राजनीति

बिहार चुनाव : एन डी ए की भारी जीत के मायने

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बिहार चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। एन डी ए गठबंधन पिछले चुनाव से भी भारी जीत हासिल कर सत्ता संभालने की तैयारी में है। इण्डिया गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। टक्कर का प

उत्तराखण्ड के 25 साल : पूंजीपति मालामाल - मेहनतकश जनता कंगाल

उत्तराखण्ड को बने 25 साल हो गये। मोदी और धामी ने इस मौके को ऐसे रूप में पेश करने की कोशिश की मानो गंगा फिर से धरती पर अवतरित हो गयी हो। उत्तराखण्ड को बने 25 साल हो गये तो

‘नो किंग्स’ प्रदर्शनों की दूसरी लहर

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अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ 18 अक्टूबर को लाखों युवा, श्रमिक, विद्यार्थी व आम जन सड़कों पर उतरे। इसे ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन की दूसरी लहर कहा गया। 2700 से ज्यादा प

एस.आई.आर. : बिहार के बाद अब 12 राज्यों में फासीवादी परियोजना

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चुनाव आयोग बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण कराने के बाद अब इसे पूरे देश पर थोपने को उतारू है। इस सम्बन्ध में 28 अक्टूबर से 7 फरवरी तक 12 राज्यों में एस आई आर की घोषणा चुनाव

इंटरव्यू : आधा-अधूरा लोकतंत्र नहीं चाहिए -सज्जाद हुसैन कारगिली

24 सितंबर को लद्दाख में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल था। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय में आग

....और मियां ट्रम्प टापते रह गये

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डोनाल्ड ट्रम्प जब से दुबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब से वे ऐसे-ऐसे कारनामे कर रहे हैं कि अनायास ही वे महान स्पेनिश लेखक मिगुएल डे सर्वेंट्स के उपन्यास ‘डॉन क्विगजोट’

और अब मेडागास्कर में युवा विद्रोह - राष्ट्रपति भागे

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नेपाल के जेन-जेड युवाओं की दिखायी राह पर मेडागास्कर के युवा बढ़ चुके हैं। सितम्बर माह में बिजली व पानी की कटौती के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का सरकार द्वारा दमन किया ग

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।