूफान की आहट दे रहा था। पर इसके अतिरिक्त भी देश के विभिन्न कोनों में संघर्ष मजदूरों की सहन सीमा चुकने का संकेत दे रहे थे। यहां इन संघर्षों का एक सामान्य विवरण लेने के पश्चात इन संघर्षों की कुछ आम विशेषताओं की चर्चा की गयी है।
मार्च माह व उससे पहले
14 जनवरी - सोनभद्र (उ.प्र.)- ओबरा के थर्मल पावर प्लांट के निर्माण मजदूर लम्बे समय से वेतन भुगतान न होने के चलते 14 जनवरी 26 को हड़ताल पर चले गये। इसके बाद ये पुनः 24 मार्च को फिर से हड़ताल पर गये।
2 फरवरी-बेगुसराय (बिहार)- इंडियन आयल कारपोरेशन के ठेका मजदूर; मजदूर की मान्यता, न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा (ईएसआई-पीएफ) व अन्य बुनियादी सुविधाओं (पेयजल, शौचालय, शेड आदि) की मांग को लेकर एक दिन की हड़ताल पर चले गये। एक मजदूर नेता को गिरफ्तार कर लिया गया और बाकी मजदूरों को बाउंसरों ने धमकाया।
22 फरवरी- पानीपत (हरियाणा)- इंडियन आयल कारपोरेशन की रिफाइनरी के दो निर्माण मजदूरों की मौत होने पर 30-40 हजार लार्सन एण्ड टुब्रो व अन्य कंपनियों के निर्माण मजदूरों ने काम बंद कर दिया। मजदूरों पर लाठी चार्ज किया गया। 2900 मजदूरों पर मुकदमा लगाया गया। मजदूर 8 घण्टे का कार्यदिवस, रविवार अवकाश व ओवरटाइम के दोगुने भुगतान की मांग कर रहे थे।
23 फरवरी- वापी (गुजरात)- रियालंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी आलोक इंडस्ट्रीज के मजदूर 23 फरवरी को वेतन वृद्धि, बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गये। आलोक इंडस्ट्रीज की सिलवासा व दादरा नागर हवेली प्लांट के मजदूर भी संघर्ष के समर्थन में आ गये।
26 फरवरी- सूरत (गुजरात)- आर्सेलर मित्तल निप्पोन स्टील इंडिया लिमि. के 2000 मजदूर पानीपत के मजदूरों से प्रभावित हो 8 घण्टे के कार्य दिवस, दोगुने ओवरटाइम, 7 तारीख को वेतन भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गये। 40 मजदूर हत्या के प्रयास के मुकदमे में गिरफ्तार कर लिये गये।
27 फरवरी- बेतुल (म.प्र.)- पश्चिमी कोल लिमिटेड के ठेका मजदूर 15 दिन की भूख हड़ताल पर चले गये। वे ठेकेदारों द्वारा 4 माह से मजदूरी न देने व तय मजदूरी न देने पर संघर्ष में उतरे।
27 फरवरी- श्रीकेला खार सावन (झारखण्ड)- गमहरिया इंडस्ट्रियल टाउनशिप के भारत इंजीनियरिंग बाॅडी बिल्डिंग कम्पनी के मजदूर 8 घण्टे कार्य दिवस, दोगुने ओटी, ई एस आई-पी एफ को लेकर धरने पर जुटे। 2 मार्च को बाउंसरों ने मजदूरों पर हमला बोला।
27 फरवरी- भरूच (गुजरात)- एशियन पेण्ट्स के मजदूर 8 घण्टे कार्य दिवस, दोगुने ओटी, 7 तारीख को वेतन भुगतान को लेकर हड़ताल पर गये।
2 मार्च- कोटा (राजस्थान)- चम्बल फर्टिलाइजर एण्ड केमिकल (बिड़ला ग्रुप) के मजदूर 8 घण्टे कार्यदिवस; 26 दिन काम, दोगुने ओवरटाइम को लेकर हड़ताल पर गये।
3 मार्च- रेवा (म.प्र.)- अल्ट्राटेक सीमेण्ट (आदित्य बिड़ला ग्रुप) ने 300 स्थानीय मजदूरों को बेला प्लांट से निकाल दिया था। संघर्षरत मजदूरों ने बाहरी मजदूर भर्ती के प्रयास पर गेट बंद कर दिये। 16 मार्च को इनकी देखा-देखी झारखण्ड व आंध्रा के दो प्लांटों के मजदूर भी हड़ताल पर गये।
4 मार्च - सोनभद्र (उ.प्र.)- एनटीपीसी के प्रोजेक्ट में लगे विभिन्न कम्पनियों के ठेका मजदूर 8 घण्टे काम, दोगुने ओटी, सामाजिक सुरक्षा, स्थायी रोजगार को लेकर हड़ताल पर।
9 मार्च- बक्सर (बिहार)- बक्सर थर्मल पावर प्लांट के निर्माण मजदूर 8 घण्टे काम, दोगुने ओवरटाइम, समय पर वेतन भुगतान को लेकर दूसरी बार हड़ताल पर गये।
9 मार्च- पूर्वी सिंघभूमि- जमशेदपुर (झारखण्ड)- टाटा स्टील के 40 ठेका मजदूर बर्खास्तगी पर 4 दिन के धरने पर बैठे।
10 मार्च- चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)- वेदांता ग्रुप की सब्सिडियरी हिन्दुस्तान जिंक के लार्सन एण्ड टुब्रो के निर्माण मजदूर 26 दिन काम, दोगुने ओटी व समय पर वेतन भुगतान को लेकर हड़ताल पर।
12 मार्च- शक्ति (छत्तीसगढ़)- वेदांता पावर के मजदूर वेतन वृद्धि, 8 घण्टे कार्यदिवस, स्थायीकरण को लेकर हड़ताल पर।
12 मार्च- बडोदरा (गुजरात)- पानीपत की देखादेखी इंडियन आयल कारपोरेशन के लार्सन टुब्रो के ठेका निर्माण मजदूर 8 घण्टे कार्यदिवस, 26 दिन काम को लेकर हड़़ताल पर।
14 मार्च- सिंगरौली (म.प्र.)- अडाणी पावर के मजदूर एक मजदूर की मौत पर मुआवजे, 8 घण्टे कार्यदिवस को लेकर हड़ताल पर।
14 मार्च- कोरबा (छत्तीसगढ़)- अडाणी पावर के 6000 मजदूर सिंगरौली के मजदूरों के समर्थन में हड़ताल पर। 16 मार्च को रायगढ़ के मजदूर भी हड़ताल पर गये।
17 मार्च- सोनभद्र (उ.प्र.)- अडाणी ग्रुप के एसीसी सीमेंट के मजदूर 8 घण्टे कार्यदिवस व समय पर भुगतान को लेकर हड़ताल पर।
18 मार्च - कूच (गुजरात)- टाटा पावर के कोल पावर प्रोजेक्ट के मजदूर ओटी, 8 घण्टे कार्यदिवस, बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए हड़ताल पर।
18 मार्च- रायगढ़ (छत्तीसगढ़)- जिंदल स्टील के निर्माण मजदूर वेतन वृद्धि, 8 घण्टे कार्यदिवस को लेकर हड़ताल पर। जनवरी से मार्च तक बड़े पावर प्लांटों, निर्माण क्षेत्र में 28 से अधिक हड़तालें हुईं।
अप्रैल माह
ऊर्जा क्षेत्र-
1. आई ओ सी एल पानीपत- 1 अप्रेल को पुरानी मांगें पूरी न होने पर पुनः हड़ताल लेकिन एक दिन बाद समाप्त
2. एनटीपीसी पतरातू (झारखण्ड)- 1 अप्रैल को मजदूरी, 8 घण्टे कार्य दिवस व काम की स्थितियों को लेकर हड़ताल।
3. एनटीपीसी नवीनगर (बिहार) - 1 अप्रैल को मजदूरी, 8 घण्टे कार्यदिवस, ओटी व काम की स्थितियों को लेकर हड़ताल।
4. अडाणी पावर-रायखेड़ा-रायपुर (झारखण्ड) - 1 अप्रैल को
मजदूरी, 8 घण्टे कार्यदिवस, ओटी, काम की स्थितियों को लेकर हड़ताल।
अप्रैल-मई औद्योगिक क्षेत्र में हड़ताल
मांगें- वेतन वृद्धि, 8 घण्टे कार्यदिवस, दोगुना ओटी, कार्य की बेहतर शर्तें। मुख्यतः ठेका मजदूर संघर्षरत।
आई एम टी मानेसर
1. होण्डा- 2 अप्रैल- 2 दिन बाद सफल
2. मुंजाल शोबा- 4 अप्रैल
3. सत्यम आटो कम्पोनेन्ट - 4 अप्रैल
4. रूप पालिमर लिमिटेड - 6 अप्रैल
5. ऋचा ग्लोबल के कई प्लांट- 7 अप्रैल
6. माडेलमा एक्सपर्ट- 8 अप्रैल
7. रिको आटो
8. सुपराजीत इंजीनियरिंग
9. सिरमा एस जी एस टेक्नोलाजी
10. फोरजा मेडी प्रा.लि.
11. फैशन (एफ ए होम एंड अपैरल)
12. ओ मोवियो इंडिया
13. प्रीकोल लि.
14. सरिता हांडा एक्सपोर्ट
नोएडा, उ.प्र. (9 अप्रैल-20 अप्रैल)
1. ऋचा ग्लोबल व अन्य गारमेंट फैक्टरियां
2. मदरसन
3. लग्जर इण्टरनेशनल
4. डिक्सियन
5. केंट आर ओ
6. आई सी एल लाइटिंग साल्यूशंस
7. विंडसन ट्रेड मार्ट
8. आई टी ई एल मोबाइल
9. स्पार्क मिंडा
10. बीपीएल
11. Vivo, ग्रेटर नोएडा
12. सेक्टर 43 के सिक्योरिटी गार्ड्स हड़ताल पर
फरीदाबाद, हरियाणा
1. भारत गियर्स लिमिटेड- 9 अप्रैल
2. मदरसन, साईं ऑटोमोबाइल - 13 अप्रैल
3. शिवालिक प्रिंट्स, सेक्टर 6 - 20 अप्रैल
4. पूनम इंडस्ट्रीज, सेक्टर 22 - 24 अप्रैल
5. Sietz आटो, सेक्टर 6 - 27 अप्रैल
6. एस एस इंजीनियर्स, सेक्टर 25 - 28 अप्रैल
7. अहूजा प्लास्टिक, सेक्टर 24 - 29 अप्रैल
8. असेंट प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, सेक्टर 59 और ग्लोबल आटोमोटिव, सेक्टर 24, ANKW फार्मा, सेक्टर 6- 9 मई
9. एटाॅप प्रोडक्ट्स, सेक्टर 24, कर्मा प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड, डिस्पोसेफ हेल्थ एंड केयर, सेक्टर 58 - 11 मई
10. पूजा प्रोसेसर्स, सेक्टर 58 प्लांट 212, के आर कम्पोनेंट प्राइवेट लिमिटेड, सेक्टर 6,- 12 मई
11. ओमेगा ट्यूब प्रोफाइल प्राइवेट लिमिटेड- 13 मई
12. कैनन इडिया - 14 मई
पानीपत, हरियाणा
गुप्ता स्पिनिंग मिल - 10 अप्रैल
अलवर, राजस्थान -
1. ल्यूमैक्स इंडस्ट्रीज, नपिनो आटो, रिलैक्सो, भिवाड़ी - 16 अप्रैल
2. हाइटेक गियर्स लिमिटेड, भिवाड़ी, दीपक हाउसवेयर एंड टायज, भिवाड़ी, कुमी इंडस्ट्रीज, खुशखेड़ा -17 अप्रैल
3. छप्क्म्ब् इंडिया, नीमराना - 18 अप्रैल
4. भगवती प्रोडक्ट्स, टपूकड़ा - 20 अप्रैल
5. हिताची, नीमराना, यूनाइटेड ब्अरीज लिमिटेड, चैपानकी, बीकेटी टायर्स, चैपानकी - 21 अप्रैल
6. बेस्टेक्स इंडिया, टपूकड़ा - 27 अप्रैल
7. कजारिया टाइल्स, टपूकड़ा - 1 मई
रुद्रपुर, उत्तराखंड -
1. Varroc इंजीनियरिंग, यजाकी आटोमोटिव - 18 अप्रैल
2. महाबल आटो, वी गार्ड इंडस्ट्रीज - 24 अप्रैल
3. डीवीएस इंडस्ट्रीज - 25 अप्रैल
4. टी वी एस चक्रा - 12 मई
5. रीजेंसी हेल्थ केयर फार्मा कम्पनी- 13 मई
हरिद्वार, उत्तराखंड
1. सियान हेल्थकेयर - 24 अप्रैल
2. कैंपस उद्योग - 8 मई
3. हैमिल्टन हाउसवेयर - 9 मई
4. लग्जर राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स - 11 मई
5. जीनस कम्पनी, इंडो हर्बल, - 12 मई
6. प्रिया गोल्ड, एकम्स, बायोमेड, पिल, आस्कर मेडिकेयर - 14 मई
7. kolors इंडिया प्रा.लि., हेमिल्टन कम्पनी - 15 मई
देहरादून
1. डिक्सन दवा कम्पनी- 14 मई
2. विन्डलास दवा कम्पनी - 15 मई
हल्द्वानी, उत्तराखंड
1. मदरसन - 20 अप्रैल
रुड़की, उत्तराखंड
1. लूसेंट बायोटेक लिमिटेड - 28 अप्रैल
मथुरा, यूपी
1. मदरसन (पथरी, भरतपुर जिला) - 14 अप्रैल
2. नामचीन स्वीटी सुपारी फैक्टरी - 28 अप्रैल
पंजाब
1. स्पोर्टकिंग इंडिया (बठिंडा) - 19 अप्रैल
2. माडर्न आटोमोटिव (मंडी गोबिंदगढ़) - 27 अप्रैल
3. गंगा एक्रोवुल्स (दोराहा, लुधियाना) - 28 अप्रैल
दिल्ली
बवाना इंफ्रा के मालियों की हड़ताल - 12 मई
कुछ आम बातें
1. यद्यपि मजदूर हड़तालों का ज्वार अप्रैल माह में मानेसर-नोएडा में सर्वाधिक चढ़ाव पर दिखा। पर इसकी आहट जनवरी-मार्च के बीच की ऊर्जा-निर्माण क्षेत्र में ठेका मजदूरों की हड़तालों में दिख गया था।
2. यद्यपि वर्तमान में यह ज्वार उत्तर भारत में केन्द्रित है पर जनवरी-मार्च की तस्वीर इस संभावना को बल प्रदान करती है कि यह देशव्यापी बन जाए।
3. ठेका मजदूर इन हड़तालों की हर जगह मुख्य ताकत हैं। लगभग सभी जगह ठेका मजदूर स्वतः स्फूर्त तरीके से काम बंद कर सड़कों पर उतरे। स्थायी मजदूर व उनकी यूनियनें ज्यादातर जगह नहीं हैं व जहां हैं भी तो इन संघर्षों से दूर रहीं।
4. ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते गैस की बढ़ती कीमतों ने इस आक्रोश के एन सी आर क्षेत्र में तेजी से फूटने में भूमिका निभायी।
5. केन्द्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनें इन संघर्षों से हतप्रभ रहीं और उन्होंने जुबानी जमाखर्च व रस्मी आयोजनों से बढ़कर इन संघर्षों में खास भूमिका नहीं निभायी। यह दिखाता है कि जुझारू फैक्टरी संघर्ष की भी ये क्षमता खोती जा रही हैं।
6. शासन-प्रशासन के मानेसर-नोएडा में दमन, मजदूर नेताओं पर संगीन मुकदमे गिरफ्तारी-रासुका के बावजूद यह मजदूर उभार की लहर बढ़ती जा रही है।
7. संगठित मजदूरों के अधिकारों पर हमला बोलने वाली चार श्रम संहिताओं को लागू करने का मजदूर वर्ग की ओर से जवाब ठेका मजदूरों ने दिया है। तीन राज्यों में ये सरकारों को न्यूनतम वेतन बढ़ाने को मजबूर कर चुके हैं। अब मालिकों से इंच-इंच संघर्ष कर बढ़ा वेतन लागू करा रहे हैं।
(तथ्य स्रोतः Migrant workers solidarity network की पुस्तिका YELLOW HELMETS व मजदूर कार्यकर्ताओं के फेसबुक पेज)